अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे को ईरान ने बताया ‘फर्जी’, ईरानी सरकार का कहना- ट्रंप की यह सोची-समझी चाल

अमेरिकी राष्ट्रपति के दावे को ईरान ने बताया ‘फर्जी’, ईरानी सरकार का कहना- ट्रंप की यह सोची-समझी चाल

Iran Israel War: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि वॉशिंगटन और तेहरान के बीच हाल के दिनों में “बहुत अच्छी और सार्थक बातचीत” हुई है। ईरान की तरफ से साफ कहा गया है कि ऐसी कोई बातचीत हुई ही नहीं। बल्कि, इस तरह की खबरों को “फर्जी” बताते हुए ईरान ने आरोप लगाया कि ये सब तेल और वित्तीय बाजारों को प्रभावित करने की साजिश है। ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागर गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए दो टूक कहा कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं चल रही है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस तरह की खबरें जानबूझकर फैलाई जा रही हैं, ताकि बाजारों में हेरफेर किया जा सके और मौजूदा हालात से ध्यान भटकाया जा सके।

Iran Israel War: ईरानी जनता हमलों का जवाब चाहती है

गालिबाफ ने कड़े शब्दों में कहा कि ईरानी जनता हमलों का जवाब चाहती है और दोषियों को सजा देने की मांग कर रही है। उनके मुताबिक, देश के सभी अधिकारी और आम लोग इस मुद्दे पर एकजुट हैं और सर्वोच्च नेतृत्व के साथ खड़े हैं। दरअसल, ट्रंप ने हाल ही में अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दावा किया था कि अमेरिका और ईरान के बीच “पूर्ण समाधान” की दिशा में बातचीत आगे बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने ईरानी ऊर्जा ढांचे पर सैन्य हमलों को पांच दिनों के लिए रोकने का निर्देश दिया है, ताकि बातचीत को मौका मिल सके।

हालात सुधर सकते हैं- ट्रंप

ट्रंप का कहना था कि अगर ये बातचीत सफल रही, तो हालात सुधर सकते हैं। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ, तो सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू हो सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान शांति के बदले अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं पर समझौता कर सकता है, हालांकि उन्होंने किसी भी अधिकारी का नाम उजागर नहीं किया। वहीं दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय और सरकारी मीडिया ने भी इन दावों को खारिज किया है। उनका कहना है कि यह सब ऊर्जा की कीमतों को नियंत्रित करने और सैन्य रणनीति के लिए समय जुटाने की कोशिश है।

ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भले ही कुछ मध्यस्थों के जरिए संदेश आए हों, लेकिन ईरान ने साफ कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा और जवाबी क्षमता मजबूत किए बिना पीछे नहीं हटेगा। उनका रुख स्पष्ट है, जब तक संतोषजनक स्थिति नहीं बनती, तब तक कोई बातचीत संभव नहीं।

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