पूर्णिया में ज्योतिर्लिंग दर्शन मेले का समापन:अंतिम दिन आस्था के महासंगम में उमड़े हजारों श्रद्धालु, तनावमुक्त जीवन जीने का संदेश

पूर्णिया में ज्योतिर्लिंग दर्शन मेले का समापन:अंतिम दिन आस्था के महासंगम में उमड़े हजारों श्रद्धालु, तनावमुक्त जीवन जीने का संदेश

पूर्णिया में आस्था और आध्यात्म का अद्भुत संगम बने द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन मेले का सफल समापन हो गया। टैक्सी स्टैंड स्थित राजस्थान सेवा समिति भवन परिसर में आयोजित इस भव्य आध्यात्मिक मेले ने 7 दिनों तक श्रद्धालुओं को भक्ति और शांति का अनूठा अनुभव कराया। मेले के अंतिम दिन भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए पहुंचे। सुबह से ही शहर और आसपास के इलाकों से लोगों की भीड़ उमड़ती रही। श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्वक कतार में लगकर दर्शन किए और पूरे वातावरण में भक्ति का माहौल बना रहा।मेला 15 से शुरू हुआ, जो देर शाम आस्था के अद्भुत समागम के साथ संपन्न हो गया। तनावमुक्त जीवन जीने का मार्ग बताया प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, जिला शाखा के तत्वावधान में बीके मुकुट मणि के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शनी में 12 ज्योतिर्लिंगों की भव्य झांकियां आकर्षण का केंद्र रही। सोमनाथ, महाकालेश्वर, केदारनाथ, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम, घृष्णेश्वर, मल्लिकार्जुन और ओंकारेश्वर के दर्शन एक ही स्थान पर कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। मेले का विशेष आकर्षण रहा राजयोग मेडिटेशन, जिसमें ब्रह्माकुमारी बहनों ने लोगों को तनावमुक्त जीवन जीने का सरल मार्ग बताया। राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अनिता दीदी ने कहा कि आज के दौर में मानसिक शांति के लिए आत्म-चिंतन और परमात्मा से जुड़ाव बेहद जरूरी है। उन्होंने सकारात्मक सोच और आत्मा की शक्ति को पहचानने पर जोर दिया। श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण बीके मुकुट मणि दीदी ने ज्योतिर्लिंगों के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आयोजन केवल दर्शन तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक माध्यम है। मेले के दौरान श्रद्धालुओं के बीच ईश्वरीय सौगात और प्रसाद का भी वितरण किया गया। सात दिनों तक चले इस मेले ने पूर्णिया के लोगों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालुओं का कहना है कि ऐसे आयोजन न सिर्फ आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि मन को शांति और नई सकारात्मक दिशा भी देते हैं। पूर्णिया में आस्था और आध्यात्म का अद्भुत संगम बने द्वादश ज्योतिर्लिंग दर्शन मेले का सफल समापन हो गया। टैक्सी स्टैंड स्थित राजस्थान सेवा समिति भवन परिसर में आयोजित इस भव्य आध्यात्मिक मेले ने 7 दिनों तक श्रद्धालुओं को भक्ति और शांति का अनूठा अनुभव कराया। मेले के अंतिम दिन भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए पहुंचे। सुबह से ही शहर और आसपास के इलाकों से लोगों की भीड़ उमड़ती रही। श्रद्धालुओं ने शांतिपूर्वक कतार में लगकर दर्शन किए और पूरे वातावरण में भक्ति का माहौल बना रहा।मेला 15 से शुरू हुआ, जो देर शाम आस्था के अद्भुत समागम के साथ संपन्न हो गया। तनावमुक्त जीवन जीने का मार्ग बताया प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय, जिला शाखा के तत्वावधान में बीके मुकुट मणि के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शनी में 12 ज्योतिर्लिंगों की भव्य झांकियां आकर्षण का केंद्र रही। सोमनाथ, महाकालेश्वर, केदारनाथ, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम, घृष्णेश्वर, मल्लिकार्जुन और ओंकारेश्वर के दर्शन एक ही स्थान पर कर श्रद्धालु भाव-विभोर हो गए। मेले का विशेष आकर्षण रहा राजयोग मेडिटेशन, जिसमें ब्रह्माकुमारी बहनों ने लोगों को तनावमुक्त जीवन जीने का सरल मार्ग बताया। राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी अनिता दीदी ने कहा कि आज के दौर में मानसिक शांति के लिए आत्म-चिंतन और परमात्मा से जुड़ाव बेहद जरूरी है। उन्होंने सकारात्मक सोच और आत्मा की शक्ति को पहचानने पर जोर दिया। श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण बीके मुकुट मणि दीदी ने ज्योतिर्लिंगों के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आयोजन केवल दर्शन तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक माध्यम है। मेले के दौरान श्रद्धालुओं के बीच ईश्वरीय सौगात और प्रसाद का भी वितरण किया गया। सात दिनों तक चले इस मेले ने पूर्णिया के लोगों को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। श्रद्धालुओं का कहना है कि ऐसे आयोजन न सिर्फ आस्था को मजबूत करते हैं, बल्कि मन को शांति और नई सकारात्मक दिशा भी देते हैं।  

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