जेल में बंद बेटे को मां से मिलने नहीं दिया:भागलपुर में जेल गेट के सामने परिजनों ने अर्थी रखी, प्रशासन के खिलाफ की नारेबाजी

जेल में बंद बेटे को मां से मिलने नहीं दिया:भागलपुर में जेल गेट के सामने परिजनों ने अर्थी रखी, प्रशासन के खिलाफ की नारेबाजी

भागलपुर में एक साल से एनडीपीएस मामले में कैंप जेल में दो सगे भाई बंद है। इन्हें घंटोग उसकी मृत मां से मिलने नहीं दिया गया। इसके बाद परिजनों ने जेल गेट के सामने जेल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। बेटों को खबर मिली कि उनकी मां अब इस दुनिया में नहीं रहीं। मां की अंतिम इच्छा थी कि वह अपने बेटों को आखिरी बार देख ले। मां की मौत के बाद परिजन उनकी अर्थी लेकर सीधे जेल गेट पहुंच गए, ताकि बेटों को अंतिम दर्शन कराया जा सके। मामला भागलपुर जिला अंतर्गत कैम्प जेल का है। मां की मौत के बाद परिजनों ने तुरंत जेल प्रशासन से संपर्क साधा, लेकिन कोर्ट की प्रक्रिया का हवाला देते हुए अगली सुबह तक इंतजार करने को कहा गया। इसी बीच परिजन मां की अर्थी लेकर जेल गेट पहुंच गए और बेटों से अंतिम मुलाकात की गुहार लगाने लगे। घंटों तक गेट पर इंतजार होता रहा। परिजनों का आरोप है कि पहले अनुमति नहीं दी गई और अगली सुबह आने को कहा गया। इस दौरान गेट पर माहौल भावुक और तनावपूर्ण हो गया। दोनों बेटों को मां के अंतिम दर्शन कराए गए स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अंत में जेलर प्रकाश सिंह मौके पर पहुंचे। मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए उन्होंने विशेष अनुमति देते हुए अर्थी को जेल गेट के भीतर ले जाने की स्वीकृति दी। इसके बाद दोनों बेटों को मां के अंतिम दर्शन कराए गए। जेल गेट के भीतर का वह दृश्य बेहद मार्मिक था। बेटों ने बिलखते हुए अपनी मां को अंतिम विदाई दी। मृतका की बहन पुष्पा ने बताया कि “हमलोग सुबह से ही आग्रह कर रहे थे, लेकिन प्रक्रिया का हवाला दिया जा रहा था। मां की अंतिम इच्छा थी कि बेटों को देख ले, इसलिए हम अर्थी लेकर ही जेल पहुंच गए।” मृतका के पिता ने कहा कि “घंटों इंतजार के बाद आखिरकार प्रशासन ने मानवीय आधार पर अनुमति दी। इसके लिए हम जेलर साहब का आभार जताते हैं।” भागलपुर में एक साल से एनडीपीएस मामले में कैंप जेल में दो सगे भाई बंद है। इन्हें घंटोग उसकी मृत मां से मिलने नहीं दिया गया। इसके बाद परिजनों ने जेल गेट के सामने जेल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। बेटों को खबर मिली कि उनकी मां अब इस दुनिया में नहीं रहीं। मां की अंतिम इच्छा थी कि वह अपने बेटों को आखिरी बार देख ले। मां की मौत के बाद परिजन उनकी अर्थी लेकर सीधे जेल गेट पहुंच गए, ताकि बेटों को अंतिम दर्शन कराया जा सके। मामला भागलपुर जिला अंतर्गत कैम्प जेल का है। मां की मौत के बाद परिजनों ने तुरंत जेल प्रशासन से संपर्क साधा, लेकिन कोर्ट की प्रक्रिया का हवाला देते हुए अगली सुबह तक इंतजार करने को कहा गया। इसी बीच परिजन मां की अर्थी लेकर जेल गेट पहुंच गए और बेटों से अंतिम मुलाकात की गुहार लगाने लगे। घंटों तक गेट पर इंतजार होता रहा। परिजनों का आरोप है कि पहले अनुमति नहीं दी गई और अगली सुबह आने को कहा गया। इस दौरान गेट पर माहौल भावुक और तनावपूर्ण हो गया। दोनों बेटों को मां के अंतिम दर्शन कराए गए स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अंत में जेलर प्रकाश सिंह मौके पर पहुंचे। मानवीय पहलू को ध्यान में रखते हुए उन्होंने विशेष अनुमति देते हुए अर्थी को जेल गेट के भीतर ले जाने की स्वीकृति दी। इसके बाद दोनों बेटों को मां के अंतिम दर्शन कराए गए। जेल गेट के भीतर का वह दृश्य बेहद मार्मिक था। बेटों ने बिलखते हुए अपनी मां को अंतिम विदाई दी। मृतका की बहन पुष्पा ने बताया कि “हमलोग सुबह से ही आग्रह कर रहे थे, लेकिन प्रक्रिया का हवाला दिया जा रहा था। मां की अंतिम इच्छा थी कि बेटों को देख ले, इसलिए हम अर्थी लेकर ही जेल पहुंच गए।” मृतका के पिता ने कहा कि “घंटों इंतजार के बाद आखिरकार प्रशासन ने मानवीय आधार पर अनुमति दी। इसके लिए हम जेलर साहब का आभार जताते हैं।”  

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