कानपुर को लंबे समय से औद्योगिक नगरी के रूप में जाना जाता है। यहां छोटे, मझोले और बड़े स्तर पर उत्पादन होता है। शहर में करीब 3,500 बड़ी फैक्ट्रियां हैं, जिनसे हर साल हजारों करोड़ रुपये का कारोबार होता है और सरकार को करोड़ों रुपये का राजस्व मिलता है। ऐसे में आम बजट का सीधा असर यहां के उद्योग जगत पर पड़ता है। सरकार के आम बजट 2026 के बाद कानपुर के उद्योग से जुड़े लोग संतुष्ट नजर नहीं आ रहे हैं। उद्योगपतियों का कहना है कि बजट में नए उद्योगों की बात तो की गई, लेकिन पुराने और स्थापित उद्योगों की समस्याओं को नजरअंदाज कर दिया गया। इसी मुद्दे पर दैनिक भास्कर ने दादानगर इंडस्ट्रियल एस्टेट के चेयरमैन और अन्य उद्योगपतियों से बातचीत की। पुराने उद्योगों को भी चाहिए ‘ऑक्सीजन’ : विजय कपूर
दादानगर इंडस्ट्रियल एस्टेट के चेयरमैन विजय कपूर ने कहा कि सरकार द्वारा औद्योगीकरण, नए औद्योगिक क्षेत्रों के विकास और निर्यात को बढ़ावा देने की घोषणा स्वागत योग्य है। लेकिन इसके साथ ही पुराने उद्योगों को भी “ऑक्सीजन” देने की जरूरत है। सरकार का फोकस लगातार नए उद्योगों पर बढ़ रहा है, जबकि दशकों से चले आ रहे उद्योग धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं। टैक्स हॉलिडे की मांग
विजय कपूर ने कहा कि जिन उद्योगों ने 40–50 वर्षों तक देश और सरकार को राजस्व दिया है, उनके लिए टैक्स हॉलिडे जैसी राहत दी जानी चाहिए। कम से कम 3 से 4 साल तक टैक्स में छूट मिले, ताकि पुराने उद्योग अपनी स्थिति संभाल सकें और बंद होने से बचें। एमएसएमई के लिए बजट नाकाफी
उन्होंने कहा कि बजट में एमएसएमई सेक्टर के लिए 10 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान ऊंट के मुंह में जीरा साबित होता है। देश की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई की हिस्सेदारी करीब 40 प्रतिशत है, ऐसे में इस सेक्टर को कम से कम एक लाख करोड़ रुपये का बजट मिलना चाहिए। डिफेंस सेक्टर के उद्योग भी निराश
रक्षा उत्पाद निर्माण से जुड़े उद्योगपति श्याम बिजलानी ने बताया कि वे भारतीय सेना के लिए रक्षा सामग्री बनाते हैं और एमएसएमई यूनिट संचालित करते हैं। उन्हें इस बजट से काफी उम्मीदें थीं, लेकिन निराशा हाथ लगी। उनका कहना है कि किसी भी देश की अर्थव्यवस्था तभी मजबूत होती है, जब उसके छोटे और मझोले उद्योग मजबूत हों। चीन इसका बड़ा उदाहरण है। कानपुर डिफेंस एमएसएमई हब, फिर भी अनदेखी
श्याम बिजलानी ने कहा कि कानपुर डिफेंस सेक्टर के एमएसएमई उत्पादों का बड़ा केंद्र है। यहां बटन से लेकर धागे तक का निर्माण होता है, लेकिन बजट में इन छोटे उद्योगों के लिए कोई ठोस योजना नहीं दिखी। डिफेंस कॉरिडोर को लेकर जो सपने दिखाए गए थे, वे इस बजट में अधूरे नजर आते हैं। प्रिंटिंग उद्योग पर बढ़ा टैक्स का बोझ
प्रिंटिंग उद्योग से जुड़े बंबी कपूर ने कहा कि बजट में प्रिंटिंग इंडस्ट्री को कोई खास राहत नहीं मिली। उल्टा कागज पर लगने वाला टैक्स 6 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया है, जिससे उद्योग पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। कानपुर के लिए अलग बजट की जरूरत
बंबी कपूर का कहना है कि एमएसएमई के लिए जो राशि पूरे देश के लिए रखी गई है, उतनी तो अकेले कानपुर शहर के उद्योगों के लिए होनी चाहिए थी। बजट में शहर जैसे पुराने औद्योगिक केंद्रों की उपेक्षा से उद्योगों में निराशा का माहौल है।


