JJM Scam Rajasthan: जयपुर विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान शुक्रवार को जल जीवन मिशन (जेजेएम) में भ्रष्टाचार का मामला फिर गूंजा। जन स्वास्थ अभियांत्रिकी मंत्री कन्हैयालाल चौधरी ने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल के दौरान जेजेएम कार्यों में लापरवाही और भ्रष्टाचार हुआ जांच में दोषी पाए गए, 200 से अधिक अधिकारियों को 16 सीसी के तहम चार्जशीट दी गई है।
एसीबी में भी मामले दर्ज कराए गए हैं। पूर्व और एसीएस स्तर तक कार्रवाई की गई है। हालाकि, मंत्री ने नाम नहीं बोले तो सदन में कुछ देर शोर शराबा भी हुआ। विधानसभा अध्यक्ष बोले नाम नहीं लिए जाते, पद बता दिए।
दो फर्मों को किया ब्लैकलिस्ट
विधायक राजेन्द्र के प्रश्न पर मंत्री ने बताया कि महवा क्षेत्र के गांवों में चरणबद्ध तरीके से ट्यूबवेल, हैडपम और ग्रीष्मकाल में टैंकरों से पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंन बताया कि फर्जी प्रमाण पत्र के आधा पर काम लेने वाली गणपति ट्यूब वैल और श्याम ट्यूबवैल कंपनियों की ब्लैकलिस्ट कर दिया गया है। अभी प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन है महवा के 81 गांवों की 22 पेयजल योजनाएं भी विगत सरकार के समन इन प्रकरणों के कारण प्रभावित हुई है।
विधानसभा सदस्य कमेटी से जांच की मांग
भाजपा विधायक कालीचरण सराफ ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से मिशन में हुए करोड़ों के घोटाले की जांच विभाग के बजाय विधानसभा सदस्यों की समिति से कराने की मांग की। उन्होंने यह भी आपत्ति जताई कि जिन अधिकारियों पर आरोप लगाया गया है। एसीबी जांच के दौरान उन्हें फील्ड पोस्टिंग देना निष्पक्षता पर सवाल खड़े करता है।
सराफ ने सूरजपुरा फिल्टर प्लान्ट क्षमता का मामले पर भी सवाल किए। इस पर मंत्री ने कहा कि प्लांट अभी क्षमतानुसार काम नहीं कर रहा है। उसकी जांच कराई जा रही है। कमी मिलने पर ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई होगी।
जलदाय मंत्री कन्हैयालाल ने कहा कि सरकार मामले को गंभीरता से ले रही है। प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा रही है और कुछ मामलों में भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत केस दर्ज हैं।
जलदाय मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में कोई अधिकारी दोषी पाया जाता है तो उसे फील्ड पोस्टिंग से हटाकर
कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
एसीबी जांच के दौरान फील्ड पोस्टिंग निष्पक्षता पर सवाल
- अब तक 206 कार्मिक चिन्हित…
- 68 को सीसीए नियम 16 के तहत आरोप पत्र जारी
- 07 को आरोप पत्र जारी करने की प्रक्रिया
- 47 आरोप पत्र, टिप्पणी शासन सचिव को भेजी गई
- 16 में विभागीय स्तर पर आरोप पर परीक्षणाधीन ?
- 17 कार्मिकों में मुख्य अभियन्ता से आरोप पत्र प्राप्त नहीं
- 40 में आपत्तियों के कारण लौटाए गए आरोप पत्र


