Indians stuck in Kuwait: कुवैत में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच वहां रह रहे भारतीयों की जिंदगी भय और अनिश्चितता के साये में गुजर रही है। युद्ध के महौल को देखते हुए भारतीयों की कुवैत से स्वदेश वापसी फिलहाल आसान नजर नहीं आ रही है। दहशत के साये में भारतीय कामगार अब घर लौटने के लिए बेचैन हैं।
यूं बताई पीड़ा
दौसा जिले के जोपाड़ा निवासी और जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में तैनात कांस्टेबल सीताराम ने जब 19 अप्रेल को परिवार में शादी में बुलाने के लिए अपने चाचा महावीर सिंह गुर्जर को वीडियो कॉल किया, तो वहां की हकीकत सुनकर दंग रह गए। वर्षों से कुवैत में काम कर रहे महावीर सिंह ने पत्रिका को बताया कि मौजूदा हालात बेहद खौफनाक हैं। मिसाइल हमलों का खतरा लगातार बना हुआ है।
खतरा होते ही बजते हैं सायरन
महावीर सिंह ने बताया कि जैसे ही कोई खतरा होता है, मोबाइल पर अलर्ट मैसेज आते हैं और सायरन बजने लगते हैं। सायरन सुनते ही लोग जान बचाने के लिए बेसमेंट की ओर दौड़ पड़ते हैं। उन्होंने बताया कि शहर में कई बार मिसाइल गिरती हुई देखी हैं, जिससे काफी डर बना हुआ है। महावीर 80 मंजिला इमारत की 73वीं मंजिल पर रहते हैं, जहां उनकी कंपनी के करीब 600 भारतीय मजदूर पांच मंजिलों में रह रहे हैं।
सामान्य जनजीवन पूरी तरह ठप
हालात ऐसे हैं कि सामान्य जनजीवन पूरी तरह ठप हो चुका है और हर पल डर का माहौल बना हुआ है। महावरी ने यह भी बताया कि कुवैत में सोशल मीडिया पर कड़ी पाबंदी है। स्वदेश लौटने वाले भारतीयों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए कई एजेंट और दलाल सक्रिय हो गए हैं। ये लोग सऊदी अरब के रास्ते भारत भेजने के नाम पर एक तरफ का किराया करीब 1.50 लाख रुपए वसूल रहे हैं और रुपए देने के बाद भी गारंटी नहीं कि सकुशल भारत पहुंचा देंगे।
युद्ध बंद तो भी 2 माह में शुरू होगा एयरपोर्ट
महावीर सिंह का कहना है कि यदि आज युद्ध जैसे हालात खत्म हो जाएं, तब भी कुवैत का एयरपोर्ट पूरी तरह से सामान्य होने में कम से कम दो महीने का समय लग सकता है। मिसाइल हमलों में एयरपोर्ट तबाह हो चुका है। ऐसे में हजारों भारतीय असमंजस और डर के बीच वहां फंसे हुए हैं, जहां हर सायरन उनकी सांसें थाम देता है।


