‘ब्रेस्ट कैंसर के सर्जरी में स्तन बचाना भी जरूरी’:पटना में ABSI SkillCon-2026, देश-विदेश के विशेषज्ञों ने बताए आधुनिक इलाज के तरीके

‘ब्रेस्ट कैंसर के सर्जरी में स्तन बचाना भी जरूरी’:पटना में ABSI SkillCon-2026, देश-विदेश के विशेषज्ञों ने बताए आधुनिक इलाज के तरीके

पटना में एसोसिएशन ऑफ ब्रेस्ट सर्जन्स ऑफ इंडिया (ABSI) SkillCon 2026 का आयोजन किया गया। इस महासम्मेलन में देश-विदेश के प्रख्यात विशेषज्ञों ने ब्रेस्ट कैंसर के इलाज से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि ब्रेस्ट कैंसर के उपचार में सिर्फ स्तन को हटाना ही नहीं, बल्कि उसे बचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। एसोसिएशन ऑफ ब्रेस्ट सर्जन्स ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित यह दो दिवसीय सीएमई (CME) और कार्यशाला शनिवार को शुरू हुई। पहले दिन सवेरा कैंसर हॉस्पिटल में लाइव ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी वर्कशॉप का आयोजन किया गया। ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी का सीधा प्रसारण इंग्लैंड और देश के प्रमुख मेडिकल संस्थानों से आए सर्जनों ने ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी की, जिसका सीधा प्रसारण किया गया। सर्जरी के दौरान डॉक्टर लगातार लाइव कमेंट्री कर रहे थे। प्रतिभागी डॉक्टर तुरंत सवाल पूछते और ऑपरेशन कर रहे सर्जन तत्काल उनका जवाब देते, जिससे सीखने का अनुभव अत्यंत व्यावहारिक और प्रभावी बन गया। इस कार्यशाला में देश-विदेश से 200 से अधिक रेजिडेंट और पीजी डॉक्टरों ने प्रशिक्षण लिया। विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके सर्जरी करने के तरीकों का प्रदर्शन किया। लाइव सर्जरी के माध्यम से डॉक्टरों को नई तकनीकों को समझने और उन्हें अपनाने का अवसर मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के व्यावहारिक प्रशिक्षण से भविष्य में ब्रेस्ट कैंसर के इलाज की गुणवत्ता में सुधार होगा। ऑन्कोप्लास्टिक सर्जरी है भविष्य- डॉ. ऋषिकेश परमेश्वर इंग्लैंड से आए भारतीय मूल के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. ऋषिकेश परमेश्वर ने बताया कि, विकसित देशों में महिलाओं के स्तन को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को भी इस दिशा में तेजी से प्रगति करने की आवश्यकता है।
नई तकनीकों से मिलेगा बेहतर इलाज कार्यक्रम के आयोजन अध्यक्ष और वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ. वी. पी. सिंह ने कहा कि, ‘कैंसर एक तेजी से बढ़ती बीमारी है, जिसे समय रहते नियंत्रित करना बेहद जरूरी है।’ आयोजन सचिव डॉ. आकाश कुमार सिंह ने कहा कि, ‘इस तरह की कार्यशालाएं चिकित्सा क्षेत्र में नई दिशा देती हैं। इससे डॉक्टरों को अपने कौशल को बेहतर बनाने का अवसर मिलता है और मरीजों को अधिक प्रभावी इलाज मिल पाता है।’ डॉ. राहुल कुमार चौधरी ने कहा कि हर मरीज अलग होता है, इसलिए उसका इलाज भी व्यक्तिगत होना चाहिए। सही समय पर सही तकनीक अपनाने से बेहतर परिणाम मिलते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक सर्जरी तकनीक से न सिर्फ बीमारी का इलाज संभव है, बल्कि मरीज का आत्मविश्वास और जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। क्या कहते हैं विशेषज्ञ? पद्मश्री एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शांति राय ने बताया कि, ‘स्तन कैंसर का मूल कारण मोटापा अथवा स्तनपान नहीं कराने की वजह बनता जा रहा है, आज के आधुनिक युग में महिलाओं की जीवन शैली तेजी से बदल रही हैं। खान पान भी इसका मूल कारण बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि जेनेटिक समस्या भी काफी हद तक महिलाओं के स्तन कैंसर का बड़ा कारण बनती हैं।’ उन्होंने ने सलाह दी है कि हर महिला को 20-25 वर्ष की आयु में अपने स्तन की नियमित जांच आवश्य करनी चाहिए अगर कोई भी असाधारण लक्षण या गिल्टी जैसा लक्षण दिखे तो तत्काल चिकित्सकों से सलाह एवं जांच कराएं। महिलाओं को दी अहम सलाह स्त्री रोग विशेषज्ञ और ब्रेस्ट सर्जन शलाका जोशी ने बताया, ‘ब्रेस्ट कैंसर के नए-नए इलाज हैं, जिसका भारत में किस प्रकार प्रयोग, ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित मरीजों का इलाज की बेहतर संभावना है। आज महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर जैसी बीमारियों लगातार बढ़ती जा रही है। महिलाओं के खान पान की समस्या इस ब्रेस्ट कैंसर की बड़ी वजह बनती जा रही है।’ शाम को हुआ औपचारिक उद्घाटन दिनभर चली लाइव सर्जरी और वर्कशॉप के बाद शाम 7 बजे होटल चाणक्या में कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन हुआ। इस मौके पर बिहार के कई वरिष्ठ सर्जनों की उपस्थिति रही, जिन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में इस तरह के आयोजनों को बेहद जरूरी बताया। इस आयोजन में राज्य और देश के कई प्रतिष्ठित संस्थान भागीदार बने, जिनमें AIIMS, IGIMS, PMCH, NMCH सहित अन्य मेडिकल कॉलेज शामिल रहे। कार्यक्रम के दौरान आधुनिक सर्जिकल तकनीकों, एंडोस्कोपिक विधियों और मरीज-केंद्रित उपचार पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। मरीज-केंद्रित इलाज पर फोकस स्किलकॉन-2026 का मुख्य उद्देश्य ब्रेस्ट कैंसर के इलाज को अधिक सुरक्षित, प्रभावी और मरीज-केंद्रित बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में तकनीक और प्रशिक्षण के जरिए इलाज के परिणाम और बेहतर होंगे। इस आयोजन ने यह साफ कर दिया कि अब ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में सिर्फ बीमारी हटाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि मरीज की शारीरिक संरचना, आत्मविश्वास और जीवन की गुणवत्ता को भी उतना ही महत्व दिया जा रहा है। पटना में एसोसिएशन ऑफ ब्रेस्ट सर्जन्स ऑफ इंडिया (ABSI) SkillCon 2026 का आयोजन किया गया। इस महासम्मेलन में देश-विदेश के प्रख्यात विशेषज्ञों ने ब्रेस्ट कैंसर के इलाज से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि ब्रेस्ट कैंसर के उपचार में सिर्फ स्तन को हटाना ही नहीं, बल्कि उसे बचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। एसोसिएशन ऑफ ब्रेस्ट सर्जन्स ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित यह दो दिवसीय सीएमई (CME) और कार्यशाला शनिवार को शुरू हुई। पहले दिन सवेरा कैंसर हॉस्पिटल में लाइव ब्रेस्ट कैंसर सर्जरी वर्कशॉप का आयोजन किया गया। ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी का सीधा प्रसारण इंग्लैंड और देश के प्रमुख मेडिकल संस्थानों से आए सर्जनों ने ऑपरेशन थिएटर में सर्जरी की, जिसका सीधा प्रसारण किया गया। सर्जरी के दौरान डॉक्टर लगातार लाइव कमेंट्री कर रहे थे। प्रतिभागी डॉक्टर तुरंत सवाल पूछते और ऑपरेशन कर रहे सर्जन तत्काल उनका जवाब देते, जिससे सीखने का अनुभव अत्यंत व्यावहारिक और प्रभावी बन गया। इस कार्यशाला में देश-विदेश से 200 से अधिक रेजिडेंट और पीजी डॉक्टरों ने प्रशिक्षण लिया। विशेषज्ञों ने आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके सर्जरी करने के तरीकों का प्रदर्शन किया। लाइव सर्जरी के माध्यम से डॉक्टरों को नई तकनीकों को समझने और उन्हें अपनाने का अवसर मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के व्यावहारिक प्रशिक्षण से भविष्य में ब्रेस्ट कैंसर के इलाज की गुणवत्ता में सुधार होगा। ऑन्कोप्लास्टिक सर्जरी है भविष्य- डॉ. ऋषिकेश परमेश्वर इंग्लैंड से आए भारतीय मूल के वरिष्ठ विशेषज्ञ डॉ. ऋषिकेश परमेश्वर ने बताया कि, विकसित देशों में महिलाओं के स्तन को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव प्रयास किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को भी इस दिशा में तेजी से प्रगति करने की आवश्यकता है।
नई तकनीकों से मिलेगा बेहतर इलाज कार्यक्रम के आयोजन अध्यक्ष और वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ. वी. पी. सिंह ने कहा कि, ‘कैंसर एक तेजी से बढ़ती बीमारी है, जिसे समय रहते नियंत्रित करना बेहद जरूरी है।’ आयोजन सचिव डॉ. आकाश कुमार सिंह ने कहा कि, ‘इस तरह की कार्यशालाएं चिकित्सा क्षेत्र में नई दिशा देती हैं। इससे डॉक्टरों को अपने कौशल को बेहतर बनाने का अवसर मिलता है और मरीजों को अधिक प्रभावी इलाज मिल पाता है।’ डॉ. राहुल कुमार चौधरी ने कहा कि हर मरीज अलग होता है, इसलिए उसका इलाज भी व्यक्तिगत होना चाहिए। सही समय पर सही तकनीक अपनाने से बेहतर परिणाम मिलते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक सर्जरी तकनीक से न सिर्फ बीमारी का इलाज संभव है, बल्कि मरीज का आत्मविश्वास और जीवन की गुणवत्ता भी बेहतर होती है। क्या कहते हैं विशेषज्ञ? पद्मश्री एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. शांति राय ने बताया कि, ‘स्तन कैंसर का मूल कारण मोटापा अथवा स्तनपान नहीं कराने की वजह बनता जा रहा है, आज के आधुनिक युग में महिलाओं की जीवन शैली तेजी से बदल रही हैं। खान पान भी इसका मूल कारण बनता जा रहा है। उन्होंने बताया कि जेनेटिक समस्या भी काफी हद तक महिलाओं के स्तन कैंसर का बड़ा कारण बनती हैं।’ उन्होंने ने सलाह दी है कि हर महिला को 20-25 वर्ष की आयु में अपने स्तन की नियमित जांच आवश्य करनी चाहिए अगर कोई भी असाधारण लक्षण या गिल्टी जैसा लक्षण दिखे तो तत्काल चिकित्सकों से सलाह एवं जांच कराएं। महिलाओं को दी अहम सलाह स्त्री रोग विशेषज्ञ और ब्रेस्ट सर्जन शलाका जोशी ने बताया, ‘ब्रेस्ट कैंसर के नए-नए इलाज हैं, जिसका भारत में किस प्रकार प्रयोग, ब्रेस्ट कैंसर से पीड़ित मरीजों का इलाज की बेहतर संभावना है। आज महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर जैसी बीमारियों लगातार बढ़ती जा रही है। महिलाओं के खान पान की समस्या इस ब्रेस्ट कैंसर की बड़ी वजह बनती जा रही है।’ शाम को हुआ औपचारिक उद्घाटन दिनभर चली लाइव सर्जरी और वर्कशॉप के बाद शाम 7 बजे होटल चाणक्या में कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन हुआ। इस मौके पर बिहार के कई वरिष्ठ सर्जनों की उपस्थिति रही, जिन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में इस तरह के आयोजनों को बेहद जरूरी बताया। इस आयोजन में राज्य और देश के कई प्रतिष्ठित संस्थान भागीदार बने, जिनमें AIIMS, IGIMS, PMCH, NMCH सहित अन्य मेडिकल कॉलेज शामिल रहे। कार्यक्रम के दौरान आधुनिक सर्जिकल तकनीकों, एंडोस्कोपिक विधियों और मरीज-केंद्रित उपचार पद्धतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। मरीज-केंद्रित इलाज पर फोकस स्किलकॉन-2026 का मुख्य उद्देश्य ब्रेस्ट कैंसर के इलाज को अधिक सुरक्षित, प्रभावी और मरीज-केंद्रित बनाना है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में तकनीक और प्रशिक्षण के जरिए इलाज के परिणाम और बेहतर होंगे। इस आयोजन ने यह साफ कर दिया कि अब ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में सिर्फ बीमारी हटाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि मरीज की शारीरिक संरचना, आत्मविश्वास और जीवन की गुणवत्ता को भी उतना ही महत्व दिया जा रहा है।  

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