केंद्र सरकार ने आईटी नियमन- 2021 में बदलाव का नया मसौदा जारी कर दिया है। इससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स सरकारी निर्देशों की अनदेखी नहीं कर सकेंगे। उन्हें निर्देश, गाइडलाइन, एडवाइजरी माननी ही होगी। यदि वो ऐसा नहीं करते हैं तो संबंधित डिजिटल मीडिया कंपनियां सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराई जाएंगी। इससे इन कंपनियों को सेफ हार्बर के तहत मिलने वाली कानूनी ढाल खत्म कर दी जाएगी। आईटी नियमों में सबसे अहम बदलाव यह है कि प्लेटफॉर्म अपने यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए हर कंटेंट के लिए खुद जिम्मेदार होंगे। फिलहाल 14 अप्रैल तक सरकार ने इस मसौदे पर सार्वजनिक सुझाव, आपत्तियां मांगी हैं। डिलीट नहीं कर सकेंगे डेटा सेफ हार्बर क्या है… सेफ हार्बर एक कानूनी प्रावधान या सुरक्षा कवच है, जो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (जैसे फेसबुक, एक्स, यूट्यूब) और इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर को उनके यूजर्स की तरफ से पोस्ट की गई अवैध और आपत्तिजनक सामग्री के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराए जाने से बचाता है। अभी सोशल मीडिया कंपनियां सरकारी निर्देशों को सलाह के रूप में लेती रही हैं या फिर इनको अमल में लाने में टाल-मटोल करती रही हैं। लेकिन नियमों में बदलाव के बाद मिले निर्देशों को कानूनी आधार के साथ बताया जाएगा। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने कहा- सरकार सेंसरशिप लगा रही आईटी नियमों में बदलाव का विरोध शुरू हो गया है। इंटरनेट फ्रीडम फाउंडेशन ने आरोप लगाया है कि सरकार ऑनलाइन कंटेंट पर सेंशरशिप लगाना चाहती है। इसका मकसद सरकार पर तंज कसने, मखौल उड़ाने, नकल करने वाले कंटेंट पर अंकुश लगाना है। सरकार सेफ हार्बर पर चोट करके आम यूजर्स पर नकेल कसना चाह रही है।
IT रूल बदलेंगे- निर्देश नहीं माने तो सेफ हार्बर खत्म:अब हर कंटेंट के लिए सोशल मीडिया कंपनियां ही जिम्मेदार; डेटा डिलीट नहीं कर सकेंगे


