Javed Akhtar Birthday: 17 जनवरी 1945 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में जन्मे जावेद अख़्तर 17 जनवरी 2026 को अपना 81वां जन्मदिन मनाएंगे। शब्दों के जादूगर कहे जाने वाले जावेद साहब ने अपनी शायरी और लेखनी से हर दौर के दिलों को छुआ है। जब दिल टूटता है, तो खामोशी सबसे ज्यादा बोलती है और ऐसे में कुछ लफ्ज मरहम बनकर जख्मों पर उतर आते हैं। जावेद अख़्तर की ये पंक्तियां दर्द को नकारती नहीं, बल्कि उसे समझती हैं और शायद इसी वजह से आंसू भी मुस्कुराने की हिम्मत कर लेते हैं।
Javed Akhtar Shayari: जावेद अख़्तर के शेर, जो दिल पर मरहम बन जाएं

“इन चराग़ों में तेल ही कम था
क्यूं गिला फिर हमें हवा से रहे”
“हम तो बचपन में भी अकेले थे
सिर्फ़ दिल की गली में खेले थे”
– जावेद अख़्तर

छोड़ कर जिस को गए थे आप कोई और था,
अब मैं कोई और हूँ वापस तो आ कर देखिए !
– जावेद अख़्तर

बहाना ढूँडते रहते हैं कोई रोने का
हमें ये शौक़ है क्या आस्तीं भिगोने का
– जावेद अख़्तर

आज फिर दिल ने एक तमन्ना की,
आज फिर दिल को हमने समझाया….
– जावेद अख़्तर

बंध गई थी दिल में कुछ उम्मीद सी
ख़ैर तुम ने जो किया अच्छा किया
– जावेद अख़्तर

दर्द के फूल भी खिलते हैं बिखर जाते हैं
ज़ख़्म कैसे भी हों कुछ रोज़ में भर जाते हैं
– जावेद अख़्तर

तू तो मत कह हमें बुरा दुनिया
तू ने ढाला है और ढले हैं हम
– जावेद अख़्तर

तुमको देखा तो ये ख़याल आया
ज़िन्दगी धूप तुम घना साया
– जावेद अख़्तर

तुम चले जाओगे तो सोचेंगे
हमने क्या खोया, हमने क्या पाया
– जावेद अख़्तर

तुम ये कहते हो
कि मैं ग़ैर हूँ फिर भी शायद
निकल आए कोई
पहचान ज़रा देख तो लो
– जावेद अख़्तर


