बाल विवाह मुक्त समाज बनाना हम सभी का दायित्व

बाल विवाह मुक्त समाज बनाना हम सभी का दायित्व

सिटी रिपोर्टर |औरंगाबाद बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकार औरंगाबाद के तत्वावधान में शुक्रवार को पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर, सनथुआ में एक विशेष जागरूकता सह सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद की सचिव तान्या पटेल ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके पश्चात संस्थान की सचिव नेहा कुमारी ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव तान्या पटेल को पुष्पगुच्छ व अंग वस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया। अध्यक्षीय संबोधन में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव तान्या पटेल ने कहा कि बाल विवाह मुक्त समाज बनाना केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि बाल विवाह के दुष्परिणाम अंततः पूरे समाज को झेलने पड़ते हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं व संस्थान के पदाधिकारियों से बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाने और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी संस्थाओं को सूचना देने का आह्वान किया।इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक एवं संस्थान के कर्मचारी उपस्थित रहे।
बाल विवाह कानूनन अपराध है: सेमिनार को संबोधित करते हुए अधिवक्ता सुबोध कुमार सिंह ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की विस्तृत रूपरेखा उपस्थित लोगों के समक्ष रखी। उन्होंने बाल विवाह की सामाजिक, शैक्षणिक और कानूनी जटिलताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। उन्होंने अभियान के अंतर्गत की जाने वाली आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानकारी भी दी।वहीं उप मुख्य कानूनी बचाव अधिवक्ता अभिनंदन कुमार ने छात्र-छात्राओं से संवाद करते हुए बाल विवाह से संबंधित विभिन्न कानूनों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार किस प्रकार पीड़ितों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराता है। ।
छात्र – छात्राओं के साथ किया गया संवाद : कार्यक्रम के दौरान छात्रों द्वारा पूछे गए गंभीर प्रश्नों का जवाब देते हुए श्रीमती पटेल ने सरल भाषा और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से उन्हें जागरूक किया और बेहतर समाज निर्माण के लिए प्रेरित किया। विदित हो कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद द्वारा सौ दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों के साथ-साथ घर-घर जाकर जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, ताकि समाज से बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से समाप्त किया जा सके। सिटी रिपोर्टर |औरंगाबाद बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकार औरंगाबाद के तत्वावधान में शुक्रवार को पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर, सनथुआ में एक विशेष जागरूकता सह सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद की सचिव तान्या पटेल ने मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया।कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई। इसके पश्चात संस्थान की सचिव नेहा कुमारी ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव तान्या पटेल को पुष्पगुच्छ व अंग वस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया। अध्यक्षीय संबोधन में जिला विधिक सेवा प्राधिकार की सचिव तान्या पटेल ने कहा कि बाल विवाह मुक्त समाज बनाना केवल सरकार या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने उदाहरणों के माध्यम से समझाया कि बाल विवाह के दुष्परिणाम अंततः पूरे समाज को झेलने पड़ते हैं। उन्होंने छात्र-छात्राओं व संस्थान के पदाधिकारियों से बाल विवाह के खिलाफ आवाज उठाने और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी संस्थाओं को सूचना देने का आह्वान किया।इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं, शिक्षक एवं संस्थान के कर्मचारी उपस्थित रहे।
बाल विवाह कानूनन अपराध है: सेमिनार को संबोधित करते हुए अधिवक्ता सुबोध कुमार सिंह ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान की विस्तृत रूपरेखा उपस्थित लोगों के समक्ष रखी। उन्होंने बाल विवाह की सामाजिक, शैक्षणिक और कानूनी जटिलताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है, बल्कि यह बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को भी गंभीर रूप से प्रभावित करता है। उन्होंने अभियान के अंतर्गत की जाने वाली आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानकारी भी दी।वहीं उप मुख्य कानूनी बचाव अधिवक्ता अभिनंदन कुमार ने छात्र-छात्राओं से संवाद करते हुए बाल विवाह से संबंधित विभिन्न कानूनों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार किस प्रकार पीड़ितों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराता है। ।
छात्र – छात्राओं के साथ किया गया संवाद : कार्यक्रम के दौरान छात्रों द्वारा पूछे गए गंभीर प्रश्नों का जवाब देते हुए श्रीमती पटेल ने सरल भाषा और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से उन्हें जागरूक किया और बेहतर समाज निर्माण के लिए प्रेरित किया। विदित हो कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार, औरंगाबाद द्वारा सौ दिवसीय बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों के साथ-साथ घर-घर जाकर जागरूकता कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं, ताकि समाज से बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से समाप्त किया जा सके।  

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