Iran US War Update: ईरान के 100 साल पुराने मेडिकल रिसर्च सेंटर पर हमला, इमारत तबाह, WHO से की गई कार्रवाई की मांग

Iran US War Update: ईरान के 100 साल पुराने मेडिकल रिसर्च सेंटर पर हमला, इमारत तबाह, WHO से की गई कार्रवाई की मांग

Iran US War Latest News: ईरान की राजधानी तेहरान में स्थित एक ऐतिहासिक मेडिकल रिसर्च संस्थान पर हमले का मामला सामने आया है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने दावा किया है कि 100 साल पुराने पाश्चर इंस्टीट्यूट ऑफ ईरा पर हमला किया गया, जिससे इमारत को भारी नुकसान पहुंचा है।

स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों में संस्थान के कई हिस्से मलबे में तब्दील दिखाई दे रहे हैं। मंत्रालय का कहना है कि यह हमला न केवल ईरान बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है।

ईरान ने इसे बताया वैश्विक स्वास्थ्य पर सीधा हमला

स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता हुसैन केरमनपोर ने इस हमले को ‘वैश्विक स्वास्थ्य व्यवस्था पर सीधा हमला’ बताया है। उन्होंने कहा कि यह संस्थान एक सदी से अधिक समय से मेडिकल रिसर्च और दवा विकास में अहम भूमिका निभा रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस घटना पर ध्यान देने की अपील करते हुए कहा कि इस तरह के हमले अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून (IHL) और जिनेवा कन्वेंशन के सिद्धांतों का उल्लंघन हैं।

WHO और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अपील

ईरान ने World Health Organization (WHO), इंटरनेशनल कमेटी ऑफ द रेड क्रॉस (ICRC) और अन्य वैश्विक स्वास्थ्य संगठनों से इस हमले की निंदा करने की मांग की है। साथ ही, नुकसान का आकलन करने और संस्थान के पुनर्निर्माण में मदद देने की अपील भी की गई है।

1920 में बना था पाश्चर इंस्टीट्यूट ऑफ ईरान

पाश्चर इंस्टीट्यूट ऑफ ईरान की स्थापना 1920 में हुई थी और यह देश के प्रमुख मेडिकल रिसर्च संस्थानों में से एक रहा है। यह संस्थान वैक्सीन और दवाओं के विकास में लंबे समय से महत्वपूर्ण योगदान देता रहा है।

जारी संघर्ष के बीच बढ़ता नुकसान

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब क्षेत्र में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। हालिया संघर्ष में कई सैन्य और नागरिक ठिकानों को नुकसान पहुंचा है और बड़ी संख्या में लोगों की जान भी गई है। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए क्षेत्र में कई ठिकानों को निशाना बनाया है, जिससे स्थिति और तनावपूर्ण हो गई है।

अब नजर इस बात पर है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती हैं और क्षेत्र में जारी संघर्ष किस दिशा में आगे बढ़ता है।

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