अररिया जिला प्रशासन ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर एक महत्वपूर्ण लाइव सत्र आयोजित किया। इसमें जिला निलामपत्र पदाधिकारी अनुराधा कुमारी किशोर ने निलामपत्र कार्यालय की प्रक्रिया और बकाया राशि वसूली से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा की। यह सत्र आम लोगों में जागरूकता बढ़ाने और वित्तीय दायित्वों को समय पर पूरा करने की अपील के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। अनुराधा कुमारी ने बताया कि निलामपत्र कार्य लोक मांग वसूली अधिनियम 1914 के तहत संचालित होता है। लोन न चुका पाने पर बैंक निलामपत्र कर सकता है दायर इस अधिनियम के अनुसार, जब कोई व्यक्ति बैंक से ऋण लेता है या किसी सरकारी विभाग से राशि प्राप्त करता है, लेकिन उसे समय पर चुका नहीं पाता, तो संबंधित बैंक या विभाग निलामपत्र कार्यालय में मामला दायर कर सकता है। वसूली की प्रक्रिया तीन चरणों में होती है। सबसे पहले देनदार को नोटिस जारी किया जाता है। यदि नोटिस के बाद भी राशि जमा नहीं होती, तो सर्टिफिकेट अधिकारी द्वारा सुनवाई की जाती है। यदि इसके बाद भी भुगतान नहीं होता, तो न्याय हित में गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सकता है, जिसे संबंधित थाना को भेजा जाता है और पुलिस द्वारा तामील किया जाता है। लोग पहले ही जागरूक हों,समय से जमा करें बकाया राशि अधिकारी ने लोगों से अपील की कि ऐसी स्थिति न आने दें। उन्होंने कहा, “सारे आम लोगों से यही उम्मीद है कि वारंट की नौबत न आए, गिरफ्तारी न हो। लोग पहले ही जागरूक हो जाएं और बकाया राशि समय पर जमा करें।”उन्होंने सकारात्मक पहलुओं पर भी प्रकाश डाला। यदि देनदार बीमार है, उसकी मृत्यु हो गई है या आर्थिक स्थिति कमजोर है, तो बैंक व विभाग से समझौता कराया जा सकता है। विशेष मामलों में बकाया राशि को 50% तक कम भी किया जा सकता है।यदि कोई वास्तविक कारण से समय पर भुगतान नहीं कर पा रहा है, तो वह सर्टिफिकेट अधिकारी या बैंक से संपर्क कर समय मांग सकता है। यह लाइव सत्र जिला प्रशासन की पारदर्शिता और जन-जागरूकता अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य लोगों को कानूनी प्रक्रिया समझाकर अनावश्यक कानूनी कार्रवाई से बचाना है। प्रशासन ने ऐसे और अधिक लाइव सत्रों के माध्यम से जनता को सूचित रखने का संकल्प लिया है। अररिया जिला प्रशासन ने अपने आधिकारिक फेसबुक पेज पर एक महत्वपूर्ण लाइव सत्र आयोजित किया। इसमें जिला निलामपत्र पदाधिकारी अनुराधा कुमारी किशोर ने निलामपत्र कार्यालय की प्रक्रिया और बकाया राशि वसूली से जुड़ी विस्तृत जानकारी साझा की। यह सत्र आम लोगों में जागरूकता बढ़ाने और वित्तीय दायित्वों को समय पर पूरा करने की अपील के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। अनुराधा कुमारी ने बताया कि निलामपत्र कार्य लोक मांग वसूली अधिनियम 1914 के तहत संचालित होता है। लोन न चुका पाने पर बैंक निलामपत्र कर सकता है दायर इस अधिनियम के अनुसार, जब कोई व्यक्ति बैंक से ऋण लेता है या किसी सरकारी विभाग से राशि प्राप्त करता है, लेकिन उसे समय पर चुका नहीं पाता, तो संबंधित बैंक या विभाग निलामपत्र कार्यालय में मामला दायर कर सकता है। वसूली की प्रक्रिया तीन चरणों में होती है। सबसे पहले देनदार को नोटिस जारी किया जाता है। यदि नोटिस के बाद भी राशि जमा नहीं होती, तो सर्टिफिकेट अधिकारी द्वारा सुनवाई की जाती है। यदि इसके बाद भी भुगतान नहीं होता, तो न्याय हित में गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सकता है, जिसे संबंधित थाना को भेजा जाता है और पुलिस द्वारा तामील किया जाता है। लोग पहले ही जागरूक हों,समय से जमा करें बकाया राशि अधिकारी ने लोगों से अपील की कि ऐसी स्थिति न आने दें। उन्होंने कहा, “सारे आम लोगों से यही उम्मीद है कि वारंट की नौबत न आए, गिरफ्तारी न हो। लोग पहले ही जागरूक हो जाएं और बकाया राशि समय पर जमा करें।”उन्होंने सकारात्मक पहलुओं पर भी प्रकाश डाला। यदि देनदार बीमार है, उसकी मृत्यु हो गई है या आर्थिक स्थिति कमजोर है, तो बैंक व विभाग से समझौता कराया जा सकता है। विशेष मामलों में बकाया राशि को 50% तक कम भी किया जा सकता है।यदि कोई वास्तविक कारण से समय पर भुगतान नहीं कर पा रहा है, तो वह सर्टिफिकेट अधिकारी या बैंक से संपर्क कर समय मांग सकता है। यह लाइव सत्र जिला प्रशासन की पारदर्शिता और जन-जागरूकता अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य लोगों को कानूनी प्रक्रिया समझाकर अनावश्यक कानूनी कार्रवाई से बचाना है। प्रशासन ने ऐसे और अधिक लाइव सत्रों के माध्यम से जनता को सूचित रखने का संकल्प लिया है।


