ट्रंप नहीं इस अमेरिकी नेता से बात करना चाहता है ईरान! पाकिस्तान में हो सकती है अहम बैठक

ट्रंप नहीं इस अमेरिकी नेता से बात करना चाहता है ईरान! पाकिस्तान में हो सकती है अहम बैठक

Iran-US Tensions: ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच कूटनीतिक हल की कोशिशें तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके लिए ईरान अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप या उनके करीबी सहयोगियों से बातचीत के लिए तैयार नहीं है। दरअसल, ईरान ने उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को बातचीत के लिए प्राथमिकता दी है। 

सीएनएन ने इस मामले से परिचित क्षेत्रीय सूत्रों के हवाले से बताया कि यह संदेश गुप्त संचार के माध्यम से वाशिंगटन तक पहुंचाया गया था। वहीं ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ या जेरेड कुशनर के नेतृत्व में बातचीत सफल होने की संभावना नहीं है। 

वेंस को लेकर ईरान का रुख

रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान को लगता है कि जेडी वेंस युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक रास्ते अपनाने के ज्यादा इच्छुक हो सकते हैं। हालांकि, विश्लेषकों का हवाला है कि किसी भी समझौते तक कायम बेहद जटिल और राजनीतिक रूप से संवेदनशील होगा।

इसके बावजूद, ईरान ने यह भी स्वीकार किया है कि बातचीत के दौरान अमेरिका की तरफ से प्रतिनिधित्व कौन करेगा, इसका अंतिम फैसला डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने भी साफ किया है कि वार्ता टीम का चयन राष्ट्रपति के अधिकार में है।

पाकिस्तान में बातचीत की संभावना

रिपोर्ट्स में बताया गया कि पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत हो सकती है। हालांकि, लगातार जारी संघर्ष और गहरे अविश्वास के कारण इस मीटिंग पर संशय बना हुआ है।

बताया जा रहा है कि पाकिस्तान के अलावा तुर्की, मिस्र और ओमान जैसे देश मध्य की भूमिका निभा रहे हैं और दोनों पक्षों के बीच संदेश पहुंचा रहे हैं।

ट्रंप ने क्या कहा?

US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हम अभी बातचीत कर रहे हैं। दूसरी तरफ से डील करना चाहेंगे। उनके सारे एंटी-एयरक्राफ्ट और ज़्यादातर मिसाइलें चली गई हैं। आज हमें एक बहुत बड़े इलेक्ट्रिक जेनरेशन प्लांट को मार गिराने का मौका मिलने वाला था, जो दुनिया के सबसे बड़े प्लांट्स में से एक है। हमने इसलिए टाल दिया क्योंकि हम बातचीत कर रहे हैं।

ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान से यह आश्वासन चाहता है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और संभावित समझौते के ढांचे के तहत कुछ मांगें रखी हैं।

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