अररिया के कुर्साकांटा प्रखंड स्थित बाबा सुन्दरनाथ धाम में शिव-पार्वती विवाह के बाद सोमवार को जलाभिषेक के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। ‘जल ढ़ड़ी’ के अवसर पर सुबह 4 बजे से ही श्रद्धालु लंबी कतारों में लगकर बाबा महादेव का जलाभिषेक करने पहुंचे। यह जलाभिषेक अगले चार दिनों तक जारी रहेगा। इस धार्मिक अनुष्ठान में पड़ोसी देश नेपाल सहित कोसी-सीमांचल क्षेत्र के आसपास के जिलों से हजारों की संख्या में भक्त शामिल होते हैं। मंदिर परिसर में भक्तों का उत्साह चरम पर देखा गया, जहां ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। धाम श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक मंदिर के पुजारी सिंहेश्वर गिरि के अनुसार, यह धाम श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। मान्यता है कि द्वापर युग में अज्ञातवास के दौरान पांडवों और माता कुंती ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर भीम ने 108 कमल पुष्प लाकर शिव आराधना पूरी की थी। श्रद्धालु शिव गंगा से पवित्र जल लेकर करते हैं शिवलिंग पर अभिषेक मंदिर परिसर में पूर्व दिशा में मां पार्वती का मंदिर, दक्षिण में शिव गंगा और नंदी महाराज का मंदिर स्थापित है। श्रद्धालु शिव गंगा से पवित्र जल लेकर शिवलिंग पर अभिषेक करते हैं। यह धाम विशेष रूप से पूर्णिमा, माघ माह के रविवार, सावन के सोमवार और महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती विवाह के प्रातःकालीन अनुष्ठान के बाद भक्तों की भारी भीड़ को आकर्षित करता है। 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया नेपाल से सटे होने के कारण यह धाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रसिद्ध है। भक्तों का मानना है कि यहां मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, जिससे यह धीरे-धीरे एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित हो रहा है। प्रशासन भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए मुस्तैद रहा। महाशिवरात्रि के पावन मौके पर इस साल लगभग 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया है। अररिया के कुर्साकांटा प्रखंड स्थित बाबा सुन्दरनाथ धाम में शिव-पार्वती विवाह के बाद सोमवार को जलाभिषेक के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। ‘जल ढ़ड़ी’ के अवसर पर सुबह 4 बजे से ही श्रद्धालु लंबी कतारों में लगकर बाबा महादेव का जलाभिषेक करने पहुंचे। यह जलाभिषेक अगले चार दिनों तक जारी रहेगा। इस धार्मिक अनुष्ठान में पड़ोसी देश नेपाल सहित कोसी-सीमांचल क्षेत्र के आसपास के जिलों से हजारों की संख्या में भक्त शामिल होते हैं। मंदिर परिसर में भक्तों का उत्साह चरम पर देखा गया, जहां ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। धाम श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक मंदिर के पुजारी सिंहेश्वर गिरि के अनुसार, यह धाम श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है। मान्यता है कि द्वापर युग में अज्ञातवास के दौरान पांडवों और माता कुंती ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। भगवान श्रीकृष्ण के निर्देश पर भीम ने 108 कमल पुष्प लाकर शिव आराधना पूरी की थी। श्रद्धालु शिव गंगा से पवित्र जल लेकर करते हैं शिवलिंग पर अभिषेक मंदिर परिसर में पूर्व दिशा में मां पार्वती का मंदिर, दक्षिण में शिव गंगा और नंदी महाराज का मंदिर स्थापित है। श्रद्धालु शिव गंगा से पवित्र जल लेकर शिवलिंग पर अभिषेक करते हैं। यह धाम विशेष रूप से पूर्णिमा, माघ माह के रविवार, सावन के सोमवार और महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती विवाह के प्रातःकालीन अनुष्ठान के बाद भक्तों की भारी भीड़ को आकर्षित करता है। 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया नेपाल से सटे होने के कारण यह धाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रसिद्ध है। भक्तों का मानना है कि यहां मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, जिससे यह धीरे-धीरे एक महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल के रूप में भी विकसित हो रहा है। प्रशासन भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा के लिए मुस्तैद रहा। महाशिवरात्रि के पावन मौके पर इस साल लगभग 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया है।


