शेखपुरा में बिहार दिवस के अवसर पर रविवार को समाहरणालय परिसर स्थित परेड मैदान में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न विभागों ने अपनी योजनाओं की प्रदर्शनी लगाई गई। ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत जीविका परियोजना ने भी अपने स्टॉल के माध्यम से स्वयं सहायता समूह की दीदियों द्वारा किए जा रहे कार्यों को प्रदर्शित किया। जिलाधिकारी शेखर आनंद और विधायक रणधीर कुमार सोनी ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और सराहना की। जीविका परियोजना के स्टॉल में कई गतिविधियां प्रदर्शित की गईं। इनमें ‘जीविका दीदी का सिलाई घर’ शामिल था, जिसे ट्राईसेम भवन में स्थानांतरित किया गया है। इसके साथ ही ‘जीविका दीदी हाट’ का मॉडल भी प्रस्तुत किया गया। जिले की कृष्णा देवी द्वारा निर्मित तंजौर कलाकृतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। दक्षिण भारत की इस कलाकृति को जिलाधिकारी और विधायक ने विशेष रूप से देखा और सराहा। अरियरी प्रखंड में कार्यरत कल्याणी जीविका महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड की जीविका दीदियों ने अतिथियों को अपने प्याज व्यवसाय के बारे में जानकारी दी। यह कंपनी ग्रामीण किसानों से प्याज खरीदकर जिले और जिले से बाहर के बाजारों तथा शॉपिंग मार्ट में बेचती है। इसी कंपनी के तहत अरियरी के चांदी गांव में संचालित सुखसागर प्याज प्रसंस्करण इकाई द्वारा प्याज का पाउडर तैयार किया जाता है। इसके अलावा, अदरक, लहसुन और हरी मिर्च के पाउडर तथा विभिन्न मसाले भी यहां बनाए जाते हैं, जिन्हें स्टॉल में प्रदर्शित किया गया। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर और मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से लाभान्वित होकर कई महिलाएं स्वरोजगार कर रही हैं। सुनीता देवी, दीपा देवी और क्रांति देवी ने अपनी श्रृंगार दुकान, फल-सब्जी की दुकान और सिलाई के काम को प्रदर्शित किया। इन्होंने 10 हजार रुपये की शुरुआती राशि से अपना व्यवसाय शुरू किया है और अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। ग्रामीण विकास विभाग की सतत् जीविकोपार्जन योजना से लाभान्वित महिलाओं ने देशी शराब और ताड़ी के व्यवसाय को छोड़कर नए रोजगार अपनाए हैं। ये महिलाएं अब नाश्ता दुकान, श्रृंगार दुकान, चाट और चाउमीन जैसे व्यवसायों से जुड़कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। आज वे समाज में अपनी पहचान बना रही हैं और परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत कर रही हैं। शेखपुरा में बिहार दिवस के अवसर पर रविवार को समाहरणालय परिसर स्थित परेड मैदान में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न विभागों ने अपनी योजनाओं की प्रदर्शनी लगाई गई। ग्रामीण विकास विभाग के अंतर्गत जीविका परियोजना ने भी अपने स्टॉल के माध्यम से स्वयं सहायता समूह की दीदियों द्वारा किए जा रहे कार्यों को प्रदर्शित किया। जिलाधिकारी शेखर आनंद और विधायक रणधीर कुमार सोनी ने प्रदर्शनी का अवलोकन किया और सराहना की। जीविका परियोजना के स्टॉल में कई गतिविधियां प्रदर्शित की गईं। इनमें ‘जीविका दीदी का सिलाई घर’ शामिल था, जिसे ट्राईसेम भवन में स्थानांतरित किया गया है। इसके साथ ही ‘जीविका दीदी हाट’ का मॉडल भी प्रस्तुत किया गया। जिले की कृष्णा देवी द्वारा निर्मित तंजौर कलाकृतियां भी आकर्षण का केंद्र रहीं। दक्षिण भारत की इस कलाकृति को जिलाधिकारी और विधायक ने विशेष रूप से देखा और सराहा। अरियरी प्रखंड में कार्यरत कल्याणी जीविका महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड की जीविका दीदियों ने अतिथियों को अपने प्याज व्यवसाय के बारे में जानकारी दी। यह कंपनी ग्रामीण किसानों से प्याज खरीदकर जिले और जिले से बाहर के बाजारों तथा शॉपिंग मार्ट में बेचती है। इसी कंपनी के तहत अरियरी के चांदी गांव में संचालित सुखसागर प्याज प्रसंस्करण इकाई द्वारा प्याज का पाउडर तैयार किया जाता है। इसके अलावा, अदरक, लहसुन और हरी मिर्च के पाउडर तथा विभिन्न मसाले भी यहां बनाए जाते हैं, जिन्हें स्टॉल में प्रदर्शित किया गया। स्वयं सहायता समूह से जुड़कर और मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना से लाभान्वित होकर कई महिलाएं स्वरोजगार कर रही हैं। सुनीता देवी, दीपा देवी और क्रांति देवी ने अपनी श्रृंगार दुकान, फल-सब्जी की दुकान और सिलाई के काम को प्रदर्शित किया। इन्होंने 10 हजार रुपये की शुरुआती राशि से अपना व्यवसाय शुरू किया है और अच्छी आय अर्जित कर रही हैं। ग्रामीण विकास विभाग की सतत् जीविकोपार्जन योजना से लाभान्वित महिलाओं ने देशी शराब और ताड़ी के व्यवसाय को छोड़कर नए रोजगार अपनाए हैं। ये महिलाएं अब नाश्ता दुकान, श्रृंगार दुकान, चाट और चाउमीन जैसे व्यवसायों से जुड़कर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। आज वे समाज में अपनी पहचान बना रही हैं और परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत कर रही हैं।


