हाल ही में एक अमेरिकी अधिकारी ने बयान दिया कि अमेरिका ने भारत को रूस से तेल खरीदने की इजाजत दी है। इस बात पर भारत में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। एक्टर और नेता कमल हासन ने सोशल मीडिया पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भारत एक आजाद देश है और हम किसी दूसरे देश के आदेश पर नहीं चलते। उन्होंने साफ किया कि सॉवरेन देशों के बीच बराबरी का सम्मान ही शांति का रास्ता है।
To
The President of the United States of America @POTUSDear Mr. President,
We, the people of India, belong to a free and sovereign nation. We no longer take orders from distant foreign shores.
Please mind your own business to the best of your abilities.
Mutual respect…
— Kamal Haasan (@ikamalhaasan) March 7, 2026
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रूसी तेल की अमेरिका की राजनीति
अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने एक इंटरव्यू में कहा कि दुनिया में तेल की कमी को देखते हुए उन्होंने भारत को रूसी तेल खरीदने की छूट दी है। वहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने भी तेल की सप्लाई को लेकर भरोसा जताया कि उनके पास काफी संसाधन हैं और स्थिति जल्द ही ठीक हो जाएगी। हालांकि, अमेरिकी पक्ष की इस परमिशन वाली भाषा को भारतीय हलकों में पसंद नहीं किया जा रहा है।
भारत का स्टैंड
भारत सरकार ने स्पष्ट किया है कि हमारी एनर्जी सप्लाई पूरी तरह सुरक्षित है। अधिकारियों का कहना है कि भारत ने अपने तेल के स्रोतों को बढ़ाकर 40 देशों तक फैला दिया है ताकि किसी एक रूट पर निर्भर न रहना पड़े। भारत हमेशा वहीं से तेल खरीदता है जहां से उसे सबसे सस्ता और सही पड़ता है, और इसके लिए उसे किसी की अनुमति की जरूरत नहीं है।
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विपक्ष का मोदी सरकार पर वार
इस मुद्दे पर देश की राजनीति भी गरमा गई है। विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति हमारे इतिहास और मूल्यों पर आधारित होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा स्थिति समझौते वाली नीति का नतीजा है, जो देश के स्वाभिमान के लिए ठीक नहीं है।


