जिले के रीगा प्रखंड के कपरौल स्थित प्राथमिक उर्दू विद्यालय में बन रहे शौचालय के निर्माण कार्य में भारी अनियमितता बरते जाने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। इस संबंध में स्थानीय लोगों ने डीएम को आवेदन देकर पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी या किसी वरीय अधिकारी से जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि शौचालय निर्माण कार्य में संवेदक, जिला शिक्षा विभाग तथा विद्यालय के प्रधान शिक्षक की मिलीभगत से सरकारी राशि में गड़बड़ी की जा रही है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है और कार्य मनमाने तरीके से कराया जा रहा है। आवेदन में ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय परिसर में पहले से बने सोखता को तोड़कर उसी के ऊपर शौचालय का निर्माण किया जा रहा है। इतना ही नहीं, शौचालय का एक पिलर सोखता के गड्ढे के ऊपर खड़ा किया गया है, जिससे भविष्य में इसके धंसने और किसी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि सोखता तोड़ने के बाद उसमें से निकली पुरानी ईंटों का इस्तेमाल नए निर्माण में किया जा रहा है। इसके अलावा शौचालय के लिए नई टंकी का निर्माण नहीं कराया गया है और पुराने टंकी से ही कनेक्शन जोड़ने की बात कही जा रही है। निर्माण कार्य में सीमेंट, बालू और गिट्टी के मिश्रण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों ने डीएम से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उसे काली सूची में डाला जाए। जिले के रीगा प्रखंड के कपरौल स्थित प्राथमिक उर्दू विद्यालय में बन रहे शौचालय के निर्माण कार्य में भारी अनियमितता बरते जाने का आरोप ग्रामीणों ने लगाया है। इस संबंध में स्थानीय लोगों ने डीएम को आवेदन देकर पूरे मामले की स्वतंत्र एजेंसी या किसी वरीय अधिकारी से जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का आरोप है कि शौचालय निर्माण कार्य में संवेदक, जिला शिक्षा विभाग तथा विद्यालय के प्रधान शिक्षक की मिलीभगत से सरकारी राशि में गड़बड़ी की जा रही है। उनका कहना है कि निर्माण कार्य में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है और कार्य मनमाने तरीके से कराया जा रहा है। आवेदन में ग्रामीणों ने बताया कि विद्यालय परिसर में पहले से बने सोखता को तोड़कर उसी के ऊपर शौचालय का निर्माण किया जा रहा है। इतना ही नहीं, शौचालय का एक पिलर सोखता के गड्ढे के ऊपर खड़ा किया गया है, जिससे भविष्य में इसके धंसने और किसी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि सोखता तोड़ने के बाद उसमें से निकली पुरानी ईंटों का इस्तेमाल नए निर्माण में किया जा रहा है। इसके अलावा शौचालय के लिए नई टंकी का निर्माण नहीं कराया गया है और पुराने टंकी से ही कनेक्शन जोड़ने की बात कही जा रही है। निर्माण कार्य में सीमेंट, बालू और गिट्टी के मिश्रण को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। ग्रामीणों ने डीएम से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर संबंधित एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उसे काली सूची में डाला जाए।


