Middle East: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे महायुद्ध में अब एक नया और सबसे बड़ा सस्पेंस खड़ा हो गया है। पूरी दुनिया की नज़रें इस बात पर टिकी हैं कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई (Mujtaba Khamenei) आखिर किस हाल में हैं? क्या वो सच में कोमा में जा चुके हैं या फिर अमेरिका को चकमा देकर अपनी अगली चाल चल रहे हैं? दोनों तरफ से दावों की झड़ी लगी है और इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान की सत्ता पलटने का खुला ऐलान कर दिया है।
ईरान का दावा: “शेर अभी ज़िंदा है और बदला लेगा” (Iran US War)
ईरानी मीडिया और वहां के बड़े अधिकारियों ने पश्चिमी देशों की उन सभी खबरों को झूठा बताया है जिनमें कहा जा रहा था कि मुजतबा बुरी तरह घायल हैं। ईरान का साफ कहना है कि हाल के हमलों में उनके सुप्रीम लीडर को बस हल्की खरोंचें आई हैं। इतना ही नहीं, मुजतबा की तरफ से यह संदेश भी जारी किया गया है कि ईरान अपने एक-एक शहीद का बदला लेगा। यह बयान दिखाता है कि ईरान किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं है।
अमेरिका का पलटवार: “चेहरा बिगड़ चुका है, शायद कोमा में हैं मुजतबा”
दूसरी तरफ, पेंटागन और अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट ईरान के दावों की धज्जियां उड़ा रही है। अमेरिकी खुफिया सूत्रों का मानना है कि बमबारी में मुजतबा खामेनेई बहुत बुरी तरह झुलस गए हैं। उनका चेहरा खराब हो चुका है और इस बात की पूरी संभावना है कि वो कोमा में हैं। अमेरिका अपने दावे को सच साबित करने के लिए यह दलील दे रहा है कि अगर मुजतबा ठीक हैं, तो सुप्रीम लीडर बनने के बाद से वो दुनिया के सामने क्यों नहीं आए?
ट्रंप की चेतावनी: “हम धीरे-धीरे सत्ता बदल देंगे” (Regime Change Iran)
इस पूरे विवाद के बीच डोनाल्ड ट्रंप का बयान आग में घी डालने का काम कर रहा है। ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि मुजतबा ज़िंदा तो हैं, लेकिन मानसिक और शारीरिक रूप से टूट चुके हैं। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिका का असली मकसद ईरान में तख्तापलट (Regime Change) करना है, लेकिन वो यह काम रातों-रात नहीं, बल्कि धीरे-धीरे करेंगे। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी हमलों ने ईरान की सैन्य ताकत की कमर तोड़ दी है, जिससे अब सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों के मन से ईरान का खौफ खत्म हो गया है।
यह असली लड़ाई के साथ-साथ एक ‘माइंड गेम (Middle East tension)
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह असली लड़ाई के साथ-साथ एक ‘माइंड गेम’ (मनोवैज्ञानिक युद्ध) भी है। अमेरिका ईरान के सैनिकों का मनोबल गिराना चाहता है, जबकि ईरान यह दिखाना चाहता है कि उसका नेतृत्व पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत है।अब पूरी दुनिया की निगाहें ईरान के अगले कदम पर हैं। अगर मुजतबा खामेनेई सच में ठीक हैं, तो ईरान को जल्द ही उनका कोई वीडियो या लाइव संबोधन जारी करना होगा, वरना पश्चिमी मीडिया के दावों पर दुनिया का भरोसा पक्का हो जाएगा। इस पूरी जंग का एक साइड एंगल यह भी है कि मिडिल ईस्ट के अरब देश (जैसे सऊदी और यूएई) इस लड़ाई को खामोशी से देख रहे हैं। ट्रंप के दावों के मुताबिक, ये देश अंदर ही अंदर खुश हैं कि ईरान की सैन्य और नौसैनिक ताकत कमज़ोर हो रही है, जिससे इस इलाके में शक्ति का संतुलन बदल सकता है।
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