दरभंगा में आज विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इसमें दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि मुस्लिम देशों ने नहीं हमने शेख हसीना को शरण दी है। पाकिस्तान असत्य, स्वार्थ, दमन की नींव पर खड़ा, इसलिए अस्थिर है। बता दें कि सम्मेलन तारडीह प्रखंड क्षेत्र स्थित जगदीश नारायण ब्रह्मचर्य आश्रम, लगमा में हुआ है। आश्रम के बटुकों ने वैदिक मंत्रोच्चार, स्वस्तिक वाचन और विधिपूर्वक स्वागत के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले का अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आश्रम के महंत कृष्ण मोहन दास ब्रह्मचारी बौआ भगवान ने की। मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने जगत माता सीता की जन्मभूमि पावन मिथिला को नमन किया। मुख्य वक्ता ने कहा कि मिथिला केवल एक भू-भाग नहीं, बल्कि संस्कार, साधना और संस्कृति की जीवंत भूमि है। ऐसे विराट सम्मेलन समाज में सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक समरसता और राष्ट्र बोध को सुदृढ़ करने का काम करते हैं। सम्मेलन के दौरान दत्तात्रेय होसबाले की ओर से संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति डॉ. लक्ष्मी नारायण सहित उपस्थित संत-महात्माओं को मिथिला की परंपरा के अनुरूप पाग पहनाकर सम्मानित किया गया। सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि यदि समाज का प्रत्येक वर्ग अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करें, तो भारत न केवल सशक्त बनेगा, बल्कि विश्व का मार्गदर्शक राष्ट्र भी बनेगा। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 सालों की तपस्या, सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। राष्ट्र को परम वैभव तक पहुंचाना संघ का उद्देश्य उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना से लेकर आज तक उसका एकमात्र उद्देश्य राष्ट्र को परम वैभव तक पहुंचाना रहा है। संघ ने समाज को संगठित करने, राष्ट्रभक्ति का भाव जागृत करने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। संघ किसी व्यक्ति, सत्ता या पद के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के लिए काम करता है। सरकार्यवाह ने कहा कि सेवा, शिक्षा, सामाजिक समरसता, स्वावलंबन, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण जैसे क्षेत्रों में संघ के स्वयंसेवक निस्वार्थ भाव से काम कर रहे हैं। आज जब भारत वैश्विक मंच पर सशक्त रूप से उभर रहा है, तब संघ का शताब्दी वर्ष आत्ममंथन और भविष्य के दायित्वों को समझने का महत्वपूर्ण अवसर है। युवाओं से राष्ट्र निर्माण का आह्वान दत्तात्रेय होसबाले ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। अनुशासन, चरित्र निर्माण, सेवा भाव और राष्ट्र के प्रति समर्पण के साथ युवा आगे बढ़ें, यही संघ की अपेक्षा है। उन्होंने कहा कि संगठित समाज ही सशक्त राष्ट्र की नींव होता है। सामाजिक समरसता पर विशेष जोर सामाजिक समरसता विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि समाज में किसी भी प्रकार का भेदभाव राष्ट्र की एकता के लिए घातक है। संघ ऐसे समरस समाज की कल्पना करता है, जहां जाति, वर्ग और पंथ के भेद से ऊपर उठकर सभी एक-दूसरे के पूरक बनें। सामाजिक समरसता ही सशक्त और अखंड भारत की आधारशिला है। सरकार्यवाह ने कहा कि परिवार भारतीय संस्कृति की सबसे मजबूत इकाई है। वर्तमान समय में परिवार व्यवस्था को सुदृढ़ करना अत्यंत आवश्यक है। संस्कारयुक्त, संवाद शील और संस्कृति निष्ठ परिवार ही राष्ट्र के चरित्र का निर्माण करते हैं। उन्होंने परिवारों से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन में संस्कार, समय और समर्पण को प्राथमिकता दें। कार्यक्रम के अंत में जिज्ञासा समाधान सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें श्रोताओं के प्रश्नों का उत्तर देते हुए सरकार्यवाह ने भारत को परम वैभव तक पहुंचाने के लिए हिंदू समाज को संगठित और एकजुट होने का संदेश दिया। सेमिनार पूरे समय प्रेरणा, राष्ट्र बोध और सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत रही। सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे महंत कृष्ण मोहन दास ब्रह्मचारी बौआ भगवान ने सरकार्यवाह को मिथिला की परंपरा अनुसार पंच-टूक कपड़े भेंट कर सम्मानित किया। बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, दरभंगा सांसद गोपाल जी ठाकुर और राजनगर विधायक सुजीत पासवान भी उपस्थित रहे। अतिथियों ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे सांस्कृतिक एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया। संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति डॉ. लक्ष्मी निवास पांडेय ने कहा कि मिथिला सदियों से ज्ञान, दर्शन और संस्कृति की केंद्र भूमि रही है। संत बौआनंदन महाराज, मनमोहन जी दास महाराज और रामदेव दास महाराज ने समाज में समरसता और सनातन संस्कृति के संरक्षण पर विशेष बल दिया। दरभंगा में आज विराट हिंदू सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इसमें दत्तात्रेय होसबाले ने कहा है कि मुस्लिम देशों ने नहीं हमने शेख हसीना को शरण दी है। पाकिस्तान असत्य, स्वार्थ, दमन की नींव पर खड़ा, इसलिए अस्थिर है। बता दें कि सम्मेलन तारडीह प्रखंड क्षेत्र स्थित जगदीश नारायण ब्रह्मचर्य आश्रम, लगमा में हुआ है। आश्रम के बटुकों ने वैदिक मंत्रोच्चार, स्वस्तिक वाचन और विधिपूर्वक स्वागत के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले का अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता आश्रम के महंत कृष्ण मोहन दास ब्रह्मचारी बौआ भगवान ने की। मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने जगत माता सीता की जन्मभूमि पावन मिथिला को नमन किया। मुख्य वक्ता ने कहा कि मिथिला केवल एक भू-भाग नहीं, बल्कि संस्कार, साधना और संस्कृति की जीवंत भूमि है। ऐसे विराट सम्मेलन समाज में सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक समरसता और राष्ट्र बोध को सुदृढ़ करने का काम करते हैं। सम्मेलन के दौरान दत्तात्रेय होसबाले की ओर से संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति डॉ. लक्ष्मी नारायण सहित उपस्थित संत-महात्माओं को मिथिला की परंपरा के अनुरूप पाग पहनाकर सम्मानित किया गया। सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि यदि समाज का प्रत्येक वर्ग अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करें, तो भारत न केवल सशक्त बनेगा, बल्कि विश्व का मार्गदर्शक राष्ट्र भी बनेगा। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 सालों की तपस्या, सेवा, समर्पण और राष्ट्र निर्माण की यात्रा पर विस्तार से प्रकाश डाला। राष्ट्र को परम वैभव तक पहुंचाना संघ का उद्देश्य उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना से लेकर आज तक उसका एकमात्र उद्देश्य राष्ट्र को परम वैभव तक पहुंचाना रहा है। संघ ने समाज को संगठित करने, राष्ट्रभक्ति का भाव जागृत करने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। संघ किसी व्यक्ति, सत्ता या पद के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्र और समाज के लिए काम करता है। सरकार्यवाह ने कहा कि सेवा, शिक्षा, सामाजिक समरसता, स्वावलंबन, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण जैसे क्षेत्रों में संघ के स्वयंसेवक निस्वार्थ भाव से काम कर रहे हैं। आज जब भारत वैश्विक मंच पर सशक्त रूप से उभर रहा है, तब संघ का शताब्दी वर्ष आत्ममंथन और भविष्य के दायित्वों को समझने का महत्वपूर्ण अवसर है। युवाओं से राष्ट्र निर्माण का आह्वान दत्तात्रेय होसबाले ने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। अनुशासन, चरित्र निर्माण, सेवा भाव और राष्ट्र के प्रति समर्पण के साथ युवा आगे बढ़ें, यही संघ की अपेक्षा है। उन्होंने कहा कि संगठित समाज ही सशक्त राष्ट्र की नींव होता है। सामाजिक समरसता पर विशेष जोर सामाजिक समरसता विषय पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि समाज में किसी भी प्रकार का भेदभाव राष्ट्र की एकता के लिए घातक है। संघ ऐसे समरस समाज की कल्पना करता है, जहां जाति, वर्ग और पंथ के भेद से ऊपर उठकर सभी एक-दूसरे के पूरक बनें। सामाजिक समरसता ही सशक्त और अखंड भारत की आधारशिला है। सरकार्यवाह ने कहा कि परिवार भारतीय संस्कृति की सबसे मजबूत इकाई है। वर्तमान समय में परिवार व्यवस्था को सुदृढ़ करना अत्यंत आवश्यक है। संस्कारयुक्त, संवाद शील और संस्कृति निष्ठ परिवार ही राष्ट्र के चरित्र का निर्माण करते हैं। उन्होंने परिवारों से आग्रह किया कि वे अपने दैनिक जीवन में संस्कार, समय और समर्पण को प्राथमिकता दें। कार्यक्रम के अंत में जिज्ञासा समाधान सत्र का आयोजन किया गया, जिसमें श्रोताओं के प्रश्नों का उत्तर देते हुए सरकार्यवाह ने भारत को परम वैभव तक पहुंचाने के लिए हिंदू समाज को संगठित और एकजुट होने का संदेश दिया। सेमिनार पूरे समय प्रेरणा, राष्ट्र बोध और सांस्कृतिक चेतना से ओतप्रोत रही। सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे महंत कृष्ण मोहन दास ब्रह्मचारी बौआ भगवान ने सरकार्यवाह को मिथिला की परंपरा अनुसार पंच-टूक कपड़े भेंट कर सम्मानित किया। बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, दरभंगा सांसद गोपाल जी ठाकुर और राजनगर विधायक सुजीत पासवान भी उपस्थित रहे। अतिथियों ने आयोजन की सराहना करते हुए इसे सांस्कृतिक एकता और सामाजिक समरसता का प्रतीक बताया। संस्कृत विश्वविद्यालय, दरभंगा के कुलपति डॉ. लक्ष्मी निवास पांडेय ने कहा कि मिथिला सदियों से ज्ञान, दर्शन और संस्कृति की केंद्र भूमि रही है। संत बौआनंदन महाराज, मनमोहन जी दास महाराज और रामदेव दास महाराज ने समाज में समरसता और सनातन संस्कृति के संरक्षण पर विशेष बल दिया।


