राज्य सरकार खनन राजस्व की स्थिति सुधारने के लिए ओडिशा पैटर्न अपनाने पर गंभीरतापूर्वक विचार कर रही है। खनन राजस्व वसूली में हो रही अनियमितताओं पर लगाम कसने के लिए सरकार अपने जिम्स पोर्टल (झारखंड इंटीग्रेटेड माइंस एंड मिनरल्स मैनेजमेंट सिस्टम) में बड़ा बदलाव करने जा रही है। दो दिन पहले जिम्स वर्जन-2 लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह पोर्टल ‘ई-गवर्नेंस’ के तहत खनिजों की पारदर्शी निगरानी और राजस्व वृद्धि का प्रमुख औजार माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि अपग्रेड के बाद जिम्स अधिक आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रदर्शन और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ काम करेगा। इससे सिस्टम की स्थिरता, स्पीड और स्केलेबिलिटी में सुधार होगा। अपग्रेडेड जिम्स पोर्टल राज्य में खनिज संसाधनों के प्रबंधन, नियमन और अवैध खनन पर रोक के लिए विकसित एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा। खनिज उत्पादन से लेकर परिवहन और डिस्पैच तक पूरी प्रक्रिया को डिजिटल तरीके से जोड़ा जाएगा। राजस्व… खनन रॉयल्टी लक्ष्य 15,500 करोड़, वसूली महज 8200 करोड़ हुई पिछले वर्षों की तुलना में झारखंड में खनन राजस्व बढ़ा है, लेकिन तय लक्ष्य के अनुरूप अभी भी वसूली नहीं हो पा रही है। वित्तीय वर्ष 2001-02 में खनन राजस्व 705 करोड़ था। 2024-25 में बढ़कर 11,900 करोड़ पहुंच गया। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में खनन सेस का लक्ष्य 6,400 करोड़ है, जिसमें दिसंबर तक करीब 4,100 करोड़ की ही प्राप्ति हुई है। खनन रॉयल्टी का लक्ष्य 15,500 करोड़ रखा गया है, जबकि उसी अवधि तक करीब 8,200 करोड़ की वसूली हो सकी है। खनिज प्रधान राज्य होने के बावजूद झारखंड खनिज राजस्व वसूली में निचले पायदान पर है। देश के कुल खनिज का करीब 40 फीसदी झारखंड में है, फिर भी राज्य ओडिशा, छत्तीसगढ़ सहित कई अन्य राज्यों से कम राजस्व जुटा पा रहा है। माना जाता है कि यदि खनन गतिविधियों का सही तरीके से मिलान और निगरानी हो, तो खनन राजस्व कई गुना बढ़ सकता है। बदलाव… खनिज परिवहन के लिए ऑनलाइन परमिट, ई-चालान जारी होंगे ओडिशा में खनिज उत्खनन और ढुलाई की व्यवस्था को ‘फुल प्रूफ’ माना जाता है। वहां जांच से जुड़ा पूरा सिस्टम आपस में लिंक्ड है, जिससे अवैध उत्खनन और तस्करी पर काफी हद तक रोक लगी है। इसी पैटर्न पर अब झारखंड में भी खनिज उत्पादन, स्टॉक और डिस्पैच में पारदर्शिता लाने की तैयारी है। सरकार का मानना है कि इससे राजस्व बढ़ेगा और रॉयल्टी व अन्य शुल्कों का सही मूल्यांकन और संग्रह सुनिश्चित हो सकेगा। प्रस्तावित बदलावों के तहत खनिजों के परिवहन के लिए ऑनलाइन परमिट और ई-चालान जारी होंगे। खनिज ढोने वाले वाहनों का पोर्टल पर पंजीकरण होगा। जीपीएस के जरिए वाहन ट्रैकिंग और निगरानी की व्यवस्था रहेगी। रॉयल्टी और अन्य सरकारी बकाया का ऑनलाइन भुगतान संभव होगा। ई-चालान सिस्टम से डिफॉल्टर वाहनों को खनिज परिवहन से रोका जा सकेगा। ओडिशा का राजस्व झारखंड से चार गुना बढ़ा… 2004-05 में ओडिशा का खनन राजस्व 671 करोड़ रुपए था, जबकि झारखंड का खनन राजस्व 935 करोड़ पहुंच गया था। उस समय झारखंड, ओडिशा से करीब 28 प्रतिशत आगे था। 2023-24 में ओडिशा का खनन राजस्व झारखंड से चार गुना से भी अधिक हो गया। सरकार का मानना है कि जिम्स वर्जन-2 के लागू होने से झारखंड भी खनन राजस्व के मामले में अन्य खनिज राज्यों के बराबर पहुंच सकता है। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है राज्य सरकार खनन राजस्व की स्थिति सुधारने के लिए ओडिशा पैटर्न अपनाने पर गंभीरतापूर्वक विचार कर रही है। खनन राजस्व वसूली में हो रही अनियमितताओं पर लगाम कसने के लिए सरकार अपने जिम्स पोर्टल (झारखंड इंटीग्रेटेड माइंस एंड मिनरल्स मैनेजमेंट सिस्टम) में बड़ा बदलाव करने जा रही है। दो दिन पहले जिम्स वर्जन-2 लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह पोर्टल ‘ई-गवर्नेंस’ के तहत खनिजों की पारदर्शी निगरानी और राजस्व वृद्धि का प्रमुख औजार माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि अपग्रेड के बाद जिम्स अधिक आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रदर्शन और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ काम करेगा। इससे सिस्टम की स्थिरता, स्पीड और स्केलेबिलिटी में सुधार होगा। अपग्रेडेड जिम्स पोर्टल राज्य में खनिज संसाधनों के प्रबंधन, नियमन और अवैध खनन पर रोक के लिए विकसित एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा। खनिज उत्पादन से लेकर परिवहन और डिस्पैच तक पूरी प्रक्रिया को डिजिटल तरीके से जोड़ा जाएगा। राजस्व… खनन रॉयल्टी लक्ष्य 15,500 करोड़, वसूली महज 8200 करोड़ हुई पिछले वर्षों की तुलना में झारखंड में खनन राजस्व बढ़ा है, लेकिन तय लक्ष्य के अनुरूप अभी भी वसूली नहीं हो पा रही है। वित्तीय वर्ष 2001-02 में खनन राजस्व 705 करोड़ था। 2024-25 में बढ़कर 11,900 करोड़ पहुंच गया। चालू वित्तीय वर्ष 2025-26 में खनन सेस का लक्ष्य 6,400 करोड़ है, जिसमें दिसंबर तक करीब 4,100 करोड़ की ही प्राप्ति हुई है। खनन रॉयल्टी का लक्ष्य 15,500 करोड़ रखा गया है, जबकि उसी अवधि तक करीब 8,200 करोड़ की वसूली हो सकी है। खनिज प्रधान राज्य होने के बावजूद झारखंड खनिज राजस्व वसूली में निचले पायदान पर है। देश के कुल खनिज का करीब 40 फीसदी झारखंड में है, फिर भी राज्य ओडिशा, छत्तीसगढ़ सहित कई अन्य राज्यों से कम राजस्व जुटा पा रहा है। माना जाता है कि यदि खनन गतिविधियों का सही तरीके से मिलान और निगरानी हो, तो खनन राजस्व कई गुना बढ़ सकता है। बदलाव… खनिज परिवहन के लिए ऑनलाइन परमिट, ई-चालान जारी होंगे ओडिशा में खनिज उत्खनन और ढुलाई की व्यवस्था को ‘फुल प्रूफ’ माना जाता है। वहां जांच से जुड़ा पूरा सिस्टम आपस में लिंक्ड है, जिससे अवैध उत्खनन और तस्करी पर काफी हद तक रोक लगी है। इसी पैटर्न पर अब झारखंड में भी खनिज उत्पादन, स्टॉक और डिस्पैच में पारदर्शिता लाने की तैयारी है। सरकार का मानना है कि इससे राजस्व बढ़ेगा और रॉयल्टी व अन्य शुल्कों का सही मूल्यांकन और संग्रह सुनिश्चित हो सकेगा। प्रस्तावित बदलावों के तहत खनिजों के परिवहन के लिए ऑनलाइन परमिट और ई-चालान जारी होंगे। खनिज ढोने वाले वाहनों का पोर्टल पर पंजीकरण होगा। जीपीएस के जरिए वाहन ट्रैकिंग और निगरानी की व्यवस्था रहेगी। रॉयल्टी और अन्य सरकारी बकाया का ऑनलाइन भुगतान संभव होगा। ई-चालान सिस्टम से डिफॉल्टर वाहनों को खनिज परिवहन से रोका जा सकेगा। ओडिशा का राजस्व झारखंड से चार गुना बढ़ा… 2004-05 में ओडिशा का खनन राजस्व 671 करोड़ रुपए था, जबकि झारखंड का खनन राजस्व 935 करोड़ पहुंच गया था। उस समय झारखंड, ओडिशा से करीब 28 प्रतिशत आगे था। 2023-24 में ओडिशा का खनन राजस्व झारखंड से चार गुना से भी अधिक हो गया। सरकार का मानना है कि जिम्स वर्जन-2 के लागू होने से झारखंड भी खनन राजस्व के मामले में अन्य खनिज राज्यों के बराबर पहुंच सकता है। वह सबकुछ जो आपके लिए जानना जरूरी है


