Israel-Iran Conflict : मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच इजरायल ने एक और दुस्साहसी कदम उठाते हुए ईरान के इस्लामिक रिवोल्युशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रमुख सैन्य विश्वविद्यालय (Military University) पर हवाई हमला किया है। यह हमला रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह सीधे तौर पर ईरान के सैन्य प्रशिक्षण और कमान ढांचे (Command Structure) को चोट पहुँचाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस जवाबी कार्रवाई (Retaliatory Action) के बाद क्षेत्र में पूर्ण युद्ध (Full Scale War) की स्थिति बन सकती है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय (International Community) अब ईरान की प्रतिक्रिया और तेल अवीव की अगली रणनीति (Strategy) पर नजर गड़ाए हुए है।
लक्ष्य पर सटीक वार (Targeted Strike)
इजरायली वायुसेना ने सोमवार शाम को यह ऑपरेशन चलाया। रिपोर्टों के अनुसार, तेहरान के बाहरी इलाके में स्थित इस विश्वविद्यालय का उपयोग IRGC के भविष्य के अधिकारियों को आधुनिक युद्ध और खुफिया अभियानों का प्रशिक्षण देने के लिए किया जाता था। इजरायल का दावा है कि इस केंद्र का उपयोग क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने की योजनाओं के लिए किया जा रहा था। हमले के बाद परिसर से धुएं के काले गुबार उठते देखे गए, जिससे भारी क्षति का अनुमान लगाया जा रहा है।
ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया (Iran’s Reaction)
ईरानी विदेश मंत्रालय ने इस हमले की कड़ी निंदा की है। तेहरान ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए ‘उचित समय और स्थान’ पर बदला लेने की बात कही है। ईरान के सैन्य अधिकारियों ने बयान जारी कर कहा है कि इजरायल ने “लाल रेखा” पार कर दी है और उसे इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। ईरानी मीडिया इस हमले को अपनी सुरक्षा व्यवस्था में सेंध के तौर पर भी देख रहा है।
मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव (Rising Regional Tension)
यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब हमास और हिजबुल्लाह के साथ इजरायल का संघर्ष पहले से ही चरम पर है। इस सीधे हमले ने अब छद्म युद्ध (Proxy War) को सीधे टकराव में बदल दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि इजरायल अब सीधे तौर पर ईरान की सैन्य शक्ति के स्रोतों को नष्ट करने की नीति अपना रहा है ताकि वह अपने सहयोगियों के माध्यम से इजरायल पर दबाव न बना सके।
वैश्विक चिंताएं और भविष्य (Global Concerns)
अमेरिका और यूरोपीय संघ ने शांति की अपील की है, हालांकि इजरायल ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा। ऊर्जा विशेषज्ञों को डर है कि यदि तनाव और बढ़ा तो तेल की कीमतों में वैश्विक उछाल आ सकता है और स्वेज नहर जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग प्रभावित हो सकते हैं।इस हमले के बाद वैश्विक शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई और कच्चे तेल की कीमतों में 3% की वृद्धि दर्ज की गई। संयुक्त राष्ट्र ने दोनों देशों से संयम बरतने का आग्रह किया है।
इजरायल ने सीमा पर हाई अलर्ट जारी कर दिया
इजरायल ने अपनी उत्तरी सीमा पर हाई अलर्ट जारी कर दिया है और आयरन डोम (Iron Dome) प्रणाली को पूरी तरह सक्रिय रखा है, क्योंकि हिजबुल्लाह की ओर से रॉकेट हमलों की आशंका बढ़ गई है। हमले के पीछे इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद की सटीक जानकारी बताई जा रही है, जिसने विश्वविद्यालय के भीतर चल रही गुप्त गतिविधियों की शिनाख्त की थी। ( इनपुट: ANI)


