अमेरिका और इजराइल के ईरान पर संयुक्त सैन्य हमले के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है। हालात को देखते हुए भारत सरकार ने शनिवार को ईरान और इजराइल समेत खाड़ी देशों में रह रहे अपने नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी कर घरों में रहने की अपील की है। ईरान, इजराइल समेत यूएई, सऊदी अरब, जॉर्डन, बहरीन और फिलिस्तीन में भारतीय दूतावासों ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है। जॉर्डन में भारतीय पर्यटकों को संभावित उड़ान बाधा से पहले देश छोड़ने की भी सलाह दी गई है। जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट एसोसिएशन (JKSA) ने ईरान में पढ़ रहे भारतीय छात्रों की सुरक्षा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेटर लिखा है। दरअसल शनिवार सुबह इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान समेत कई शहरों पर हमला किया। जवाब में ईरान ने करीब 400 मिसाइलें दागकर इजराइल के साथ कुवैत, कतर, बहरीन, सऊदी अरब में अमेरिकी ठिकानों और दुबई को निशाना बनाया। इजराइल में 41 हजार से ज्यादा भारतीय ईरान की राजधानी तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने एडवाइजरी में कहा कि जनवरी तक ईरान में 10 हजार से ज्यादा भारतीय रह रहे थे। इनमें बड़ी संख्या में छात्र शामिल हैं, जो वहां मेडिकल और अन्य कोर्सेस की पढ़ाई कर रहे हैं। वहीं इजराइल में 41 हजार से ज्यादा भारतीय मूल के लोग रहते हैं। दूतावास ने लोगों से अपील की है कि वे अपने नजदीकी सुरक्षित शेल्टर की जानकारी रखें और गैर-जरूरी यात्रा से बचें। किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना जरूरी बताया गया है। सरकार बोली- स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं भारत सरकार ने कहा है कि वह इन देशों में हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और दूतावास स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हैं। जरूरत पड़ने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल भारतीय नागरिकों से घबराने की बजाय सतर्क रहने, केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने और किसी भी आपात स्थिति में संबंधित दूतावास से तुरंत संपर्क करने की अपील की गई है। ईरान और कतर में भारतीयों के लिए एडवाइजरी ईरान और कतर में भारतीय दूतावासों ने क्षेत्रीय हालात के बीच नागरिकों को सतर्क रहने, अनावश्यक यात्रा से बचने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है। ईरान में भारतीयों से घरों के अंदर रहने को कहा गया है, जबकि दोनों देशों में दूतावास सामान्य रूप से कार्यरत हैं और जरूरत पड़ने पर सहायता के लिए 24×7 हेल्पलाइन नंबर जारी किए गए हैं। छात्रों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता JKSA के अनुसार ईरान में बड़ी संख्या में कश्मीरी छात्र MBBS और दूसरे मेडिकल कोर्स कर रहे हैं। 5 मार्च 2026 को ‘उलूमपाया’ और प्री-इंटर्नशिप जैसी अहम राष्ट्रीय परीक्षाएं होने वाली हैं, इसलिए कई छात्र अभी देश नहीं छोड़ पा रहे हैं। JKSA ने कहा कि स्टूडेंट्स को एक तरफ सुरक्षा की चिंता है तो दूसरी तरफ पढ़ाई और भविष्य का सवाल। एसोसिएशन ने विदेश मंत्रालय, तेहरान स्थित भारतीय दूतावास और ईरानी प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित निकासी की व्यवस्था की मांग की है।
ईरान-इजराइल जंग, भारत ने एडवाइजरी जारी की:खाड़ी देशों में भारतीयों से घरों में रहने की अपील; JKSA की कश्मीरी छात्रों को वापस लाने की मांग


