महोबा में श्री राजपूत करणी सेना ने यूजीसी रेगुलेशन अधिनियम 2026 के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। कलेक्ट्रेट परिसर में कार्यकर्ताओं ने इस बिल को ‘काला कानून’ बताते हुए जमकर नारेबाजी की। सवर्ण समाज के हितों पर कुठाराघात बताते हुए, करणी सेना ने राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन जिलाधिकारी को सौंपा और बिल वापस न होने पर देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी दी। यह विरोध प्रदर्शन भारत सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए यूजीसी अधिनियम 2026 के खिलाफ था। श्री राजपूत करणी सेना के बैनर तले बड़ी संख्या में पदाधिकारी और कार्यकर्ता जिला मुख्यालय पहुंचे। उन्होंने केंद्र सरकार के इस नए नियम को सवर्ण विरोधी बताते हुए अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। प्रदेश उपाध्यक्ष जितेंद्र सिंह परिहार और जिलाध्यक्ष प्रदीप सिंह भदौरिया के नेतृत्व में दिए गए ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि 15 जनवरी 2026 को लागू किया गया यह अधिनियम सामान्य वर्ग के छात्र-छात्राओं के लिए घातक साबित होगा। करणी सेना का तर्क है कि इस कानून से अन्य वर्गों के छात्रों में द्वेष की भावना पैदा हो सकती है। संगठन ने आशंका व्यक्त की है कि इसके परिणामस्वरूप झूठी शिकायतों के आधार पर सवर्ण छात्रों का उत्पीड़न बढ़ेगा और उन्हें शिक्षा से वंचित करने की साजिश रची जा सकती है। महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष आरती सेंगर ने भी सरकार की आलोचना की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सामान्य वर्ग के छात्रों को पहले से ही उच्च मेरिट की चुनौती का सामना करना पड़ता है, जबकि अन्य वर्गों को आरक्षण का लाभ मिलता है। ऐसे में यह नया कानून सवर्ण युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल देगा, जिससे प्रताड़ित होकर छात्र आत्महत्या जैसे आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर हो सकते हैं। “काला कानून वापस लो” और “सवर्णों के सम्मान में, करणी सेना मैदान में” जैसे नारों के साथ कार्यकर्ताओं ने डीएम कार्यालय के बाहर धरना दिया। प्रदर्शन में विकास सिंह, जनक सिंह परिहार, नरेंद्र कुमार, कुसुम चंदेल और ममता तोमर सहित दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद रहे। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि इस अधिनियम को वापस नहीं लिया गया, तो देशव्यापी आंदोलन किया जाएगा। तो यह विरोध प्रदर्शन महोबा की सड़कों से निकलकर पूरे देश में एक बड़े आंदोलन का रूप ले लेगा।


