Iran-Israel War: हमले से पहले PM मोदी को इजरायल बुलाने का क्या था नेतन्याहू का मकसद?

Iran-Israel War: हमले से पहले PM मोदी को इजरायल बुलाने का क्या था नेतन्याहू का मकसद?

ईरान पर अमेरिकी और इजरायली हमले बढ़ते जा रहे हैं। ईरान भी मध्य एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइलों से हमला कर रहा है। दुबई, दोहा में ईरान ने मिसाइल से अटैक किया है। एक रिपोर्ट से पता चला है कि अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले करने का प्लान एक हफ्ते पहले का था, लेकिन ऑपरेशन और इंटेलिजेंस की वजहों से इसमें देरी हुई। अब यहीं से सोशल मीडिया पर इस तरह की चर्चा है कि क्या इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा पीएम मोदी को इजरायल बुलाना, किसी तरह का कवर था। जो हमले से पहले ईरान को अंधेरे में रखने के लिए तैयार किया गया था।

इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार सुहासिनी हैदर ने लिखा कि अगर इजरायली पीएम नेतन्याहू ने पीएम मोदी को न्योता इसलिए दिया था तो यह राजनयिक नियमों का बड़ा उल्लंघन है, क्योंकि उसने हमलों की योजना बनाई थी और इस दौरे का इस्तेमाल कवर के तौर पर किया था, जबकि अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले के लिए ऑपरेशनल इंटेल डिटेल्स को फाइनल किया। बता दें कि पीएम मोदी 25 व 26 फरवरी को इजरायल के दौरे पर गए थे।

पर्दे के पीछे चल रहा था कोई और ही खेल

एक्सिओस.कॉम वेबसाइट ने अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों के हवाले से रिपोर्ट किया है कि हमले में देरी की वजह खुफिया जानकारियों को इकट्ठा करना और सामंजस्य बैठाना था। रिपोर्ट में कहा कि इस देरी के चलते अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को डिप्लोमेसी और जंग में से किसी एक को चुनने के लिए एक और हफ्ता मिल गया। इस पर वह दो महीने से चल रहे थे। रिपोर्ट में इस बात का जिक्र है कि जिनेवा में हुए आखिरी राउंड की बातचीत से ईरान को डील करने का एक आखिरी मौका मिला था। लेकिन, पर्दे के पीछे कुछ और ही चल रहा था। दरअसल, 17 Feb को U.S-ईरान बातचीत का दूसरा राउंड बिना किसी खास प्रोग्रेस के खत्म होने के बाद अमेरिका और इजरायल ने मिलिट्री प्लानर चार दिन बाद यानि 21 फरवरी को तय किया था, लेकिन हमले को मंजूरी नहीं मिली।

क्या हमले में देरी की वजह मौसम खराब थी

U.S. और इजरायली अधिकारियों ने कहा कि एक मुख्य कारण इलाके में खराब मौसम था। जबकि एक दूसरे इजरायली अधिकारी ने कहा कि देरी मुख्य रूप से U.S. की तरफ से हुई और यह इजरायल डिफेंस फोर्सेज के साथ बेहतर कोऑर्डिनेशन की जरूरत से जुड़ी थी। ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के एक और अधिकारी ने कहा कि पिछले दो हफ़्ते बहुत उतार-चढ़ाव वाले रहे हैं।

अधिकारी ने कहा कि कुछ लोग कहते हैं कि यह चांद या मौसम या किसी और चीज़ के बारे में था। लेकिन यह बकवास है। उन्होंने माना कि मौसम की बात थी। इसमें कोई शक नहीं है। उन्होंने कहा कि मौसम का मामला तो सबसे अधिक इजरायलियों के दिमाग में था।

दो मीटिंग्स को टारगेट करने का था प्लान

एक सीनियर इज़राइली अधिकारी के मुताबिक, शुरुआती हमला ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई और उनके बेटों के साथ-साथ सीनियर ईरानी अधिकारियों की कई मीटिंग्स को निशाना बनाने के लिए किया गया था। जिसमें हर शनिवार को होने वाली एक रेगुलर मीटिंग भी शामिल थी। U.S. में इजरायली एम्बेसडर येचिएल लीटर ने दावा किया कि दो अलग-अलग मीटिंग्स को टारगेट किया गया था, दोनों ही ईरान में चल रही विरोध की लहर पर संभावित जवाबों पर फोकस थीं।

अमेरिकी-इजरायली अधिकारियों का किस बात का डर था

ओरिजिनल और अपडेटेड स्ट्राइक डेट्स के बीच के हफ्ते में इजरायली और U.S. इंटेलिजेंस अधिकारी इस बात से बहुत चिंतित थे कि अगर हमले में देरी हुई तो खामेनेई अपने घर से एक अंडरग्राउंड बंकर में चले जाएंगे। उन्होंने कहा कि जिन दूसरी मीटिंग्स को टारगेट किया गया था, उनके भी जमीन के ऊपर होने की उम्मीद थी।

ट्रंप एडमिनिस्ट्रेशन के एक सीनियर अधिकारी ने एक्सियोस को बताया कि यह हैरानी की बात है कि खामेनेई जमीन के नीचे नहीं छिपा था, लेकिन उन्होंने कहा कि अगर वह जमीन के ऊपर भी होता, तो हम उसे पकड़ लेते। एक इजरायली अधिकारी ने कहा कि जिनेवा बातचीत का मकसद नई स्ट्राइक डेट तक समय देना था। ताकि ईरानियों को यह यकीन रहे कि डिप्लोमेसी अभी भी ट्रंप का मुख्य रास्ता है।

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