Iran Israel War Impact: ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने केवल अंतरराष्ट्रीय राजनीति को ही नहीं, बल्कि भारत के कई उद्योगों को भी चिंतित कर दिया है। उत्तर प्रदेश के संभल जिले में हैंडीक्राफ्ट उद्योग से जुड़े व्यापारी और कारीगर इस जंग के संभावित आर्थिक असर को लेकर चिंतित नजर आ रहे हैं।
संभल लंबे समय से पीतल और अन्य हस्तशिल्प उत्पादों के लिए जाना जाता है, जहां हजारों परिवार इसी उद्योग पर निर्भर हैं। कारोबारियों का कहना है कि यदि मध्य पूर्व में हालात और बिगड़ते हैं या युद्ध लंबा खिंचता है, तो इसका सीधा असर विदेशी बाजारों में होने वाले निर्यात पर पड़ सकता है। इससे न केवल व्यापारिक गतिविधियां प्रभावित होंगी, बल्कि कारीगरों की आजीविका पर भी संकट खड़ा हो सकता है।
निर्यात बाजार पर संभावित असर को लेकर व्यापारियों की आशंका
संभल हैंडीक्राफ्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष ताहिर सलामी ने बताया कि वर्तमान हालात को देखते हुए उद्योग से जुड़े लोगों में चिंता बढ़ रही है। उनका कहना है कि अगर युद्ध का दायरा बढ़ता है या वैश्विक स्तर पर अस्थिरता बढ़ती है, तो अमेरिका, इजराइल और खाड़ी देशों में होने वाला निर्यात प्रभावित हो सकता है।
अमेरिका भारतीय हैंडीक्राफ्ट उत्पादों के लिए सबसे बड़े बाजारों में से एक माना जाता है, जबकि खाड़ी देशों में भी बड़ी मात्रा में हस्तशिल्प का निर्यात किया जाता है। ताहिर सलामी के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिरता बढ़ने पर विदेशी खरीदार नए ऑर्डर देने से बच सकते हैं या पहले से तय ऑर्डर को होल्ड पर रख सकते हैं। ऐसी स्थिति में निर्यात कारोबार को बड़ा झटका लग सकता है।
दिल्ली हैंडीक्राफ्ट प्रदर्शनी से जुड़ी उम्मीदों पर लगा अनिश्चितता का साया
व्यापारियों का कहना है कि फरवरी माह में दिल्ली में आयोजित हुई बड़ी हैंडीक्राफ्ट प्रदर्शनी से उद्योग को काफी उम्मीदें थीं। इस प्रदर्शनी में दुनियाभर से खरीदार आते हैं और यहीं से अगले कई महीनों के लिए नए ऑर्डर तय होते हैं। संभल के कई व्यापारी भी इस प्रदर्शनी में शामिल हुए थे और उन्हें उम्मीद थी कि विदेशी खरीदारों से बड़े ऑर्डर मिलेंगे।
लेकिन इसी दौरान मध्य पूर्व में युद्ध जैसी स्थिति बनने से कई खरीदारों के फैसले अनिश्चितता में पड़ सकते हैं। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि विदेशी बाजारों में जब भी राजनीतिक या आर्थिक अस्थिरता बढ़ती है, तो सबसे पहले ऑर्डर प्रक्रिया प्रभावित होती है। यही वजह है कि कारोबारी इस समय हालात पर नजर बनाए हुए हैं।
30 हजार कारीगरों की आजीविका पर पड़ सकता है असर
संभल में हैंडीक्राफ्ट उद्योग केवल व्यापार का माध्यम नहीं है, बल्कि हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का आधार भी है। अनुमान के मुताबिक जिले में करीब 30 हजार से अधिक कारीगर सीधे तौर पर इस उद्योग से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा कई छोटे कारोबारी, पैकिंग यूनिट, ट्रांसपोर्ट और अन्य सहायक गतिविधियां भी इसी उद्योग पर निर्भर हैं।
यदि निर्यात में गिरावट आती है या ऑर्डर कम हो जाते हैं, तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। उत्पादन घटने की स्थिति में कई यूनिटों को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ सकता है, जिससे कारीगरों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है।
बढ़ती लागत ने पहले ही उद्योग पर बढ़ाया दबाव
कारोबारियों का कहना है कि हैंडीक्राफ्ट उद्योग पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। बिजली की बढ़ती कीमतें, कच्चे माल के महंगे दाम और परिवहन लागत में वृद्धि ने उत्पादन खर्च को काफी बढ़ा दिया है। ऐसे में अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में मांग घटती है या ऑर्डर रुकते हैं, तो उद्योग के लिए स्थिति और मुश्किल हो सकती है।
कई छोटे कारोबारी पहले से ही सीमित मुनाफे पर काम कर रहे हैं और उन्हें अपने कारोबार को बनाए रखने के लिए लगातार संघर्ष करना पड़ रहा है। उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि वैश्विक तनाव की स्थिति में छोटे उद्योग सबसे पहले प्रभावित होते हैं।
सरकार से राहत की मांग और वैकल्पिक बाजार की चुनौती
ताहिर सलामी ने केंद्र सरकार से अपील की है कि हैंडीक्राफ्ट उद्योग को राहत देने के लिए विशेष कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि अगर बिजली पर विशेष सब्सिडी दी जाए तो उत्पादन लागत को कुछ हद तक कम किया जा सकता है, जिससे उद्योग को राहत मिलेगी। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि नए अंतरराष्ट्रीय बाजार तलाशना आसान काम नहीं होता।
किसी नए देश में खरीदारों तक पहुंचने, भरोसा बनाने और निर्यात प्रक्रिया शुरू करने में कई महीने लग जाते हैं। ऐसे में अगर मौजूदा बाजार प्रभावित होते हैं तो उद्योग को उबरने में काफी समय लग सकता है। यही वजह है कि संभल के कारोबारी फिलहाल वैश्विक हालात पर नजर रखते हुए सरकार से सहयोग की उम्मीद कर रहे हैं।


