IT Industry: इंजीनियरिंग फ्रेशर्स की सैलरी प्लंबर से भी कम! फिर कहां मिलेगा ज्यादा पैसा?

IT Industry: इंजीनियरिंग फ्रेशर्स की सैलरी प्लंबर से भी कम! फिर कहां मिलेगा ज्यादा पैसा?

IT Industry: “मैं शाम 5:15 बजे पैदा हुआ। 5:16 बजे मेरे पिता ने घोषणा कर दी- मेरा बेटा इंजीनियर बनेगा और उसी पल मेरी किस्मत तय हो गई।” फिल्म 3 इडियट्स का यह डायलॉग आपको याद होगा। भले ही साल 2009 की यह ब्लॉकबस्टर फिल्म काल्पनिक थी, लेकिन यह उस सच्चाई को जरूर दिखाती है, जो आज भी करोड़ों भारतीय माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा इंजीनियर बने।

कई दशकों तक इंजीनियरिंग एक अच्छी कमाई वाला पेशा माना जाता रहा, जो बेहतर जिंदगी की गारंटी देता था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। आईटी फ्रेशर्स की सैलरी पिछले एक दशक से नहीं बढ़ी है। इससे भी चौंकाने वाली बात यह है कि होम और पर्सनल सर्विसेज स्टार्टअप अर्बन कंपनी ने पिछले साल कहा कि उसके टॉप 20% पार्टनर्स- जैसे प्लंबर और ब्यूटीशियन आईटी फ्रेशर्स से ज्यादा कमाते हैं।

अब उठ रहे हैं ये सवाल:

  • इंजीनियर बनने का सपना कब डरावना बन गया?
  • क्या इंजीनियरिंग आज भी भारतीय मिडिल क्लास के लिए उतनी ही आकर्षक है?
  • फ्रेशर्स की सैलरी क्यों नहीं बढ़ रही?
  • अगर GenAI ने फ्रेशर्स की मांग ही खत्म कर दी तो क्या होगा?

क्या है वजह?

टैलेंट जीनियस के सीईओ और कॉग्निजेंट के पूर्व प्रेसिडेंट मैल्कम फ्रैंक कहते हैं, “इंडस्ट्री ने फ्रेशर्स से ग्रोथ और करियर का वादा किया था। जब इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही थी, तब यह वादा पूरा हुआ। अब वह दौर बदल गया है।” भारतीय आईटी इंडस्ट्री की सफलता की कहानी असल में टैलेंट के औद्योगीकरण की कहानी है। कंपनियों ने खुद फ्रेशर्स को ट्रेन किया और दो साल में उन्हें काम के लायक बनाया। एक टॉप आईटी कंपनी के एचआर हेड के अनुसार, सैलरी में गिरावट का एक कारण कंपनियों की बिलिंग रेट्स में लगातार गिरावट है।

क्यों नहीं बढ़ रही IT कंपनियों की कमाई?

-FY19 से अब तक प्रति कर्मचारी राजस्व और बिलिंग रेट्स सिर्फ 2-3% ही बढ़े हैं।
-सामान्य आईटी सेवाओं की बिलिंग 20 डॉलर प्रति घंटा या उससे भी कम हो गई है।
-बढ़ती प्रतिस्पर्धा, GCCs और GenAI ने दबाव और बढ़ाया है।

एक दशक से नहीं बढ़ी फ्रेशर्स की सैलरी

आईटी कंपनियां आज भी फ्रेशर्स को 3.5 से 4 लाख रुपये सालाना सैलरी देती हैं। यह वही सैलरी है, जो एक दशक पहले थी। सैलरी बढ़ाने का सबसे बड़ा तरीका आज भी जॉब स्विच ही है।

प्लंबर vs इंजीनियर

अर्बन कंपनी के मुताबिक टॉप 20% प्रोफेशनल्स की कमाई 41,000 रुपये+ प्रति माह है, जो 4.92 लाख रुपये सालाना बैठता है। वहीं, औसत कमाई 26,500 रुपये प्रति माह है, जो 3.2 लाख रुपये सालाना बैठती है। काम के घंटों की बात करें, तो आईटी फ्रेशर एक महीने में करीब 198 घंटे काम करता है और अर्बन कंपनी का प्रोफेशनल 87 घंटे काम करता है।

कहां है पैसा?

AI, GenAI और डिजिटल स्किल्स में 12 से 15% की ग्रोथ है।
AI/GenAI फ्रेशर्स की सैलरी 6 से 9 लाख रुपये सालाना है।

फ्रेशर्स की बाढ़

हर साल करीब 15 लाख आईटी ग्रेजुएट्स निकलते हैं, जिनमें से बहुत कम के पास इंडस्ट्री-रेडी स्किल्स होती हैं। मैल्कम कहते हैं, “अगर आप टैलेंटेड हैं, तो आप कहीं भी जा सकते हैं- स्टार्टअप, प्रोडक्ट कंपनी या GCC। लेकिन औसत छात्र, जिसे सिर्फ स्टेबिलिटी के नाम पर इंजीनियरिंग में धकेला गया है, उसके लिए भविष्य मुश्किल है।”

GenAI का असर

AI आने वाले समय में 30 से 50% वर्कफोर्स को रिप्लेस कर सकता है। सिर्फ वही बचेगा जो AI एजेंट्स को मैनेज करना सीख ले।

दोष किसका?

फ्रेशर्स को अक्सर अनस्किल्ड कहा जाता है। लेकिन सच्चाई यह भी है कि:

  • कॉलेजों ने स्किल नहीं सिखाईं।
  • स्टूडेंट्स ने एजुकेशन लोन लिया।
  • अब उनसे और कोर्स करने को कहा जा रहा है।

OpenAI दे रहा जमकर पैसा

वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, OpenAI हाल के वर्षों में किसी भी टेक स्टार्टअप की तुलना में अपने कर्मचारियों को सबसे ज्यादा भुगतान कर रही है। कंपनी का स्टॉक बेस्ड कंपनसेशन औसतन प्रति कर्मचारी करीब 15 लाख डॉलर बैठता है। फिलहाल OpenAI में लगभग 4,000 कर्मचारी काम कर रहे हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए OpenAI ने अपने टॉप रिसर्चर्स और इंजीनियर्स को दिए जाने वाले इक्विटी भुगतान बढ़ा दिए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इन पैकेजों की वजह से कुछ कर्मचारी सिलिकॉन वैली के सबसे अमीर लोगों में शामिल हो गए हैं।

हालांकि, इतनी बड़ी रकम के भुगतान से OpenAI के ऑपरेटिंग लॉसेस तेजी से बढ़ रहे हैं और मौजूदा शेयरधारकों की हिस्सेदारी भी तेजी से कम (डाइल्यूट) हो रही है।

इस साल गर्मियों में AI टैलेंट को लेकर प्रतिस्पर्धा और तेज हो गई, जिससे वेतन बढ़ाने का दबाव और बढ़ा। Meta Platforms के CEO मार्क जुकरबर्ग ने प्रतिद्वंद्वी AI कंपनियों के सीनियर एग्जीक्यूटिव्स और रिसर्चर्स को सैकड़ों मिलियन डॉलर और कुछ मामलों में 1 अरब डॉलर तक के पैकेज ऑफर किए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *