Jaipur:पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी की बढ़ी मुश्किलें, राज्यपाल ने मु​कदमा चलाने की दी अनुमति, कोर्ट में अलग-अलग चलेंगे केस

Jaipur:पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी की बढ़ी मुश्किलें, राज्यपाल ने मु​कदमा चलाने की दी अनुमति, कोर्ट में अलग-अलग चलेंगे केस

Jal Jeevan Mission Scam: जयपुर। पूर्व जलदाय मंत्री महेश जोशी की मुश्किलें बढ़ गई है। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने पूर्व मंत्री महेश जोशी के विरुद्ध धन शोधन निवारण अधिनियम (प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट ) 2002 के अंतर्गत प्रथम दृष्टया अपराध प्रमाणित होने पर अभियोजन स्वीकृति प्रदान की है। जलजीवन मिशन के कथित घोटाले में महेश जोशी के खिलाफ यह अभियोजन स्वीकृति प्रदान की गई है।

अलग-अलग केस चलाने का रास्ता साफ

महेश जोशी के खिलाफ जल जीवन मिशन घोटाले में एसीबी और ईडी ने मुकदमे दर्ज किए थे। राज्यपाल की मंजूरी के बाद महेश जोशी के खिलाफ जल जीवन मिशन घोटाले में ईडी और एसीबी के मामलों में कोर्ट में अलग-अलग मुकदमे चलाने का रास्ता साफ हो गया है।

राज्यपाल बागडे ने संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 197(1) (बी.एन. एस.एस 2023 की धारा 2018) के अंतर्गत महेश जोशी के विरुद्ध धारा 3 व सपठित धारा 4 धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 तथा प्रकरण के तथ्यों पर जो भी अभियोग बनते हों, के लिए सक्षम न्यायालय में अभियोग चलाए जाने के लिए स्वीकृति प्रदान की है।

महेश जोशी 7 महीने जेल में रहे, अभी जमानत पर

पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता महेश जोशी के खिलाफ 900 करोड़ के जल जीवन मिशन घोटाले में ईडी ने मुकदमा दर्ज किया था। जोशी को ईडी ने 24 अप्रेल 2025 को गिरफ्तार किया था। महेश जोशी इस मामले में सात महीने तक जेल में रहे। हाईकोर्ट ने 26 अगस्त 2025 को जोशी की जमानत याचिका खारिज कर दी थी, जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी। उन्हें पिछले साल दिसम्बर के प्रथम सप्ताह में ही सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली । फिलहाल महेश जोशी जमानत पर हैं।

900 करोड़ के घोटाले में नामजद

प्रदेश में 900 करोड़ के जल जीवन मिशन घोटाले में जलदाय विभाग पूर्व मंत्री समेत कई अफसर और ठेकेदारों के नाम सामने आए थे। जिसके बाद विभाग के नामजद अफसरों के खिलाफ कार्रवाई भी शुरू हुई लेकिन यह सिर्फ दिखावा साबित हुई। विभाग ने दोषी अफसरों और कर्मचारियों को चार्जशीट देने के लिए स्पेशल कैंप भी लगाया लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई नहीं होना विभाग में चर्चा का विषय बना हुआ है।

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