राजस्थान हाईकोर्ट में बहुचर्चित काला हिरण शिकार मामले में सोमवार को नया मोड़ आ गया। जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू ने इस मामले की सुनवाई करने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने फाइल को किसी अन्य बेंच के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। अब इस मामले की अगली सुनवाई दूसरी बेंच करेगी। दरअसल, साल 1998 के इस मामले में फिल्म अभिनेता सलमान खान की सजा के खिलाफ अपील और राज्य सरकार की ओर से सह-आरोपियों को बरी करने के खिलाफ दायर ‘लीव टू अपील’ पर संयुक्त सुनवाई होनी थी। तकनीकी प्रक्रियाओं और बेंच बदलने के कारण अब इस मामले की कानूनी प्रक्रिया में नया समय तय होगा। हम साथ-साथ हैं की शूटिंग के दौरान शिकार का मामला मामला सितंबर-अक्टूबर 1998 का है, जब फिल्म ‘हम साथ साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान कांकाणी गांव की सरहद पर दो काले हिरणों का शिकार किया गया था। निचली अदालत ने सलमान खान को दोषी मानते हुए 5 साल के कारावास और 25 हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया था। वहीं, सह-आरोपी सैफ अली खान, नीलम, तब्बू, सोनाली बेंद्रे और दुष्यंत सिंह को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया गया था। राज्य सरकार ने इन कलाकारों को बरी किए जाने के आदेश को राजस्थान हाईकोर्ट में ‘लीव टू अपील’ के माध्यम से चुनौती दी थी। ट्रांसफर पिटीशन और कोर्ट की कार्यवाही सलमान खान के वकीलों ने पूर्व में एक ट्रांसफर पिटीशन दायर की थी, ताकि उनकी सजा के खिलाफ लंबित अपील को राज्य सरकार की अपील के साथ जोड़कर (संलग्न कर) एक साथ सुना जा सके। पूर्व की सुनवाई में जस्टिस मनोज कुमार गर्ग ने निर्देश दिया था कि तकनीकी कारणों से रुकी इस प्रक्रिया को पूरा कर दोनों प्रकरणों को संयुक्त रूप से लिस्ट किया जाए। — काला हिरण केस से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… ‘काला हिरण’ मामले में सुनवाई, अगली तारीख 8 सप्ताह बाद:सलमान ने सजा के फैसले को, तो सरकार ने पांच अन्य को बरी करने को दी थी चुनौती राजस्थान हाईकोर्ट में आज जस्टिस संदीप शाह की कोर्ट में वर्ष 1998 के काला हिरण शिकार मामले की सुनवाई हुई। इसमें राज्य सरकार की ओर से दायर लीव टू अपील और सलमान खान की ओर से सजा के फैसले को चुनौती देने की याचिका शामिल है। इन दोनों पर एक साथ विचार हुआ। (पढ़ें पूरी खबर)
सलमान के केस की सुनवाई से हटे जज:हिरण शिकार मामले में होनी थी सुनवाई, सहआरोपियों के खिलाफ ‘लीव टू अपील’ पर नई बेंच करेगी फैसला


