Israel-Iran conflict: पश्चिम एशिया में ईरान और अमरीका-इजरायल के बीच जारी जंग की आग अब बांग्लादेश की दहलीज तक पहुंच गई है। ईरान पर अमरीका-इजरायल के हमले के बाद वैश्विक ऊर्जा बाजार में मची उथल-पुथल ने बांग्लादेश को घुटनों पर ला दिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि सरकार ने देश के सभी सरकारी और निजी विश्वविद्यालयों को तत्काल प्रभाव यानी सोमवार से ही बंद कर दिया है और पेट्रोल-डीजल की बिक्री पर ‘राशनिंग’ (दैनिक सीमा) लागू कर दी है। अब अगली बार पेट्रोल-डीजल लेने से पहले वाहन धारक को पुरानी खरीद की रसीद दिखानी होगी।
यूनिवर्सिटी कैंपस हुए वीरान, ईद की छुट्टियां पहले शुरू
बिजली और ईंधन बचाने के लिए शिक्षा मंत्रालय ने सोमवार से सभी विश्वविद्यालयों को बंद करने का निर्देश जारी किया है। दरअसल, हॉस्टल, क्लासरूम और लैब में भारी मात्रा में बिजली की खपत होती है, जिसे बचाने के लिए ईद-उल-फितर की छुट्टियों को समय से पहले ही शुरू कर दिया गया है। स्कूल और कोचिंग सेंटर पहले से ही बंद हैं, जिससे पूरा देश एक तरह से ‘एजुकेशनल लॉकडाउन’ की स्थिति में है।
चार में से पांच उर्वरक कारखाने बंद
अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए 95 प्रतिशत आयात पर निर्भर बांग्लादेश में तेल की किल्लत इस कदर बढ़ी कि लोगों ने ‘पैनिक बाइंग’ (घबराहट में खरीदारी) शुरू कर दी। स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने शुक्रवार से ईंधन की बिक्री पर दैनिक सीमा तय कर दी है। इसके अलावा, गैस की कमी के कारण देश के पांच में से चार सरकारी उर्वरक कारखाने बंद कर दिए गए हैं, ताकि बची हुई गैस को बिजली संयंत्रों (पावर प्लांट) की ओर मोड़ा जा सके।
बिजली बचाने की हिदायत
संस्थानों को बंद करने के साथ-साथ, सरकार ने संस्थानों और कार्यालयों को बिजली का अधिक कुशलता से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु दिशा-निर्देश (गाइडलाइन्स) भी जारी किए हैं, जिनमें प्राकृतिक रोशनी (सूरज की रोशनी) का अधिकतम लाभ उठाना और अनावश्यक लाइटिंग एवं बिजली की खपत को कम करना शामिल है।


