सीमांचल के लोगों के लिए लंबे समय से लंबित जलालगढ़–किशनगंज ब्रॉड गेज रेल लाइन परियोजना अब नई गति पकड़ रही है। सालों 2008-09 के रेल बजट में घोषित यह परियोजना 17 साल तक फाइलों में दबी रही, लेकिन अब केंद्र सरकार ने इसे पुनर्जीवित करते हुए 2025-26 के बजट में 170.8 करोड़ रुपए का प्रावधान कर दिया है। इससे क्षेत्र के लोगों में नई उम्मीद जगी है। सर्वे तेज, DPR अपडेट होकर रेलवे बोर्ड भेजी गई उत्तर पूर्व सीमांत रेलवे (NFR) के अधीन आने वाली इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) हाल ही में अपडेट होकर रेलवे बोर्ड को भेज दी गई है। सूत्रों के मुताबिक परियोजना डी-फ्रीज हो चुकी है और भूमि सर्वे सहित अन्य प्रक्रियाएं तेजी से चल रही हैं। पहले इस रेल लाइन की अनुमानित लागत 360 करोड़ थी, जो अब बढ़कर 1852.32 करोड़ रुपये हो गई है। 51 किलोमीटर लंबी लाइन, 8 नए स्टेशन प्रस्तावित करीब 51 किलोमीटर लंबी इस नई लाइन पर कुल 8 स्टेशन प्रस्तावित हैं। खाताहाट, रौटा, मझोक, पोड़ा हाल्ट, तस्लीमनगर, मझगांव, कुट्टी हाट और महीनगांव। यह रेल लाइन पूर्णिया जिले के जलालगढ़ से शुरू होकर किशनगंज तक आएगी। इससे कटिहार, पूर्णिया और किशनगंज के कई बाढ़ प्रभावित इलाके मुख्य रेल नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। सीमांचल की कनेक्टिविटी को मिलेगी नई दिशा यह लाइन ‘चिकन नेक’ की रणनीतिक और भू-राजनीतिक स्थिति को मजबूत करेगी। साथ ही यात्रियों और माल परिवहन दोनों में सीमांचल को बड़ी राहत मिलेगी। इसके फायदे 1. कटिहार-किशनगंज का सबसे छोटा रूट नई लाइन बनते ही दोनों शहरों के बीच यात्रा दूरी और समय में बड़ी कमी आएगी। 2. पूर्णिया जिला मुख्यालय का सीधा रेल संपर्क पूर्णिया पहली बार किशनगंज से सीधे रेल मार्ग से जुड़ जाएगा। 3. मुकुरिया-किशनगंज सेक्शन पर दबाव कम होगा अतिव्यस्त रूट को वैकल्पिक लाइन मिलने से कई ट्रेनों को अगले वर्षों में डायवर्ट किया जा सकेगा। 4. एनजेपी-कटिहार जाने वाली ट्रेनों को नया रास्ता कई एक्सप्रेस और मालगाड़ियां पूर्णिया जंक्शन होकर गुजर सकेंगी। 5. बाढ़ प्रभावित इलाकों को बड़ी राहत अमौर, बैसा, जलालगढ़ और किशनगंज प्रखंड में आपदा राहत कार्य आसान होगा। 6. कृषि कारोबार को गति स्थानीय किसानों की सब्जियां, धान, मक्का और अन्य उत्पाद अब कोलकाता, दिल्ली, पटना जैसे बड़े बाजारों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे रोजगार और व्यापार बढ़ेगा। लोकल प्रतिनिधियों और जनता की मांग कम ट्रैफिक प्रोजेक्शन का हवाला देकर इस परियोजना को वर्षों तक ठंडे बस्ते में रखा गया था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सीमांचल के सांसदों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों द्वारा लगातार दबाव बनाए जाने के बाद इसे फिर से मंजूरी की दिशा मिली। बजट में राशि आवंटन के बाद अब उम्मीद है कि रेलवे बोर्ड जल्द ही अंतिम स्वीकृति देकर ग्राउंड पर काम शुरू कराएगा। सीमांचल की जीवनरेखा बनने जा रही यह परियोजना जलालगढ़ से किशनगंज तक के ग्रामीण इलाकों में इस खबर से खुशी की लहर है। लोगों का कहना है कि यह परियोजना न सिर्फ यात्रा सुविधा बढ़ाएगी बल्कि सीमांचल के विकास की रीढ़ साबित होगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि जिस दिन यह लाइन शुरू होगी, उसी दिन से सीमांचल की अर्थव्यवस्था बदलनी शुरू हो जाएगी।” सीमांचल के लोगों के लिए लंबे समय से लंबित जलालगढ़–किशनगंज ब्रॉड गेज रेल लाइन परियोजना अब नई गति पकड़ रही है। सालों 2008-09 के रेल बजट में घोषित यह परियोजना 17 साल तक फाइलों में दबी रही, लेकिन अब केंद्र सरकार ने इसे पुनर्जीवित करते हुए 2025-26 के बजट में 170.8 करोड़ रुपए का प्रावधान कर दिया है। इससे क्षेत्र के लोगों में नई उम्मीद जगी है। सर्वे तेज, DPR अपडेट होकर रेलवे बोर्ड भेजी गई उत्तर पूर्व सीमांत रेलवे (NFR) के अधीन आने वाली इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) हाल ही में अपडेट होकर रेलवे बोर्ड को भेज दी गई है। सूत्रों के मुताबिक परियोजना डी-फ्रीज हो चुकी है और भूमि सर्वे सहित अन्य प्रक्रियाएं तेजी से चल रही हैं। पहले इस रेल लाइन की अनुमानित लागत 360 करोड़ थी, जो अब बढ़कर 1852.32 करोड़ रुपये हो गई है। 51 किलोमीटर लंबी लाइन, 8 नए स्टेशन प्रस्तावित करीब 51 किलोमीटर लंबी इस नई लाइन पर कुल 8 स्टेशन प्रस्तावित हैं। खाताहाट, रौटा, मझोक, पोड़ा हाल्ट, तस्लीमनगर, मझगांव, कुट्टी हाट और महीनगांव। यह रेल लाइन पूर्णिया जिले के जलालगढ़ से शुरू होकर किशनगंज तक आएगी। इससे कटिहार, पूर्णिया और किशनगंज के कई बाढ़ प्रभावित इलाके मुख्य रेल नेटवर्क से जुड़ जाएंगे। सीमांचल की कनेक्टिविटी को मिलेगी नई दिशा यह लाइन ‘चिकन नेक’ की रणनीतिक और भू-राजनीतिक स्थिति को मजबूत करेगी। साथ ही यात्रियों और माल परिवहन दोनों में सीमांचल को बड़ी राहत मिलेगी। इसके फायदे 1. कटिहार-किशनगंज का सबसे छोटा रूट नई लाइन बनते ही दोनों शहरों के बीच यात्रा दूरी और समय में बड़ी कमी आएगी। 2. पूर्णिया जिला मुख्यालय का सीधा रेल संपर्क पूर्णिया पहली बार किशनगंज से सीधे रेल मार्ग से जुड़ जाएगा। 3. मुकुरिया-किशनगंज सेक्शन पर दबाव कम होगा अतिव्यस्त रूट को वैकल्पिक लाइन मिलने से कई ट्रेनों को अगले वर्षों में डायवर्ट किया जा सकेगा। 4. एनजेपी-कटिहार जाने वाली ट्रेनों को नया रास्ता कई एक्सप्रेस और मालगाड़ियां पूर्णिया जंक्शन होकर गुजर सकेंगी। 5. बाढ़ प्रभावित इलाकों को बड़ी राहत अमौर, बैसा, जलालगढ़ और किशनगंज प्रखंड में आपदा राहत कार्य आसान होगा। 6. कृषि कारोबार को गति स्थानीय किसानों की सब्जियां, धान, मक्का और अन्य उत्पाद अब कोलकाता, दिल्ली, पटना जैसे बड़े बाजारों तक आसानी से पहुंच सकेंगे। इससे रोजगार और व्यापार बढ़ेगा। लोकल प्रतिनिधियों और जनता की मांग कम ट्रैफिक प्रोजेक्शन का हवाला देकर इस परियोजना को वर्षों तक ठंडे बस्ते में रखा गया था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में सीमांचल के सांसदों, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों द्वारा लगातार दबाव बनाए जाने के बाद इसे फिर से मंजूरी की दिशा मिली। बजट में राशि आवंटन के बाद अब उम्मीद है कि रेलवे बोर्ड जल्द ही अंतिम स्वीकृति देकर ग्राउंड पर काम शुरू कराएगा। सीमांचल की जीवनरेखा बनने जा रही यह परियोजना जलालगढ़ से किशनगंज तक के ग्रामीण इलाकों में इस खबर से खुशी की लहर है। लोगों का कहना है कि यह परियोजना न सिर्फ यात्रा सुविधा बढ़ाएगी बल्कि सीमांचल के विकास की रीढ़ साबित होगी। स्थानीय लोगों का मानना है कि जिस दिन यह लाइन शुरू होगी, उसी दिन से सीमांचल की अर्थव्यवस्था बदलनी शुरू हो जाएगी।”


