Donald Trump China Trip Delayed: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने महीनों से नियोजित चीन की राजनयिक यात्रा को स्थगित कर दिया है। यह फैसला ईरान के साथ चल रहे युद्ध के कारण लिया गया है, जहां अमेरिका अपनी सेना और रणनीति पर पूरा ध्यान केंद्रित करना चाहता है। मूल रूप से मार्च के अंत में होने वाली यह यात्रा अब पांच या छह सप्ताह बाद, यानी अप्रैल के मध्य में होगी।
ट्रंप ने अचानक रद्द की चीनी यात्रा
ट्रंप ने मंगलवार को ओवल ऑफिस में आयरिश प्रधानमंत्री माइकल मार्टिन से मुलाकात के दौरान पत्रकारों से कहा, ‘मैं चीन जाना चाहता हूं, लेकिन युद्ध के कारण मुझे यहां रहना होगा। इसलिए हमने यात्रा को एक महीने या उससे थोड़ा अधिक टालने का अनुरोध किया है।’ उन्होंने बताया कि चीन इस प्रस्ताव से सहमत है और दोनों देश संपर्क में बने हुए हैं।
ईरान की वजह से टला बीजिंग दौरा
यह निर्णय तब आया जब ट्रंप ने बीजिंग सहित अन्य वैश्विक शक्तियों पर दबाव डाला था कि वे हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा के लिए सैन्य गठबंधन में शामिल हों। यह जलमार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जहां ईरान के साथ संघर्ष के कारण तनाव चरम पर है। ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में कहा था कि चीन मध्य पूर्वी तेल पर 90% निर्भर है, जबकि अमेरिका की निर्भरता न्यूनतम है। उन्होंने चीन से पूछा था कि क्या वे जलडमरूमध्य को सुरक्षित करने में मदद करेंगे, अन्यथा यात्रा में देरी हो सकती है।
चीन ने नजरअंदाज किया ट्रंप का हॉर्मुज अनुरोध
हालांकि, चीन ने ट्रंप के हॉर्मुज अनुरोध को नजरअंदाज कर दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि बीजिंग इस देरी से राहत महसूस कर रहा है, क्योंकि अमेरिका मध्य पूर्व में फंस रहा है और यह उसकी असीमित शक्ति की छवि को चुनौती दे रहा है। एक विशेषज्ञ ने कहा, ट्रंप की ईरान नीति ने अमेरिका को ऐसी स्थिति में डाल दिया है जहां अब वह अपने प्रतिद्वंद्वी चीन से मदद मांग रहा है।
अमेरिका-चीन के बीच कई मुद्दों पर होगी चर्चा
यात्रा मूल रूप से अमेरिका-चीन संबंधों को मजबूत करने, व्यापार, ताइवान और अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए थी। ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हाल ही में फोन पर बातचीत हुई थी, जिसमें ईरान स्थिति पर भी चर्चा हुई, लेकिन यात्रा का जिक्र चीनी बयान में नहीं था। ट्रंप ने जोर दिया कि यह देरी युद्ध की वजह से है, न कि किसी असहमति से। व्हाइट हाउस के अधिकारियों ने भी पुष्टि की कि राष्ट्रपति ईरान संकट पर फोकस करना चाहते हैं, जहां अमेरिका और इजरायल ने ईरानी संस्थाओं और उद्योगों पर हमले तेज कर दिए हैं।


