कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट के एक बड़े और सुनियोजित नेटवर्क की जानकारी सामने आने से पूरे स्वास्थ्य तंत्र में हड़कंप मच गया है। कल्याणपुर और रावतपुर क्षेत्र इस संगठित रैकेट के मुख्य केंद्र बनकर उभरे हैं, जहां पुलिस और क्राइम ब्रांच की संयुक्त कार्रवाई में एक निजी अस्पताल संचालक डॉक्टर दंपति समेत छह लोगों को हिरासत में लेकर गहन पूछताछ की जा रही है। देर रात तक चली छापेमारी से कई अस्पतालों में अफरा-तफरी का माहौल रहा।
10 लाख में खरीद, 60 लाख में सौदा: ऐसे चलता था खेल
सूत्रों के अनुसार, यह रैकेट बेहद शातिर तरीके से संचालित हो रहा था। गिरोह के सदस्य बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड और नेपाल तक से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को निशाना बनाते थे। उन्हें बेहतर जीवन और मोटी रकम का लालच देकर कानपुर बुलाया जाता और फिर उनकी किडनी का सौदा कर लिया जाता। जांच में सामने आया है कि डोनर से महज 10 लाख रुपये में किडनी “खरीदी” जाती थी, जबकि जरूरतमंद मरीजों से 60 लाख रुपये तक वसूले जाते थे। इस पूरे खेल में बिचौलियों की भूमिका सबसे अहम थी, जो डोनर और मरीज के बीच सौदेबाजी कराते थे।
ऑपरेशन के बाद अलग-अलग अस्पतालों में शिफ्टिंग का खेल
जांच में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें उत्तराखंड के एक युवक को झांसा देकर कानपुर लाया गया। उसका रावतपुर स्थित एक निजी अस्पताल में अवैध ट्रांसप्लांट कराया गया। ऑपरेशन के बाद साजिश के तहत डोनर और महिला मरीज को अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया, ताकि किसी को शक न हो। बाद में डोनर को कल्याणपुर के दूसरे अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया। इस पूरी प्रक्रिया को बेहद गोपनीय तरीके से अंजाम दिया जाता था।
लेनदेन विवाद से टूटा सिंडिकेट, अंदरूनी सूचना से खुली परतें
इस संगठित नेटवर्क का पर्दाफाश भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। सूत्रों का दावा है कि लेनदेन को लेकर गिरोह के भीतर ही विवाद पैदा हो गया था। पैसों के बंटवारे को लेकर बढ़ी खींचतान ने लंबे समय से चल रहे इस सिंडिकेट में दरार डाल दी। इसी अंदरूनी विवाद के चलते मामले की जानकारी सिंडिकेट के किसी एक सदस्य ने पुलिस तक पहुंचा दी। जिसके बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हुईं और छापेमारी का सिलसिला शुरू हुआ।
कई अस्पतालों पर छापेमारी, जांच में जुटी पुलिस
सोमवार देर रात पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने संदिग्ध अस्पतालों पर एक साथ दबिश दी। एक अस्पताल से कर्मचारी को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिसके बाद दूसरे अस्पताल में भी कार्रवाई की गई। यहां मरीजों के परिजनों और स्टाफ से पूछताछ में कई अहम सुराग हाथ लगे। पुलिस ने अस्पतालों के रजिस्टर, मरीजों के रिकॉर्ड और ट्रांसप्लांट से जुड़े दस्तावेजों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस प्रारंभिक जांच में डॉक्टर दंपति की भूमिका संदिग्ध पाई गई है।जिसमें बाद पुलिस ने दंपति को हिरासत में ले गुप्त स्थान पर रखकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस को आशंका है कि यह नेटवर्क केवल कानपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरराज्यीय स्तर पर फैला हुआ है।
क्या बोले अधिकारी
वही पूरे मामले को लेकर एसीपी,डीसीपी पश्चिम सहित कई पुलिस अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया। लेकिन सभी अधिकारियों ने पूछताछ के बाद अधिकृत जानकारी देने की बात कही है। हालांकि, अधिकारियों ने अवैध किडनी ट्रांसप्लांट सिंडिकेट की बात को स्वीकार करते हुए जांच की बात कही है।


