Iran Ultimatum: मिडिल ईस्ट में तनाव (Middle East Crisis) अब अपने सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने 27 अमेरिकी ठिकानों पर हमला करते हुए अमेरिका और इजराइल को एक बेहद सख्त और ‘फाइनल अल्टीमेटम’ दिया है। ईरान ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका और इजराइल (Israel-Iran Conflict) अपनी सैन्य कार्रवाइयों से तुरंत पीछे नहीं हटते हैं, तो इसका परिणाम एक विनाशकारी ‘कैमिकल वॉर‘ (Chemical War) के रूप में सामने आ सकता है (Iran Ultimatum)। आसान शब्दों में कहें तो, ईरान ने साफ कर दिया है कि उसके सब्र का बांध अब टूट चुका है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान की तरफ से यह संदेश दिया गया है कि अगर इजराइल अपने आक्रामक रुख पर अड़ा रहता है और अमेरिका उसे ढाल बन कर समर्थन देना जारी रखता है, तो ईरान (US Iran Tension) अपनी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है, जिसमें रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल भी शामिल है। यह चेतावनी पूरी दुनिया के लिए एक खतरे की घंटी है, क्योंकि एक ‘कैमिकल वॉर’ का मतलब है बड़े पैमाने पर तबाही, पर्यावरण का नुकसान और लाखों निर्दोष लोगों की जान पर सीधा खतरा। भारतीय मीडिया इस घटनाक्रम को तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत की आशंका के तौर पर कवर कर रहा है।
अमेरिका और इजराइल का रुख
ईरान की इस खुली धमकी के बाद अमेरिका ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि वे अपने सहयोगियों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं और किसी भी रासायनिक हमले का अभूतपूर्व सैन्य ताकत के साथ जवाब दिया जाएगा। वहीं, इजराइल ने अपनी सीमाओं पर सुरक्षा व्यवस्था और एयर डिफेंस सिस्टम (जैसे आयरन डोम और एरो सिस्टम) को हाई अलर्ट पर कर दिया है। उधर संयुक्त राष्ट्र (UN) और यूरोपीय संघ ने इस बयान पर गहरी चिंता जताई है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय का मानना है कि रासायनिक हथियारों की बात करना ही अंतरराष्ट्रीय कानूनों का सीधा उल्लंघन है। सभी देशों से तुरंत शांति वार्ता की मेज पर आने की अपील की जा रही है।
आपातकालीन बैठकें बुलाने की संभावना
इस तनावपूर्ण स्थिति और युद्ध के मंडराते बादलों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की आपातकालीन बैठक बुलाई जा सकती है, जिसमें ईरान पर कड़े प्रतिबंध लगाने पर चर्चा हो सकती है।
अर्थव्यवस्था पर सीधा प्रहार
इस सैन्य तनाव का सबसे बड़ा और तुरंत दिखने वाला असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। युद्ध और खासतौर पर ‘कैमिकल वॉर’ की आहट से कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में रातों-रात भारी उछाल देखने को मिल सकता है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल मिडिल ईस्ट से आयात करता है, इसलिए तेल के दाम बढ़ने से भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है, जिससे सीधे तौर पर महंगाई बढ़ेगी। इसके अलावा, अनिश्चितता के माहौल के कारण शेयर बाजार (Stock Market) में भी निवेशकों का डर बढ़ गया है, जिससे भारी गिरावट की आशंका बनी हुई है।


