Iran-Israel-America war: मध्य पूर्व से एक बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। खास बात ये है कि यह दावा दुबई में अमेरिकी ठिकानों पर हमले को लेकर किया गया है, जिसे लेकर अब दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी तसनीम के मुताबिक, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने दुबई में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। दावा किया गया कि इन ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल के जरिए सटीक हमले किए गए। ईरान का कहना है कि इन जगहों पर सैकड़ों अमेरिकी सैनिक मौजूद थे और हमले में बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं। तसनीम की रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि हमलों के बाद एंबुलेंस घंटों तक मौके पर आती-जाती रहीं और घायल व मृत सैनिकों को अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हो पाई है।
अमेरिका ने बताया फेक
दूसरी तरफ, यूएस सेंट्रल कमांड ने इन सभी दावों को पूरी तरह गलत बताया है। उनका साफ कहना है कि ऐसा कोई हमला नहीं हुआ और ईरान झूठी जानकारी फैला रहा है। इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने खाड़ी देशों को भी चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि अगर ये देश अपनी सुरक्षा और विकास चाहते हैं, तो उन्हें अमेरिका और इजरायल को अपनी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं करने देना चाहिए। पेजेशकियान ने यह भी दोहराया कि ईरान खुद से हमला शुरू नहीं करता, लेकिन अगर उसके बुनियादी ढांचे या आर्थिक ठिकानों पर वार हुआ, तो जवाब बहुत कड़ा होगा। उनके बयान से साफ है कि क्षेत्र में तनाव कम होने के बजाय और बढ़ सकता है।
मध्य पूर्व में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने पर विचार
उधर खबरें ये भी हैं कि अमेरिका मध्य पूर्व में अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने पर विचार कर रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, 82वीं एयरबोर्न डिविजन की तैनाती की तैयारी चल रही है। साथ ही, ईरान के खार्ग द्वीप को लेकर संभावित सैन्य कार्रवाई पर भी चर्चा हो रही है। इन सबके बीच, ईरान भी सतर्क हो गया है। बताया जा रहा है कि उसने संभावित हमलों को ध्यान में रखते हुए अपनी रक्षा तैयारियां तेज कर दी हैं, जिसमें समुद्री इलाकों में माइन्स बिछाने और अतिरिक्त सैनिक तैनात करने जैसे कदम शामिल हैं।


