श्रीगंगानगर। जिले में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। 104 जननी एक्सप्रेस एम्बुलेंस सेवा का नए केन्द्रों पर संचालन शुरू किया जा रहा है। यहां सबसे खास बात यह है कि सूरतगढ़ उप जिला चिकित्सालय में करीब आठ साल के लंबे अंतराल के बाद यह सेवा फिर से ऑन रोड होगी, जिससे प्रसूताओं को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
जानकारी के अनुसार, जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत राज्य में 12 सितम्बर 2011 को 104 जननी एक्सप्रेस सेवा शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना था। सूरतगढ़ उप जिला चिकित्सालय में यह सेवा 4 जनवरी 2014 को शुरू हुई थी, लेकिन वर्ष 2018 में तकनीकी खराबी के चलते एम्बुलेंस बंद हो गई थी।
महिलाओं को मिलेगी बड़ी राहत
एम्बुलेंस सेवा बंद होने के बाद प्रसूताओं को अस्पताल तक लाने और घर छोड़ने के लिए 108 एम्बुलेंस या निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता था। जबकि उप जिला चिकित्सालय में हर महीने लगभग 200 से अधिक प्रसव होते हैं, ऐसे में लंबे समय से इस सेवा को पुनः शुरू करने की मांग उठ रही थी। अब इस मांग के पूरा होने से क्षेत्र की महिलाओं को बड़ी सुविधा मिलेगी।
इन केंद्रों से होगा संचालन
नई व्यवस्था के तहत जिले के सात केंद्रों से 104 एम्बुलेंस का संचालन किया जाएगा। बीरमाना पीएचसी की बजाए अब सूरतगढ़ उप जिला चिकित्सालय, सरदारगढ़ पीएचसी से निरवाना सीएचसी, ठुकराना पीएचसी से राजियासर सीएचसी, हिन्दुमलकोट पीएचसी से शिवपुर सीएचसी, नाहरांवाली पीएचसी से अनूपगढ़ उप जिला चिकित्सालय, सुखचैनपुरा पीएचसी से श्रीविजयनगर सीएचसी तथा घड़साना सीएचसी का संचालन घड़साना सीएचसी से ही किया जाएगा।
आरएमआरएस के माध्यम से होगा खर्च
एम्बुलेंस संचालन का खर्च संबंधित चिकित्सालयों द्वारा आरएमआरएस के माध्यम से वहन किया जाएगा। साथ ही, एम्बुलेंस चालकों के मोबाइल नंबर 108 आपातकालीन सेवा के कॉल सेंटर को उपलब्ध कराए जाएंगे, जिससे कॉल आने पर तुरंत चालक को सूचना दी जा सके।
सुरक्षित मातृत्व को मिलेगा बढ़ावा
एम्बुलेंस चालकों की नियुक्ति फिलहाल एनजीओ के माध्यम से तीन माह के लिए या राज्य सरकार के आगामी आदेशों तक की जाएगी। इस पहल से न केवल प्रसूताओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने में सुविधा होगी, बल्कि सुरक्षित मातृत्व को भी बढ़ावा मिलेगा। -डॉ.मनोज अग्रवाल, बीसीएमओ, सूरतगढ़


