Jaisalmer Holi 2026: राजस्थान की स्वर्णनगरी जैसलमेर की होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि इतिहास को जीवंत करने का माध्यम है। धुलंडी के दिन दुनिया के एकमात्र ‘लिविंग फोर्ट’ सोनार दुर्ग में एक ऐसा दरबार सजता है, जिसे देखकर विदेशी पर्यटक भी दांतों तले उंगली दबा लेते हैं। आइए जानते हैं 400 साल पुरानी उस परंपरा के बारे में, जिसने एक ब्राह्मण की जान बचाई थी।
जैसलमेर के ऐतिहासिक सोनार दुर्ग के व्यासा पाड़ा में धुलंडी के दिन नजारा बिल्कुल शाही होता है। यहां पुष्करणा ब्राह्मण समाज की व्यास जाति के एक विवाहित पुरुष को ‘बादशाह’ और दो मासूम बालकों को ‘शहजादा’ बनाया जाता है। जब भारी भरकम मखमली पोशाक और ताज पहनकर बादशाह तख्त पर बैठते हैं, तो पूरा दुर्ग बादशाही बरकरार, शहजादा सलामत…के जयकारों से गूंज उठता है।

वो अनोखी कहानी: जब होली के ‘स्वांग’ ने बचाई जान
इस परंपरा के पीछे एक रोंगटे खड़े कर देने वाली लोककथा प्रचलित है। कहा जाता है कि सदियों पहले एक ब्राह्मण धर्म परिवर्तन के डर से भागकर जैसलमेर आया था। उस दिन होली थी। स्थानीय लोगों ने उसे बचाने के लिए एक चतुर योजना बनाई। उन्होंने उस ब्राह्मण को बादशाह का रूप देकर शाही तख्त पर बैठा दिया।
जब उसे ढूंढते हुए शिकारी सैनिक वहां पहुंचे, तो उन्हें लगा कि इस ब्राह्मण का धर्म परिवर्तन पहले ही हो चुका है और वह अब खुद ‘बादशाह’ है। वे खाली हाथ लौट गए और इस तरह एक स्वांग ने किसी का जीवन बचा लिया। तब से आज तक जैसलमेर इस ‘चातुर्य’ और ‘साहस’ को उत्सव के रूप में मनाता है।

चंग की थाप पर संकट: लुप्त हो रही है फाल्गुनी गूंज
जैसलमेर की होली का दूसरा पहलू थोड़ा भावुक करने वाला है। जो चंग कभी होली की जान हुआ करते थे, आज उनके कद्रदान कम हो रहे हैं। आज बाजार में प्लास्टिक और कृत्रिम चंगों की भरमार ने इन पारंपरिक कारीगरों के हाथों से काम छीन लिया है। अब ये हुनर सिर्फ कुछ मोहल्लों तक सिमट कर रह गया है।
कैसे बनता है असली चंग?
- खाल का चयन: मृत नर भेड़ की खाल को सुखाकर उसे पत्थर जैसा कठोर बनाया जाता है।
- ढांचा: लकड़ी के गोल घेरे पर इस खाल को पूरी ताकत से कसा जाता है।
- अंतिम टच: खाल पर हल्दी और विशेष सुगंधित लेप लगाया जाता है, जिससे इसकी ‘थाप’ में वो खास गूंज पैदा होती है जो मीलों दूर तक सुनाई देती है।

पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र
होली के दौरान जैसलमेर आने वाले पर्यटकों के लिए सोनार दुर्ग का यह उत्सव सबसे बड़ा आकर्षण है। गाइड बताते हैं कि विदेशी सैलानी इस ‘बादशाह’ के साथ फोटो खिंचवाने के लिए घंटों इंतजार करते हैं। सामूहिक गेर नृत्य और चंग की जुगलबंदी आज भी जैसलमेर को दुनिया के बाकी हिस्सों से अलग खड़ा करती है।


