US-Israel-Iran War: अमेरिका और इजरायल के साथ ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने पूरे मध्य पूर्व को हिला दिया है। युद्ध शुरू हुए एक महीना बीत चुका है, लेकिन अभी भी थमने के आसार नहीं हैं। ईरान को इस जंग में सबसे भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि अमेरिका अपनी जमीन पर युद्ध नहीं लड़ रहा, इसलिए उसके नुकसान अपेक्षाकृत कम हैं। प्रेस टीवी और अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के सुरक्षाकर्मी, बुनियादी ढांचा, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।
जंग में 4700 जवान शहीद
सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा सुरक्षाकर्मियों का है। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका-इजरायल के हमलों में अब तक 4700 से अधिक ईरानी सुरक्षाकर्मी (आईआरजीसी, बसीज और पुलिस) शहीद हो चुके हैं, जबकि 20,880 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इनमें कई उच्चस्तरीय कमांडर भी शामिल हैं, जिससे ईरानी सैन्य कमान का मनोबल बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
760 स्कूल जमींदोज, 90,063 घर क्षतिग्रस्त
नागरिक जीवन पर भी कहर बरपा है। पूरे ईरान में, खासकर तेहरान में, 90,063 घर क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। शिक्षा व्यवस्था को भारी झटका लगा है-760 स्कूल पूरी तरह जमींदोज हो गए हैं। स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति और बदतर है। 307 अस्पताल और मेडिकल फैसिलिटीज को नुकसान पहुंचा है, जिनमें से कई पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं। मिसाइल हमलों में हजारों आम नागरिक मारे गए हैं, जबकि 20,880 से अधिक लोग भारी घायल हुए हैं।
परमाणु कार्यक्रम के केंद्रों को बनाया निशाना
युद्ध के पहले हफ्ते में ही अमेरिका ने तेहरान समेत कई अहम ठिकानों पर हमले किए। ईरान के परमाणु कार्यक्रम के केंद्रों को भी निशाना बनाया गया, जिससे ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षा को बड़ा झटका लगा। हथियारों के भंडार में भी भारी कमी आई है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई में क्लस्टर बमों का इस्तेमाल किया, लेकिन अब उनकी संख्या भी काफी घट गई है। कई बड़े सैन्य लीडर युद्ध में खो चुके हैं।
करोड़ों डॉलर का नुकसान का अनुमान
आर्थिक नुकसान का आंकड़ा अभी पूरी तरह सामने नहीं आया है, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि करोड़ों डॉलर का नुकसान हुआ है। युद्ध की वजह से लाखों लोगों की नौकरियां जा सकती हैं, जिससे ईरानी अर्थव्यवस्था पहले से कमजोर हालत में और बर्बादी की कगार पर पहुंच सकती है।
ट्रंप की ईरान को नई धमकी
अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा, ‘सैन्य रूप से ईरान तबाह हो गया है। वे इस बारे में कुछ भी नहीं कर सकते। अमेरिकी स्ट्राइक्स से ईरानी कमांडर्स का मनोबल टूट रहा है। अगर ईरान समझदार है तो डील कर ले, वरना अमेरिका और भी घातक हमले करेगा। राष्ट्रपति ट्रंप दिखावा नहीं करते और अपनी बात से पीछे नहीं हटते। ईरान के नए शासन को यह बात समझ आ जानी चाहिए।’
संघर्ष से खाड़ी के देश भी परेशान
ईरान की ओर से अब तक कई जवाबी हमले हुए हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय तक युद्ध जारी रखना ईरान के लिए बेहद मुश्किल होगा। खाड़ी देश भी इस संघर्ष से परेशान हैं। यह युद्ध फरवरी के अंत में शुरू हुआ था और तेजी से बढ़ा। दोनों पक्षों के बीच अब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो सका है। ईरान के लिए यह जंग न सिर्फ सैन्य, बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से विनाशकारी साबित हो रही है।


