Jaipur Metro Phase-2: जयपुर। देशभर में मेट्रो शहरी विकास की रीढ़ बनती जा रही है, लेकिन राजधानी जयपुर में यह सिस्टम बड़ी विफलता के रूप में सामने खड़ा है। जून 2015 में शुरू हुई जयपुर मेट्रो आज 10 साल बाद भी महज 11 किलोमीटर के दायरे में सिमटी हुई है। जबकि, देश के कई शहर जहां मेट्रो जयपुर के बाद शुरू हुई, आज कई गुना बड़ा नेटवर्क खड़ा कर चुके हैं। राजधानी में नीतिगत उदासीनता और प्रशासनिक सुस्ती के कारण मेट्रो का विस्तार नहीं हो पा रहा है।
जहां बाद में चली मेट्रो, वहां आज विस्तार
जयपुर मेट्रो जिस दौर में शुरू हुई थी, तब इसे उत्तर भारत के अग्रणी प्रोजेक्ट्स में गिना जा रहा था। उम्मीद थी कि राजधानी होने का फायदा मिलेगा, लेकिन हुआ इसका उलटा। लखनऊ, नागपुर, पुणे, अहमदाबाद, कानपुर और इंदौर जैसे शहरों ने मेट्रो को रफ्तार दी। वहां समय पर डीपीआर तैयार हुई, केंद्र से मंजूरी में अड़चन नहीं आई। चरणबद्ध तरीके से काम पूरा किया और नेटवर्क लगातार आगे बढ़ता गया।
अन्य शहरों में मेट्रो का विस्तार
| शहर | संचालन शुरू | कुल किमी में दौड़ रही मेट्रो |
|---|---|---|
| कोच्चि | जून, 2017 | 28 किमी |
| लखनऊ | सितम्बर, 2017 | 22 किमी |
| हैदराबाद | नवंबर, 2017 | 70 किमी |
| नोएडा–ग्रेटर नोएडा | जनवरी, 2019 | 29 किमी |
| अहमदाबाद | मार्च, 2019 | 62 किमी |
| नागपुर | मार्च, 2019 | 26 किमी |
| कानपुर | दिसम्बर, 2021 | 16 किमी |
| पुणे | मार्च, 2022 | 33 किमी |
| नवी मुंबई | नवंबर, 2023 | 11 किमी |
फेज-2: कागजों में दौड़ती रही
प्रह्लादपुरा से टोड़ी मोड़ तक प्रस्तावित इस चरण की चौथी बार डीपीआर बनाई गई है। 42.80 किमी लंबे इस रूट में टोंक रोड का बड़ा हिस्सा, कलक्ट्रेट सर्कल, अंबाबाड़ी और विद्याधर नगर जैसे इलाके शामिल हैं। इस पर 12,260 करोड़ रुपए खर्च होंगे। हालांकि, अब तक काम धरातल पर शुरू नहीं हो पाया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब दूसरे शहरों में मेट्रो सरकार की प्राथमिकता बन सकती है, तो राजधानी जयपुर में क्यों नहीं? यह केवल एक परियोजना की विफलता नहीं, बल्कि शहरी योजना, राजनीतिक इच्छाशक्ति और प्रशासनिक निर्णय क्षमता पर भी बड़ा सवाल है।
हम चले पहले, रह गए पीछे
जयपुर में मेट्रो की शुरुआत 3 जून 2015 को हुई थी। वर्तमान में 11.97 किमी ट्रैक पर मेट्रो दौड़ रही है। वहीं चेन्नई में मेट्रो का संचालन जयपुर के साथ ही शुरू हुआ था। आज वहां 50 किमी में मेट्रो चल रही है और 118 किमी के विस्तार का काम जारी है, जो वर्ष 2028 तक पूरा होगा।


