झारखंड बनेगा रक्षा उत्पादन का नया हब:देवघर में बनेगी ब्रह्मोस मिसाइल, मनोहरपुर के 300 एकड़ जमीन में लगेगी यूनिट

झारखंड बनेगा रक्षा उत्पादन का नया हब:देवघर में बनेगी ब्रह्मोस मिसाइल, मनोहरपुर के 300 एकड़ जमीन में लगेगी यूनिट

बहुत जल्द झारखंड देश भर में रक्षा उत्पादन का केंद्र बनने जा रहा है। इसके लिए पहल हो चुकी है। सबकुछ ठीक रहा तो बाबा नगरी देवघर में ब्रह्मोस मिसाइल बनेगी। इसके लिए यहां ब्रह्मोस मिसाइल बनाने की यूनिट लगाई जाएगी। इसके लिए मोहनपुर अंचल के तिलौना और सिरसिया गांव के पास करीब 300 एकड़ सरकारी भूमि चिन्हित की जा चुकी है। जमीन चिन्हित करने की प्रक्रिया आठ साल पहले ही पूरी की जा चुकी है। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के लिए गोड्डा के सांसद डॉ. निशिकांत दुबे के आग्रह पर रक्षा मंत्रालय ने सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। इसके लिए सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने 13 जनवरी को रक्षा मंत्री को पत्र लिखा था। भू-रणनीतिक महत्व से बढ़ेगी राष्ट्रीय सुरक्षा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने अपने पत्र में देवघर को भू-रणनीतिक दृष्टि से अहम बताया था। उनका कहना है कि यहां उच्च तकनीक वाली ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण इकाई स्थापित होने से राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के मार्गदर्शन में डीआरडीओ द्वारा देवघर एयरपोर्ट के विकास के लिए लगभग 220 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए गए थे। एयरपोर्ट अब पूरी तरह संचालित है। यह रक्षा उत्पादन व सैन्य जरूरतों के लिहाज से उपयोगी साबित हो सकता है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश में रक्षा उत्पादन में निरंतर वृद्धि हो रही है और यह परियोजना उसी दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद बढ़ी ब्रह्मोस की मांग हाल के ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में ब्रह्मोस मिसाइल की प्रभावी भूमिका के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी मांग में इजाफा हुआ है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नई निर्माण इकाई स्थापित होने से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और निर्यात के अवसर भी मजबूत होंगे। इससे भारत की वैश्विक रक्षा बाजार में स्थिति और सुदृढ़ हो सकती है। देवघर में प्रस्तावित इकाई पूर्वी भारत को रणनीतिक और औद्योगिक मानचित्र पर नई पहचान देगी। एमएसएमई सेक्टर को मिलेगा सीधा लाभ ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट लगने से स्थानीय युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर मिलेंगे। मिसाइल निर्माण के लिए आवश्यक हजारों छोटे-बड़े पुर्जों, इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स, मेटल फेब्रिकेशन और पैकेजिंग सामग्री की आपूर्ति स्थानीय उद्योगों से हो सकेगी। इससे एमएसएमई सेक्टर को नियमित ऑर्डर मिलेंगे। आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान के आसपास ऑटो पार्ट्स, प्रिसीजन इंजीनियरिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़े उद्योगों का क्लस्टर विकसित होगा। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार सृजित होने की संभावना है, जिससे झारखंड की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। बहुत जल्द झारखंड देश भर में रक्षा उत्पादन का केंद्र बनने जा रहा है। इसके लिए पहल हो चुकी है। सबकुछ ठीक रहा तो बाबा नगरी देवघर में ब्रह्मोस मिसाइल बनेगी। इसके लिए यहां ब्रह्मोस मिसाइल बनाने की यूनिट लगाई जाएगी। इसके लिए मोहनपुर अंचल के तिलौना और सिरसिया गांव के पास करीब 300 एकड़ सरकारी भूमि चिन्हित की जा चुकी है। जमीन चिन्हित करने की प्रक्रिया आठ साल पहले ही पूरी की जा चुकी है। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के लिए गोड्डा के सांसद डॉ. निशिकांत दुबे के आग्रह पर रक्षा मंत्रालय ने सैद्धांतिक स्वीकृति दे दी है। इसके लिए सांसद डॉ निशिकांत दुबे ने 13 जनवरी को रक्षा मंत्री को पत्र लिखा था। भू-रणनीतिक महत्व से बढ़ेगी राष्ट्रीय सुरक्षा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने अपने पत्र में देवघर को भू-रणनीतिक दृष्टि से अहम बताया था। उनका कहना है कि यहां उच्च तकनीक वाली ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण इकाई स्थापित होने से राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी। पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के मार्गदर्शन में डीआरडीओ द्वारा देवघर एयरपोर्ट के विकास के लिए लगभग 220 करोड़ रुपए उपलब्ध कराए गए थे। एयरपोर्ट अब पूरी तरह संचालित है। यह रक्षा उत्पादन व सैन्य जरूरतों के लिहाज से उपयोगी साबित हो सकता है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत देश में रक्षा उत्पादन में निरंतर वृद्धि हो रही है और यह परियोजना उसी दिशा में अहम कदम मानी जा रही है। ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद बढ़ी ब्रह्मोस की मांग हाल के ऑपरेशन ‘सिंदूर’ में ब्रह्मोस मिसाइल की प्रभावी भूमिका के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी मांग में इजाफा हुआ है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नई निर्माण इकाई स्थापित होने से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और निर्यात के अवसर भी मजबूत होंगे। इससे भारत की वैश्विक रक्षा बाजार में स्थिति और सुदृढ़ हो सकती है। देवघर में प्रस्तावित इकाई पूर्वी भारत को रणनीतिक और औद्योगिक मानचित्र पर नई पहचान देगी। एमएसएमई सेक्टर को मिलेगा सीधा लाभ ब्रह्मोस मिसाइल यूनिट लगने से स्थानीय युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर मिलेंगे। मिसाइल निर्माण के लिए आवश्यक हजारों छोटे-बड़े पुर्जों, इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स, मेटल फेब्रिकेशन और पैकेजिंग सामग्री की आपूर्ति स्थानीय उद्योगों से हो सकेगी। इससे एमएसएमई सेक्टर को नियमित ऑर्डर मिलेंगे। आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी। बड़े औद्योगिक प्रतिष्ठान के आसपास ऑटो पार्ट्स, प्रिसीजन इंजीनियरिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़े उद्योगों का क्लस्टर विकसित होगा। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार सृजित होने की संभावना है, जिससे झारखंड की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।  

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