समस्तीपुर के वारिसनगर से जेडीयू विधायक मांजरिक मृणाल ने पानी में मिले यूरेनियम का मुद्दा विधानसभा में उठाया है। सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि एम्स दिल्ली और सहयोगी वैज्ञानिक टीम की ओर से किए गए तीन साल के लंबे अध्ययन में शामिल सभी 40 नमूनों में यूरेनियम की उपस्थिति दर्ज की गई। शोध के अनुसार करीब 70% शिशुओं में स्वास्थ्य जोखिम की संभावना का संकेत मिला है। दूध में यूरेनियम मिलने का मतलब है कि यहां के पानी में भी यूरेनियम है। जिससे मनुष्य के साथ ही पशु और जो अनाज का हम सेवन कर रहे हैं उन सभी में इसी मात्रा उपलब्ध है। ऐसी स्थिति में वारिसनगर के साथ संपूर्ण जिले के पानी का वैज्ञानिक जल परीक्षण जरूरी है। ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इसकी मात्रा की क्या स्थिति है। लोग इससे कैसे बचें। वारिसनगर विधायक ने सोमवार को शून्य काल के दौरान यह मुद्दा उठाया था। जिस पर अभी सरकार का जबाव नहीं आया है। अक्टूबर 2021 से जुलाई 2024 के बीच शोध पिछले दिनों बिहार के छह जिलों जिसमें समस्तीपुर के साथ ही भोजपुर, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार और नालंदा में स्तनपान कराने वाली माताओं के दूध में यूरेनियम (U-238) की मौजूदगी पाई गई थी। शोध के अनुसार करीब 70% शिशुओं में स्वास्थ्य जोखिम की संभावना का संकेत मिला है। अध्ययन अक्टूबर 2021 से जुलाई 2024 के बीच किया गया था। शोध में पाया गया कि कटिहार जिले के एक नमूने में यूरेनियम का स्तर सबसे अधिक था। खगड़िया में औसत स्तर उच्चतम पाया गया। नालंदा, समस्तीपुर में यूरेनियम की मात्रा न्यूनतम दर्ज हुई। दूध के नमूनों में यूरेनियम की मात्रा 0 से 5.25 माइक्रोग्राम प्रति लीटर के बीच रही। वैज्ञानिकों के अनुसार सभी नमूनों में U-238 की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि इन जिलों के भूजल में भारी धातु संदूषण की समस्या मौजूद है। पेयजल में WHO का मानक 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार पीने के पानी में यूरेनियम की अधिकतम सुरक्षित सीमा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर है, जबकि जर्मनी में यह सीमा 10 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तय है। भारत के 18 राज्यों के 151 जिलों में किए गए एक बड़े अध्ययन में पाया गया कि बिहार में लगभग 1.7% भूजल स्रोत यूरेनियम से प्रभावित हैं। विधायक के बारे में जानिए समस्तीपुर जिले के वारिसनगर प्रखंड के कटघरा गांव में जन्मे मांजरिक मृणाल के पिता अशोक कुमार 2005 से 2025 तक विधायक रहे। हमेशा से शिक्षा को प्राथमिकता दी। परिणाम यह हुआ कि गांव का एक लड़का टेक्सास यूनिवर्सिटी जैसा प्रतिष्ठित संस्थान तक पहुंच गया। 2021 में उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की उच्च शिक्षा पूरी की। कुछ समय बाद भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) जैसे संस्थान में शोध कार्य शुरू किया। गांव की मिट्टी से लेकर दुनिया की उन्नत प्रयोगशालाओं तक का सफर तय किया। वह भारतीय विज्ञान संस्थान की नौकरी छोड़कर वापस घर लौटने के बाद गत विधानसभा चुनाव को जीत दर्ज की। समस्तीपुर के वारिसनगर से जेडीयू विधायक मांजरिक मृणाल ने पानी में मिले यूरेनियम का मुद्दा विधानसभा में उठाया है। सदन में अपनी बात रखते हुए कहा कि एम्स दिल्ली और सहयोगी वैज्ञानिक टीम की ओर से किए गए तीन साल के लंबे अध्ययन में शामिल सभी 40 नमूनों में यूरेनियम की उपस्थिति दर्ज की गई। शोध के अनुसार करीब 70% शिशुओं में स्वास्थ्य जोखिम की संभावना का संकेत मिला है। दूध में यूरेनियम मिलने का मतलब है कि यहां के पानी में भी यूरेनियम है। जिससे मनुष्य के साथ ही पशु और जो अनाज का हम सेवन कर रहे हैं उन सभी में इसी मात्रा उपलब्ध है। ऐसी स्थिति में वारिसनगर के साथ संपूर्ण जिले के पानी का वैज्ञानिक जल परीक्षण जरूरी है। ताकि यह स्पष्ट हो सके कि इसकी मात्रा की क्या स्थिति है। लोग इससे कैसे बचें। वारिसनगर विधायक ने सोमवार को शून्य काल के दौरान यह मुद्दा उठाया था। जिस पर अभी सरकार का जबाव नहीं आया है। अक्टूबर 2021 से जुलाई 2024 के बीच शोध पिछले दिनों बिहार के छह जिलों जिसमें समस्तीपुर के साथ ही भोजपुर, बेगूसराय, खगड़िया, कटिहार और नालंदा में स्तनपान कराने वाली माताओं के दूध में यूरेनियम (U-238) की मौजूदगी पाई गई थी। शोध के अनुसार करीब 70% शिशुओं में स्वास्थ्य जोखिम की संभावना का संकेत मिला है। अध्ययन अक्टूबर 2021 से जुलाई 2024 के बीच किया गया था। शोध में पाया गया कि कटिहार जिले के एक नमूने में यूरेनियम का स्तर सबसे अधिक था। खगड़िया में औसत स्तर उच्चतम पाया गया। नालंदा, समस्तीपुर में यूरेनियम की मात्रा न्यूनतम दर्ज हुई। दूध के नमूनों में यूरेनियम की मात्रा 0 से 5.25 माइक्रोग्राम प्रति लीटर के बीच रही। वैज्ञानिकों के अनुसार सभी नमूनों में U-238 की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि इन जिलों के भूजल में भारी धातु संदूषण की समस्या मौजूद है। पेयजल में WHO का मानक 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार पीने के पानी में यूरेनियम की अधिकतम सुरक्षित सीमा 30 माइक्रोग्राम प्रति लीटर है, जबकि जर्मनी में यह सीमा 10 माइक्रोग्राम प्रति लीटर तय है। भारत के 18 राज्यों के 151 जिलों में किए गए एक बड़े अध्ययन में पाया गया कि बिहार में लगभग 1.7% भूजल स्रोत यूरेनियम से प्रभावित हैं। विधायक के बारे में जानिए समस्तीपुर जिले के वारिसनगर प्रखंड के कटघरा गांव में जन्मे मांजरिक मृणाल के पिता अशोक कुमार 2005 से 2025 तक विधायक रहे। हमेशा से शिक्षा को प्राथमिकता दी। परिणाम यह हुआ कि गांव का एक लड़का टेक्सास यूनिवर्सिटी जैसा प्रतिष्ठित संस्थान तक पहुंच गया। 2021 में उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की उच्च शिक्षा पूरी की। कुछ समय बाद भारतीय विज्ञान संस्थान (IISc) जैसे संस्थान में शोध कार्य शुरू किया। गांव की मिट्टी से लेकर दुनिया की उन्नत प्रयोगशालाओं तक का सफर तय किया। वह भारतीय विज्ञान संस्थान की नौकरी छोड़कर वापस घर लौटने के बाद गत विधानसभा चुनाव को जीत दर्ज की।


