ईरान IRGC के खुफिया प्रमुख माजिद खादेमी की मौत, अमेरिका-इजरायल के हमले में गई जान

ईरान IRGC के खुफिया प्रमुख माजिद खादेमी की मौत, अमेरिका-इजरायल के हमले में गई जान

ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव पिछले कुछ महीनों से लगातार बढ़ता जा रहा है। दोनों देशों के बीच हमलों और जवाबी कार्रवाई का सिलसिला अब खुले सैन्य टकराव में बदल चुका है। इसी कड़ी में सोमवार को हुई ताजा एयरस्ट्राइक में ईरान को बड़ा झटका लगा है। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के इंटेल प्रमुख माजिद खदेमी की मौत की पुष्टि की गई है, जिससे देश की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ सकता है।

ईरान ने खदेमी की मौत की पुष्टि की

ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि माजिद खदेमी एक आतंकी हमले में मारे गए, जिसे अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई बताया गया है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि हमला किस स्थान पर हुआ। खदेमी ने हाल ही में मोहम्मद काजमी की जगह ली थी, जिनकी मौत जून में 12 दिन के युद्ध के दौरान हुई थी। आईआरजीसी के अनुसार, खदेमी ने करीब पांच दशकों तक देश की सुरक्षा और खुफिया क्षेत्र में अहम योगदान दिया और उनका अनुभव आने वाले समय में भी मार्गदर्शक माना जाएगा।

तेहरान में कम से कम 25 लोगों की मौत

सोमवार को तेहरान सहित कई इलाकों में जोरदार विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। राजधानी के प्रमुख क्षेत्रों में लो-फ्लाइंग जेट्स देखे गए और कई रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया। रिपोर्ट्स के अनुसार, एक हमले में शरिफ यूनिवर्सिटी के पास भी भारी नुकसान हुआ। इन हमलों में कम से कम 25 लोगों की मौत हुई है। जवाब में ईरान ने इजरायल और उसके सहयोगी देशों पर मिसाइल दागे। इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए होर्मुज स्टेट खोलने की चेतावनी दी है।

पिछले एक महीने में कई बड़े नेताओं की मौत हुई

पिछले एक महीने में हुए हमलों में ईरान के कई बड़े सैन्य और राजनीतिक नेताओं की मौत हो चुकी है। इनमें सुप्रीम लीडर अली खामेनेई, वरिष्ठ नेता अली लारिजानी, और सुरक्षा परिषद प्रमुख शामिल हैं। इसके अलावा बसीज कमांडर गोलामरेजा सुलेमानी और आईआरजीसी प्रवक्ता अली मोहम्मद नैनी भी हमलों में मारे गए। इन घटनाओं ने ईरान के नेतृत्व ढांचे को कमजोर कर दिया है और क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह संघर्ष आने वाले समय में और भी गंभीर रूप ले सकता है।

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