World Water Day: बाड़मेर: विश्व जल दिवस 22 मार्च को मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य हर व्यक्ति तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने की जरूरत को रेखांकित करना है, लेकिन इसके विपरीत राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर और बालोतरा जैसे जिलों में हालात चिंताजनक हैं। जहां हजारों गांव-ढाणियों के लोग आज भी आर्सेनिक और फ्लोराइड युक्त पानी पीने को मजबूर हैं।
जलजीवन मिशन जैसी योजनाओं के बावजूद शुद्ध पानी का सपना यहां अब भी अधूरा है। देश के 11,488 गांव-बस्तियां आज भी शुद्ध पानी को तरस रहे हैं। बाड़मेर के 5,472 और बालोतरा की 1,015 गांव ढाणी के लोग आर्सेनिक और फ्लोराइड युक्त पानी पी रहे हैं।
केंद्र सरकार ने जेजेएम के तहत इन क्षेत्रों में प्रति व्यक्ति 8 से 10 लीटर प्रतिदिन गुणवत्तापूर्वक पानी पहुंचाने के निर्देश राज्य सरकार को दिए गए हैं। लेकिन अभी तक इसकी भी पालना नहीं हो पाई है।
योजना के तहत देशभर में 2030 तक शुद्ध एवं गुणवत्तायुक्त पानी पहुंचाने का उद्देश्य तय किया गया है। देश में अभी तक 19.36 करोड़ परिवारों में से 15.82 करोड़ परिवारों तक हर घर नल के जरिए पानी पहुंच पाया है।

कमजोर राजनीतिक पैरवी
साल 2019 में जलजीवन मिशन प्रारंभ होने के बाद से ही बाड़मेर-जैसलमेर और बालोतरा अंतिम स्थिति में है। कमजोर राजनीतिक पैरवी के चलते इन जिलों में योजना की प्रगति नहीं हो पाई है।
केंद्र सरकार ने यह दिए थे निर्देश
- पाइपगत जलापूर्ति योजना बनाएं
- आर्सेनिक और फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक जलशोधन यंत्र (सीडब्ल्यूपीपी) स्थापित करें
- प्रति व्यक्ति प्रतिदिन पाइप लाइन से 8 से 10 लीटर पानी उपलब्ध करवाएं
नहीं मिला नहरी जल
जलजीवन मिशन को लेकर बाड़मेर, जैसलमेर और बालोतरा जिला अभी फिसड्डी स्थिति में है। यहां दूर गांव ढाणियों में पानी नहीं पहुंचा है। दूरस्थ इलाका और नहरी जल की उपलब्धता नहीं होने से मिशन के तहत हर घर नल का सपना अभी भी अधूरा है।
इसलिए हैं ऐसे हालात
बाड़मेर, जैसलमेर और बालोतरा जिले में शुद्ध पानी को लेकर नहरी परियोजनाएं तो बनी हैं, लेकिन पानी घरों तक नहीं पहुंचा। धीमी गति से चल रहे कार्य के चलते यह दिक्कत आ रही है। वहीं, पाताल का पानी भी नीचे जा पहुंचा है। इस कारण यहां लोगों को खारा पानी या अशुद्ध पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है।
रेगिस्तान में ‘जल जीवन मिशन’ हांफता, 5 साल में सिर्फ 21% प्रगति
रेगिस्तानी बाड़मेर में बहुप्रतीक्षित जल जीवन मिशन अब धीमी रफ्तार के कारण दम तोड़ता नजर आ रहा है। पांच वर्षों से चल रही इस महत्वाकांक्षी योजना की जमीनी हकीकत यह है कि अब तक कुल लक्ष्य का महज 21.27 फीसदी ही कार्य पूरा हो सका है। ऐसे में ग्रीष्म ऋतु की दस्तक के साथ ही हजारों ग्रामीण परिवारों के सामने पेयजल संकट की आशंका गहरा गई है।
योजना के तहत हर घर नल से जल पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन 2,66,333 परिवारों में से अब तक केवल 58,214 घरों तक ही कनेक्शन पहुंच पाए हैं, जो करीब 21.30 प्रतिशत है। अगस्त 2019 तक यह आंकड़ा मात्र 2.35 फीसदी था, जिससे साफ है कि प्रगति अपेक्षित गति से बहुत पीछे चल रही है।

एक नजर में प्रोजेक्ट की स्थिति
- लघु योजनाएं: 82.72 करोड़, 64 गांव – वित्तीय प्रगति 44.97 करोड़, जल कनेक्शन 91.26%
- बाड़मेर लिफ्ट परियोजना पार्ट A: 212.83 करोड़, 99 गांव – वित्तीय 144.21 करोड़, जल प्रगति 37.10%
- पार्ट B: 155.17 करोड़, 84 गांव – वित्तीय 86.30 करोड़, जल प्रगति 44.50%
- पार्ट C: 440 करोड़, 346 गांव – वर्क ऑर्डर जारी
- पोकरण-फलसूंड-बालोरा-सिवाना (पार्ट 4): 239.43 करोड़, 10 गांव – 100% प्रगति
- नर्मदा नहर आधारित रामसर-गडरारोड़: 167.25 करोड़, 217 गांव – 99.48% प्रगति
- नर्मदा आधारित गुड़ामालानी-चौहटन: 3197.34 करोड़, 822 गांव – टेंडर प्रक्रिया में
- कुल: 4494.76 करोड़, 1642 गांव – 389.82 करोड़ व्यय, 21.27% प्रगति
जमीनी हकीकत: पाइपलाइन बिछी, पानी नहीं
ग्रामीणों का आरोप है कि कई गांवों में पाइपलाइन डालने का काम अधूरा पड़ा है, वहीं जहां कनेक्शन दिए गए हैं, वहां भी नियमित पानी सप्लाई नहीं हो रही। महीनों से अधूरे पड़े कार्यों ने लोगों की उम्मीदों को तोड़ दिया है। महिलाओं और बच्चों को आज भी दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है, जिससे उनका दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा है।
‘शिव’ क्षेत्र में भी अटका काम
जून 2025 में जल जीवन मिशन फेस-3 के तहत 338 करोड़ रुपए की योजना स्वीकृत हुई थी। इसमें शिव के 187, बाड़मेर ग्रामीण के 156 और बायतु के 3 गांवों सहित कुल 346 गांवों को शामिल किया गया। इस कार्य के लिए जोधपुर की दारा कंस्ट्रक्शन कंपनी को वर्क ऑर्डर जारी हुआ, लेकिन जमीनी प्रगति अभी भी संतोषजनक नहीं है।

गर्मी शुरू, संकट गहराया
मार्च के पहले सप्ताह से ही तेज गर्मी ने असर दिखाना शुरू कर दिया है। तालाब सूखने की कगार पर हैं और कई गांवों व ढाणियों में पेयजल संकट गहराने लगा है। ग्रामीणों को मजबूरी में महंगे दामों पर पानी खरीदना पड़ रहा है। पशुपालकों के सामने भी पशुधन के लिए पानी की व्यवस्था करना चुनौती बन गया है।
बढ़ती नाराजगी, अधूरा सपना
जल जीवन मिशन से ग्रामीणों को बड़ी उम्मीद थी, लेकिन धीमी प्रगति और अधूरे कार्यों ने लोगों में नाराजगी बढ़ा दी है। हालात यह हैं कि हर घर नल से जल का सपना अब भी अधूरा है, और इस बार भी गर्मी में बाड़मेर के हजारों परिवारों को पानी के लिए जूझना पड़ सकता है।
एक नजर बॉर्डर के गांव
- हरसाणी कस्बा: आगासड़ी गांव से आने वाली पाइपलाइन एक महीने से बंद, जेजेएम योजना भी सुचारू नहीं होने से गर्मी में आमजन व पशु दोनों परेशान।
- गिराब क्षेत्र: जलकुंड सूखे, पर्याप्त जल भंडार के बावजूद सप्लाई ठप और कार्मिकों की कमी से व्यवस्था चरमराई।
- डीएनपी गांव: ग्रामीण आज भी बेरियों पर निर्भर हैं। सप्ताह में एक बार पानी, आधे घरों तक भी पर्याप्त सप्लाई नहीं।
जेजेएम की जमीनी हकीकत
-नोपाट पंचायत की मिसरी की ढाणी में एक साल से पंप हाउस अधूरा
-कई जगह वॉल्व नहीं, तो कहीं बिजली कनेक्शन का अभाव
-एक कर्मचारी के भरोसे कई गांवों की जल सप्लाई
-पाइपलाइन पर खर्च, लेकिन नियमित जल वितरण पर ध्यान नहीं


