कानपुर। अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ती जा रही है। पुलिस को नई-नई जानकारियां हो रही है। अब इस मामले की परतें खुलने के साथ ही सरकारी अस्पतालों के कुछ कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। पुलिस को आशंका है कि ये कर्मचारी सिंडिकेट के लिए मुखबिरी कर रहे थे और अस्पतालों में आने वाले मरीजों की गोपनीय जानकारी गिरोह तक पहुंचा रहे थे।
सुनियोजित तरीके से चल रहा था सिंडिकेट
पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह पूरा खेल बेहद सुनियोजित तरीके से चल रहा था। सरकारी अस्पतालों में तैनात कुछ कर्मचारी किडनी रोगियों पर विशेष नजर रखते थे। जांच में सामने आया है कि गिरोह का निशाना मुख्य रूप से ऐसे मरीज होते थे जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं और जल्दी इलाज चाहते हैं। कर्मचारियों का काम था कि ऐसे मरीजों की पहचान कर उनकी आर्थिक हैसियत, परिवार की स्थिति और संपर्क नंबर समेत पूरी कुंडली सिंडिकेट तक पहुंचाई जाए। इसके बाद गिरोह के सदस्य मरीजों से संपर्क कर उन्हें अवैध ट्रांसप्लांट के जाल में फंसाते थे।
एंबुलेंस चालक शिवम बना अहम कड़ी
इस पूरे नेटवर्क में एंबुलेंस चालक शिवम की भूमिका सबसे अहम मानी जा रही है। पुलिस जांच में पता चला है कि सरकारी अस्पतालों के संदिग्ध कर्मचारी सीधे शिवम के संपर्क में थे। शिवम की कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी सीडीआर खंगालने पर पुलिस के हाथ कई अहम सुराग लगे हैं। सीडीआर में कई ऐसे नंबर मिले हैं जो अस्पताल कर्मचारियों और सिंडिकेट के बीच की कड़ी जोड़ते हैं।
कई नंबर सर्विलांस पर, पूछताछ शुरू
सीडीआर से मिले संदिग्ध नंबरों को पुलिस ने सर्विलांस पर ले लिया है। इन नंबरों की लोकेशन और बातचीत का ब्योरा खंगाला जा रहा है। पुलिस ने इन नंबरों के आधार पर कई लोगों को चिन्हित कर पूछताछ भी शुरू कर दी है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में कई और चौंकाने वाले नाम सामने आ सकते हैं।
जल्द हो सकती हैं और गिरफ्तारियां
पुलिस अधिकारियों ने साफ किया है कि जांच सही दिशा में आगे बढ़ रही है। अस्पताल कर्मचारियों की भूमिका की गहनता से जांच की जा रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि इस खेल में कितने कर्मचारी शामिल थे और उन्हें इसके बदले क्या फायदा मिलता था। सूत्रों की मानें तो साक्ष्य पुख्ता होते ही इस मामले में और गिरफ्तारियां होना तय है।
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट का बड़ा रैकेट पकड़ा गया था। इसमें गरीब लोगों को पैसों का लालच देकर उनकी किडनी निकाली जाती थी और अमीर मरीजों को ऊंचे दामों पर बेची जाती थी। इस मामले में अब तक नौ आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। अब सरकारी सिस्टम से जुड़े लोगों के नाम सामने आने से हड़कंप मच गया है। पुलिस कमिश्नरेट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए एक जांच कमेटी का गठन भी किया गया है।


