ड्राइविंग लाइसेंस (DL) बनाने की प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर वसूली के आरोप सामने आने के बाद परिवहन विभाग में हड़कंप मच गया है। आरोप है कि डीएल बनाने वाले प्राइवेट कर्मचारियों से मुख्तार अंसारी गैंग से जुड़े लोगों द्वारा अवैध वसूली की जा रही थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने 25 जिलों के जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस जांच में विभागीय अधिकारियों की भूमिका भी कटघरे में आ सकती है। वही परिवहन आयुक्त ने आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, मथुरा, अलीगढ़, एटा, हाथरस, कासगंज, बांदा, हमीरपुर, जालौन, चित्रकूट, झांसी, ललितपुर, महोबा, कानपुर नगर, कानपुर देहात, कन्नौज, इटावा, फर्रुखाबाद, औरैया, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़ और कौशांबी के डीएम को जांच के निर्देश दिए हैं। निजी कंपनियों को सौंपा गया है डीएल का काम परिवहन विभाग में ड्राइविंग लाइसेंस बनाने, प्रिंटिंग और डिलीवरी का कार्य निजी एजेंसियों को सौंपा गया है। यह जिम्मेदारी सिल्वर टच, फोकाम नेट लिमिटेड और रोजमार्टा को दी गई है। आगरा और कानपुर जोन के 25 जिलों में डीएल निर्माण का कार्य फोकाम नेट लिमिटेड को सौंपा गया है। कंपनी ने करीब 125 निजी कर्मचारियों की नियुक्ति की है। आरोप है कि कंपनी ने नियुक्ति और कर्मचारियों से वसूली की जिम्मेदारी मुख्तार अंसारी के गुर्गे राशिद फारुकी को सौंपी। यह आरोप भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने लगाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच की मांग की थी। एंटी करप्शन और विजिलेंस भी सक्रिय सूत्रों के मुताबिक, मामले की गंभीरता को देखते हुए एंटी करप्शन और विजिलेंस की टीमें भी सक्रिय हो गई हैं। टीमों ने परिवहन विभाग मुख्यालय का दौरा कर दस्तावेज खंगाले हैं। आगरा और कानपुर जोन के आरटीओ व एआरटीओ कार्यालयों में तैनात निजी कर्मचारियों और अधिकारियों से भी पूछताछ की गई है। सैलरी के नाम पर 13 हजार की वसूली जांच में यह भी सामने आया है कि फोकाम नेट के प्रोजेक्ट मैनेजर तुषार गर्ग, तौकीर और सुभाष गिरि ने कर्मचारियों से पहले महीने की 13 हजार रुपये की तनख्वाह वसूल ली। कर्मचारियों को आश्वासन दिया गया कि यह रकम बाद में वेतन के रूप में लौटा दी जाएगी। इसके अलावा कर्मचारियों से डीएल निर्माण में उपयोग होने वाले कंप्यूटर, वेबकैम, बैटरी और अन्य सिस्टम भी अपने खर्च पर खरीदवाए गए। शिकायत के बाद 15 कर्मचारी बाहर जब कर्मचारियों ने वसूली और अनियमितताओं की शिकायत की तो 15 निजी कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया। इसके बाद इन कर्मचारियों ने कंपनी और प्रोजेक्ट मैनेजरों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। परिवहन आयुक्त का बयान परिवहन आयुक्त किंजल सिंह ने कहा कि डीएल बनाने वाले कर्मचारियों से वसूली और नियुक्ति में आपराधिक तत्वों की संलिप्तता का मामला गंभीर है। 25 जिलों के डीएम को जांच के निर्देश दिए गए हैं। दोषी पाए जाने पर संबंधित कंपनी और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।


