जमुई जिले के बरहट प्रखंड के कटौना गांव के किसान योगेंद्र पंडित ने खेती में एक नया प्रयोग किया है। उन्होंने अपने खेत में औषधीय गुणों से भरपूर काला आलू सफलतापूर्वक उगाया है। यह आलू आमतौर पर दक्षिण अफ्रीका और स्कॉटलैंड जैसे देशों में पाया जाता है। इस अनोखी पहल ने न केवल इलाके में चर्चा पैदा की है, बल्कि आसपास के किसानों के लिए नई संभावनाएं भी खोली हैं। काला आलू अपने विशेष औषधीय गुणों के लिए विश्वभर में जाना जाता है। इसमें सामान्य आलू की तुलना में अधिक एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक हैं। इसका उपयोग कई बीमारियों के उपचार में भी किया जाता है। औषधीय महत्व के कारण बाजार में इसकी कीमत सामान्य आलू से काफी अधिक होती है। जहां आम आलू लगभग 20 रुपये प्रति किलो बिकता है, वहीं काला आलू चार गुना तक अधिक कीमत पर बिकने की संभावना है। औषधीय गुणों के कारण यह विशेष लगा
किसान योगेंद्र पंडित ने बताया कि उन्हें काला आलू की खेती की जानकारी यूट्यूब और सोशल मीडिया के माध्यम से मिली। जब उन्हें पता चला कि बिहार या जमुई क्षेत्र में इसकी खेती नहीं हो रही है, तो उन्होंने इसे प्रायोगिक तौर पर अपने खेत में उगाने का निर्णय लिया। शुरुआती जोखिम के बावजूद, उनकी मेहनत और उचित देखभाल से फसल ने उम्मीद से बेहतर परिणाम दिए। पंडित पहले से ही कुफरी नीलकंठ और कुफरी संगम जैसी उन्नत किस्मों के आलू की खेती करते रहे हैं। उन्होंने बताया कि काला आलू उन्हें इसके औषधीय गुणों के कारण विशेष लगा। खेती शुरू करने के बाद उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण भी प्राप्त किया, जिससे उन्हें तकनीकी जानकारी और मार्गदर्शन मिला। फसल से जुड़ी तस्वीरें… बड़े पैमाने पर उगाने की योजना बना रहे
इस वर्ष उन्होंने मात्र एक से दो कट्ठा जमीन में काला आलू की खेती की है, और उपज काफी अच्छी हुई है। अब वे आने वाले समय में इसे बड़े पैमाने पर उगाने की योजना बना रहे हैं। उनके इस प्रयास से प्रेरित होकर आसपास के कई किसान भी इस नई खेती को अपनाने की तैयारी में हैं। यह पहल जमुई ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार में कृषि क्षेत्र के लिए एक नई दिशा साबित हो सकती है। जमुई जिले के बरहट प्रखंड के कटौना गांव के किसान योगेंद्र पंडित ने खेती में एक नया प्रयोग किया है। उन्होंने अपने खेत में औषधीय गुणों से भरपूर काला आलू सफलतापूर्वक उगाया है। यह आलू आमतौर पर दक्षिण अफ्रीका और स्कॉटलैंड जैसे देशों में पाया जाता है। इस अनोखी पहल ने न केवल इलाके में चर्चा पैदा की है, बल्कि आसपास के किसानों के लिए नई संभावनाएं भी खोली हैं। काला आलू अपने विशेष औषधीय गुणों के लिए विश्वभर में जाना जाता है। इसमें सामान्य आलू की तुलना में अधिक एंटीऑक्सीडेंट होते हैं, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक हैं। इसका उपयोग कई बीमारियों के उपचार में भी किया जाता है। औषधीय महत्व के कारण बाजार में इसकी कीमत सामान्य आलू से काफी अधिक होती है। जहां आम आलू लगभग 20 रुपये प्रति किलो बिकता है, वहीं काला आलू चार गुना तक अधिक कीमत पर बिकने की संभावना है। औषधीय गुणों के कारण यह विशेष लगा
किसान योगेंद्र पंडित ने बताया कि उन्हें काला आलू की खेती की जानकारी यूट्यूब और सोशल मीडिया के माध्यम से मिली। जब उन्हें पता चला कि बिहार या जमुई क्षेत्र में इसकी खेती नहीं हो रही है, तो उन्होंने इसे प्रायोगिक तौर पर अपने खेत में उगाने का निर्णय लिया। शुरुआती जोखिम के बावजूद, उनकी मेहनत और उचित देखभाल से फसल ने उम्मीद से बेहतर परिणाम दिए। पंडित पहले से ही कुफरी नीलकंठ और कुफरी संगम जैसी उन्नत किस्मों के आलू की खेती करते रहे हैं। उन्होंने बताया कि काला आलू उन्हें इसके औषधीय गुणों के कारण विशेष लगा। खेती शुरू करने के बाद उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण भी प्राप्त किया, जिससे उन्हें तकनीकी जानकारी और मार्गदर्शन मिला। फसल से जुड़ी तस्वीरें… बड़े पैमाने पर उगाने की योजना बना रहे
इस वर्ष उन्होंने मात्र एक से दो कट्ठा जमीन में काला आलू की खेती की है, और उपज काफी अच्छी हुई है। अब वे आने वाले समय में इसे बड़े पैमाने पर उगाने की योजना बना रहे हैं। उनके इस प्रयास से प्रेरित होकर आसपास के कई किसान भी इस नई खेती को अपनाने की तैयारी में हैं। यह पहल जमुई ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार में कृषि क्षेत्र के लिए एक नई दिशा साबित हो सकती है।


