जोधपुर। फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि को मनाया जाने वाला फुलेरा दूज इस वर्ष 19 फरवरी को श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। यह पर्व होली के आगमन का प्रतीक माना जाता है और भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित इस तिथि का विशेष धार्मिक महत्व है। शास्त्रों में इसे अबूझ मुहूर्त की संज्ञा दी गई है, अर्थात इस दिन किसी भी शुभ कार्य के लिए विशेष मुहूर्त देखने की आवश्यकता नहीं होती। धर्मशास्त्रों में फुलेरा दूज को मंगलकारी माना गया है। इसी कारण विवाह, गृह प्रवेश, संपत्ति क्रय तथा अन्य मांगलिक कार्यों के लिए यह दिन अत्यंत शुभ माना जाता है।
फुलेरा दूज तिथि: कब से कब तक
वैदिक पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 18 फरवरी को दोपहर 4:57 बजे प्रारंभ होगी और 19 फरवरी को दोपहर 3:58 बजे समाप्त होगी। सनातन परंपरा में उदयातिथि का विशेष महत्व होने के कारण 19 फरवरी को ही फुलेरा दूज का पर्व मनाया जाएगा।
श्रीकृष्ण-राधा की आराधना, मंदिरों में पुष्पों का श्रृंगार
फुलेरा दूज के दिन भगवान श्रीकृष्ण एवं राधारानी की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक आराधना करने से दांपत्य जीवन सुखमय और सौहार्दपूर्ण बनता है। जोधपुर के विभिन्न कृष्ण मंदिरों में ठाकुरजी का ऋतु-पुष्पों से विशेष श्रृंगार किया जाएगा। गुलाल, अबीर और पुष्पों से सुसज्जित मंदिरों में भजन-कीर्तन की मधुर ध्वनि वातावरण को भक्तिमय बना देगी। श्रद्धालु इस दिन से होली की तैयारियों का शुभारंभ करते हुए गोबर की गुलरियां बनाना भी आरंभ कर देते हैं।
विवाह के लिए वर्ष का सर्वोत्तम दिन
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार फाल्गुन शुक्ल द्वितीया को विवाह बंधन के लिए वर्ष का श्रेष्ठतम दिन माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन संपन्न विवाह को भगवान श्रीकृष्ण का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है, जिससे दांपत्य जीवन में प्रेम और स्थायित्व बना रहता है। सर्दी के मौसम के पश्चात यह शादियों के सीजन का अंतिम प्रमुख सावा भी माना जाता है। जोधपुर सहित समूचे मारवाड़ क्षेत्र में इस दिन विवाह समारोहों की धूम रहेगी और शहनाइयों की गूंज से वातावरण मंगलमय हो उठेगा।


