बिहार इंटरमीडिएट (12वीं) परीक्षा 2026 का रिजल्ट सोमवार को जारी कर दिया गया। इस बार 85.19% स्टूडेंट्स एग्जाम में पास हुए हैं। इसमें 84.09% छात्र और 86.23 छात्राएं सफल रही हैं। साइंस में समस्तीपुर के आदित्य प्रकाश ने टॉप किया है। आदित्य को 481 नंबर आए हैं। वहीं कॉमर्स में पटना की अदिति कुमारी ने टॉप किया है। अदिति को 480 नंबर आए है। आर्ट्स में गयाजी की रहने वाली निशु कुमार ने बाजी मारी है। उन्हें 479 नंबर आए हैं। तीनों स्ट्रीम में कुल 26 टॉपर्स में 20 लड़कियां हैं। पूर्णिया के लकी अंसारी आर्ट्स के सेकेंड टॉपर बने हैं। लकी के पिता सड़क किनारे फुटपाथ पर घड़ी की दुकान चलाते हैं। लकी ने मेडिकल स्टोर पर काम कर के अपनी पढ़ाई की। कुछ ऐसी ही कहानी वैशाली की मानवी कुमारी और बगहा की नसरीन परवीन की भी है। मानवी के पिता पंकज कुमार अखबार बेचकर किसी तरह परिवार चलाते हैं। घर की आर्थिक मदद के लिए मानवी खुद ट्यूशन पढ़ाती थीं। वहीं नसरीन परवीन के पिता अब्दुल टेलर का काम करते हैं। पढ़िए टॉपर्स की सक्सेस स्टोरीज… सबसे पहले तीनों स्ट्रीम के टॉपर्स की लिस्ट देखिए… पिछले साल से 1% कम रहा रिजल्ट इस साल 85.19% छात्र पास हुए हैं। साल 2025 में 86.56% छात्र सफल हुए थे। इस बार का रिजल्ट पिछली बार से 1 फीसदी कम रहा। पिछले साल साइंस में पश्चिमी चंपारण की प्रिया जायसवाल ने 484 अंक (96.8 प्रतिशत) के साथ टॉप किया था। आर्ट्स में वैशाली की अंकिता कुमारी और बक्सर के शाकिब शाह ने 473-473 अंक (94.6 प्रतिशत) हासिल किए थे। कॉमर्स वर्ग में वैशाली की रौशनी कुमारी ने 475 अंक (95.1 प्रतिशत) लाकर पहला स्थान पाया था। अब तीनों स्ट्रीम के टॉपर्स से मिलिए साइंस टॉपर आदित्य बोले- सेल्फ स्टडी काम आई साइंस टॉपर आदित्य ने बताया, ‘मैंने घर से ही पढ़ाई की शुरुआत की। इसके बाद सिमुलतला में एडमिशन लिया। मैंने घर पर ही सेल्फ स्टडी की। मैं सबसे पहले राधा रानी का धन्यवाद करना चाहूंगा। मेरा परिवार, टीचर्स सभी ने बहुत साथ दिया। मैं आगे जाकर डॉक्टर बनना चाहता हूं। मेरे पिता सरकारी नौकरी में हैं। मां हाउस वाइफ हैं। एक बहन है वो पढ़ाई करती है। 10वीं में मैं टॉप 10 में नहीं आ पाया था। उस वक्त में बहुत निराश हुआ था। मैंने सोच लिया था इंटर में करना है और हो गया। हमें कर्म पर विश्वास करना चाहिए, उसमें कमी नहीं होनी चाहिए। फल की चिंता भगवान पर छोड़ देनी चाहिए।’ किसान की टॉपर बेटी के भूगोल में 100 में 100 नंबर आर्ट्स में टॉप करने वाली निशु के पिता किसान हैं। उन्हें 479 नंबर मिले हैं। उसने भूगोल में 100 में 100 नंबर लाकर उन्होंने अपनी प्रतिभा की पहचान दी। इसके अलावा अंग्रेजी में 90, हिंदी में 97, इतिहास में 97 और राजनीतिक विज्ञान में 95 अंक हासिल किए हैं। निशु गयाजी जिले के खिजरसराय प्रखंड के लोदीपुर गांव की रहने वाली है। वो घर की बड़ी बेटी हैं और पढ़ाई में शुरू से अच्छी रही हैं। निशु के पिता अमोद कुमार ने कहा, ‘मैट्रिक परीक्षा में निशु स्कूल की सेकेंड टॉपर रही थी। मुझे उम्मीद थी कि वह बिहार के टॉप 10 में जरूर आएगी, लेकिन बेटी ने पूरे राज्य में प्रथम स्थान हासिल कर उम्मीदों से भी बढ़कर प्रदर्शन किया। निशु की मां हाउस वाइफ है। बड़े भाई नीरज कुमार गया कॉलेज से BSC की पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि छोटी बहन सुप्रिया कुमारी अगले साल 2027 में इंटरमीडिएट की परीक्षा देगी। CA बनना चाहती है कॉमर्स टॉपर अदिति कॉमर्स की टॉपर अदिति ने भास्कर से बातचीत में कहा, ‘11 बजे से मैं टेंशन में थी कि क्या रिजल्ट होगा। रिजल्ट के समय घर पर मैं और मां ही थी। फिर मैंने पापा-भैया को इसकी जानकारी दी। मुझे बेहतर रिजल्ट की उम्मीद थी, मुझ से ज्यादा मेरी फैमिली को उम्मीद थी।’ अदिति ने कहा, ‘मैंने बहुत मेहनत की है। 10वीं के एग्जाम के बाद से मैं 11वीं की पढ़ाई में जुट गई थी। दिन में 8 घंटे पढ़ाई करती थी। किसी तरह की कोचिंग नहीं ली है। पढ़ाई में कोई कंफ्यूजन होने पर यूट्यूब या फिर AI का सहारा लेती थी।’ अदिति के पिता ने AI से गाना बनाया था कि ‘अगर उड़ना है तो पंख फैलाना होगा।’ इसे सुनकर वो काफी इन्सपायर्ड होती थी। उसका सपना है कि वो CA बने। उनके पिता की बाकरगंज में स्पेयर पार्ट्स की दुकान है। अब आगे पढ़िए टॉपर्स की सक्सेस स्टोरीज आर्ट्स के सेकेंड टॉपर लकी- दुकान पर काम कर के टॉप किया लकी अंसारी शहर के सहायक खजांची थाना क्षेत्र के वार्ड-27 के रहने वाले हैं। उनकी मां गृहिणी हैं। लकी तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। पांच सदस्यों का पूरा परिवार एक छोटे से कमरे में रहता है। बारिश होने पर छत से पानी टपकता है। लकी बताते हैं, “इंटर की पढ़ाई के दौरान एक समय ऐसा भी आया, जब घर के हालात बेहद खराब हो गए। पिता फुटपाथ पर घड़ी की दुकान चलाते हैं। रोजाना मुश्किल से 400 रुपये की आमदनी होती है। घर की स्थिति संभालने और ट्यूशन फीस जुटाने के लिए मैंने पांच महीने तक मेडिकल स्टोर पर काम किया। जो समय बचता था, उसमें पढ़ाई करता था।” वे आगे कहते हैं, “पढ़ाई के प्रति मेरी लगन देखकर बड़े भैया ने पिताजी से कहकर मुझे मेडिकल स्टोर पर काम करने से मना कर दिया। इसके बाद भैया अतिरिक्त समय तक काम करने लगेफ्रिज, रेफ्रिजरेटर और टीवी जैसी इलेक्ट्रॉनिक चीजें ठीक करते थे और मैं पढ़ाई में पूरी तरह जुट गया। लकी कहते हैं, “मैंने वो दिन भी देखे हैं, जब मानसून में टीन की छत से बारिश का पानी मेरे ऊपर टपकता था। इसके बावजूद मैंने हार नहीं मानी। पूरी मेहनत और लगन से पढ़ाई जारी रखी। जब मैं पढ़ने बैठता था, तो आसपास के बच्चों को खेलते देखकर मन भटकता था। ऐसे समय में घर के खराब हालात याद कर खुद को फिर से पढ़ाई में लगा देता था।” लकी का सपना है, “मैं सरकारी शिक्षक बनना चाहता हूं, ताकि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकूं। इसके बाद UPSC और BPSC की तैयारी कर IAS-IPS बनना मेरा लक्ष्य है।” कॉमर्स की टॉप-4- को पिता ने अखबार बेचकर पढ़ाया कॉमर्स में राज्य में चौथा स्थान हासिल करने वाली मानवी कुमारी के पिता पंकज कुमार पिछले 25 वर्षों से पेपर हॉकर का काम कर रहे हैं। सीमित आय में परिवार का भरण-पोषण करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। मानवी की मां संगीता देवी हाउस वाइफ हैं और उन्होंने भी हर कदम पर बेटी का साथ दिया। परिवार में एक भाई और तीन बहनें हैं। भाई शुभम कुमार (16) भी पढ़ाई कर रहे हैं।उनकी बड़ी बहन मांसी कुमारी (21) और साक्षी कुमारी (12) दोनों दिव्यांग हैं। मानवी ने किसी भी तरह की कोचिंग का सहारा नहीं लिया। उन्होंने रोजाना 6 से 7 घंटे सेल्फ स्टडी कर अपनी तैयारी पूरी की। उनका मानना है कि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो संसाधनों की कमी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनती। मानवी ने कोचिंग में पढ़ाकर खुद पढ़ाई की मानवी ने मैट्रिक की परीक्षा संत माइकल पब्लिक स्कूल, देसरी (CBSE बोर्ड) से पास की थी, जिसमें उन्होंने जिले में छठा स्थान हासिल किया था। तभी से यह स्पष्ट हो गया था कि वह पढ़ाई में काफी मेधावी हैं। इंटर में भी उन्होंने अपने उसी प्रदर्शन को दोहराते हुए शानदार अंक हासिल किए हैं। मानवी बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही अपनी दादी कांति देवी से प्रेरणा मिलती रही है। दादी के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनकी यही प्रेरणा आज उनकी सफलता का आधार बनी है। मानवी का सपना है कि वह आगे चलकर चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बनें और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करें। वह कहती हैं कि यह सफलता उनकी मंजिल नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। आगे भी वह इसी तरह मेहनत कर अपने लक्ष्य को हासिल करना चाहती हैं। पिता ने सिलाई करके पढ़ाया, बेटी आर्ट्स में टॉप- 3 वहीं, बगहा की नसरीन परवीन उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय, बोरवल की छात्रा हैं। परीक्षा में उनका रोल कोड 35161 और रोल नंबर 2603002 रहा। सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करते हुए उन्होंने यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जो अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि नसरीन शुरू से ही पढ़ाई में काफी मेहनती और अनुशासित रही हैं। वह नियमित रूप से पढ़ाई करती थीं और हर विषय को गंभीरता से समझने की कोशिश करती थीं। शिक्षकों का कहना है कि नसरीन की सफलता उनके समर्पण और आत्मविश्वास का परिणाम है। परिजनों के अनुसार नसरीन बचपन से ही मेधावी छात्रा रही हैं। परिवार ने हर कदम पर उनका साथ दिया और पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया। उनकी इस सफलता से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। माता-पिता और रिश्तेदारों ने इसे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताया है। नसरीन परवीन ने बताया, “मेरे पिताजी सिलाई का काम करते हैं। पढ़ाई के दौरान मैं कभी यह नहीं सोचती थी कि मुझे कितने घंटे पढ़ना है। जब भी मन करता, मैं पढ़ने बैठ जाती थी। जब भी आंखें बंद करती थी, तो हमेशा यही सोचती थी कि मुझे अपने पिता के सपनों को पूरा करना है।” नसरीन परवीन आगे भी अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए बड़ा मुकाम हासिल करना चाहती हैं। उनका सपना है कि वे उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने परिवार और समाज का नाम और ऊंचा करें। उनकी इस सफलता से क्षेत्र के अन्य छात्र-छात्राओं को भी प्रेरणा मिलेगी कि मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। साइंड सेकेंड टॉपर- पिता की किराने की दुकान साइंस स्ट्रीम में नवादा की सपना कुमारी ने दूसरा स्थान हासिल किया है। सपना ने कुल 500 अंकों में 479 नंबर प्राप्त कर 95.80 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। सपना आगे चलकर कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहती हैं। सपना ने 2024 की मैट्रिक परीक्षा में भी 483 अंक (96.6%) हासिल किए। सपना के पिता परचून की दुकान चलाते हैं। सपना महिला उच्च माध्यमिक विद्यालय, नवादाडीह की छात्रा हैं। उनके पिता किसानी कर घर चलाते हैं। सपना कुमारी ने बताया कि, पूरे साल मैंने NEET परीक्षा के लिए तैयारी की थी। मेरा मेन फोकस नीट एग्जाम क्लियर करना है। वहीं, 12वीं परीक्षा के नजदीक आते ही मैंने सिर्फ दो महीने ही यूट्यूब से पढ़ाई की थी। मुझे पता था 12वीं का एग्जाम इतना टफ नहीं है, आसानी से क्लियर कर लूंगी। मुझे आगे चलकर डॉक्टर बनना है, इसमें भी कार्डियोलॉजिस्ट। मेरी दीदी-भइया मुझे हमेशा मोटिवेट करते रहते थे। मुझे तो लगता था मैं 400 रैंक ही ला पाऊंगी, लेकिन जब मुझे पता चला मैं बिहार की सेकेंड टॉपर हूं तो बहुत खुशी हुई। सीतामढ़ी में हार्डवेयर दुकान की बेटी बनी आर्ट्स में सेकेंड टॉपर सीतामढ़ी की सिद्धि साक्षी ने इंटरमीडिएट की परीक्षा में आर्ट्स में 478 अंक हासिल कर पूरे बिहार में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। सिद्धि के पिता प्रशांत कुमार पुपरी में एक छोटी हार्डवेयर दुकान चलाते हैं, जबकि मां रचना देवी गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बीच सिद्धि ने अपनी मेहनत और लगन से बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिला के पुपरी प्रखंड स्थित रत्ना लक्ष्मी गांव की सिद्धि साक्षी को CBSE से 10वीं की परीक्षा में 85% अंक मिले थे। सिद्धि बताती हैं कि नियमित पढ़ाई, समय का सही प्रबंधन और आत्मविश्वास उनकी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी रहे। UPSC क्रैक करना चाहती हैं सिद्धि सिद्धि साक्षी आगे उच्च शिक्षा हासिल कर संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा के जरिए देश सेवा करना चाहती हैं। वे अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता के मार्गदर्शन और सहयोग को देती हैं। सिद्धि की सफलता से इलाके में खुशी की लहर है और दूसरे विद्यार्थियों को भी बड़ा सपना देखने की प्रेरणा मिल रही है। एमी ने CBSE छोड़ बिहार बोर्ड से पढ़ाई की वैशाली की एमी सिन्हा की पढ़ाई की शुरुआत किड्स इंटरनेशनल स्कूल, कंचनपुर (बिदुपुर) से हुई, जहां उन्होंने नर्सरी से UKG तक की पढ़ाई की। इसके बाद कक्षा 1 से 3 तक आदित्य टैलेंट स्कूल, हाजीपुर और 4 से 8 तक इंडियन पब्लिक स्कूल, अजमतपुर में पढ़ाई की। उन्होंने 9वीं और 10वीं की पढ़ाई गुरुकुल विद्यापीठ, नवादा से पूरी की और CBSE बोर्ड से मैट्रिक परीक्षा में 96.2 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद उन्होंने एक अहम फैसला लेते हुए CBSE छोड़ बिहार बोर्ड से इंटरमीडिएट करने का फैसला लिया। इंटर की पढ़ाई के लिए उन्होंने संत कबीर महंत राम दयाल दास महाविद्यालय, बिदुपुर बाजार में नामांकन लिया और यहीं से पढ़ाई कर साइंस स्ट्रीम में टॉप कर इतिहास रच दिया। हर क्लास में रही टॉपर, बचपन से ही तेज रही एमी एमी बचपन से ही पढ़ाई में काफी तेज रही हैं। वह अपने हर क्लास में टॉपर रही हैं। उनकी इस निरंतर मेहनत और लगन का ही नतीजा है कि उन्होंने इंटरमीडिएट में भी राज्य स्तर पर अपनी पहचान बनाई। शिक्षकों के अनुसार, एमी न केवल पढ़ाई में अव्वल हैं, बल्कि अनुशासन और समय प्रबंधन में भी अन्य छात्रों के लिए मिसाल हैं। एमी के पिता संजय कुमार सिन्हा पेशे से व्यवसायी हैं और उन्होंने कैमिस्ट्री ऑनर्स से ग्रेजुएशन किया है। वहीं उनकी माता अन्नू प्रिया एक गृहिणी हैं और उन्होंने भी ग्रेजुएशन किया है। माता अन्नू प्रिया घर के कामकाज से समय निकालकर एमी की पढ़ाई में मार्गदर्शन करती थीं। एमी की सफलता में परिवार का अहम योगदान रहा है। एमी के एक भाई और एक बहन हैं। उनके भाई आशीष सिन्हा फिलहाल 9वीं कक्षा के छात्र हैं और आगे CBSE बोर्ड से मैट्रिक परीक्षा देने की तैयारी कर रहे हैं। डॉक्टर बनने का सपना, अभी से कर रही तैयारी एमी फिलहाल मेडिकल की तैयारी कर रही हैं। उनका और उनके परिवार का सपना है कि वह आगे चलकर एक सफल डॉक्टर बनें। छात्रा का कहना है कि उन्होंने अपनी सफलता के लिए नियमित पढ़ाई, सही रणनीति और शिक्षकों के मार्गदर्शन को सबसे ज्यादा महत्व दिया। 35 दिनों के अंदर जारी हुआ रिजल्ट शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सोमवार को बिहार बोर्ड ऑफिस में परिणाम घोषित किया। इस दौरान बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर भी मौजूद रहे। साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स- तीनों संकायों का परिणाम एक साथ जारी किया गया है। इस साल करीब 13 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए थे। परीक्षा 1 फरवरी से 15 फरवरी 2026 के बीच ली गई थी। 35 दिन के अंदर नतीजे जारी किए गए हैं। इसके साथ ही बिहार बोर्ड देश में लगातार 8वीं बार सबसे पहले रिजल्ट जारी करने वाला राज्य बन गया है। पिछले साल 2025 में 86 फीसदी से ज्यादा छात्र सफल रहे थे। तीनों स्ट्रीम में लड़कियों ने टॉप किया था। टॉपर्स को मिलेगा इनाम बिहार बोर्ड पांच टॉपर्स को इनाम देगा। इस बार इनाम की राशि दोगुनी कर दी गई है। प्रथम स्थान पर आने वाले छात्रों को 2 लाख, द्वितीय स्थान पर आने वाले छात्रों को 1.5 लाख और तीसरे स्थान लाने वाले स्टूडेंट्स को 1 लाख रुपए दिए जाएंगे। 8वीं बार देश में सबसे पहले रिजल्ट बिहार बोर्ड पिछले 7 सालों से देश में सबसे पहले इंटर और मैट्रिक का परिणाम जारी करने वाला बोर्ड बना हुआ है। इस बार बोर्ड ने 8वीं बार यह रिकॉर्ड दोहरा है। बिहार इंटरमीडिएट (12वीं) परीक्षा 2026 का रिजल्ट सोमवार को जारी कर दिया गया। इस बार 85.19% स्टूडेंट्स एग्जाम में पास हुए हैं। इसमें 84.09% छात्र और 86.23 छात्राएं सफल रही हैं। साइंस में समस्तीपुर के आदित्य प्रकाश ने टॉप किया है। आदित्य को 481 नंबर आए हैं। वहीं कॉमर्स में पटना की अदिति कुमारी ने टॉप किया है। अदिति को 480 नंबर आए है। आर्ट्स में गयाजी की रहने वाली निशु कुमार ने बाजी मारी है। उन्हें 479 नंबर आए हैं। तीनों स्ट्रीम में कुल 26 टॉपर्स में 20 लड़कियां हैं। पूर्णिया के लकी अंसारी आर्ट्स के सेकेंड टॉपर बने हैं। लकी के पिता सड़क किनारे फुटपाथ पर घड़ी की दुकान चलाते हैं। लकी ने मेडिकल स्टोर पर काम कर के अपनी पढ़ाई की। कुछ ऐसी ही कहानी वैशाली की मानवी कुमारी और बगहा की नसरीन परवीन की भी है। मानवी के पिता पंकज कुमार अखबार बेचकर किसी तरह परिवार चलाते हैं। घर की आर्थिक मदद के लिए मानवी खुद ट्यूशन पढ़ाती थीं। वहीं नसरीन परवीन के पिता अब्दुल टेलर का काम करते हैं। पढ़िए टॉपर्स की सक्सेस स्टोरीज… सबसे पहले तीनों स्ट्रीम के टॉपर्स की लिस्ट देखिए… पिछले साल से 1% कम रहा रिजल्ट इस साल 85.19% छात्र पास हुए हैं। साल 2025 में 86.56% छात्र सफल हुए थे। इस बार का रिजल्ट पिछली बार से 1 फीसदी कम रहा। पिछले साल साइंस में पश्चिमी चंपारण की प्रिया जायसवाल ने 484 अंक (96.8 प्रतिशत) के साथ टॉप किया था। आर्ट्स में वैशाली की अंकिता कुमारी और बक्सर के शाकिब शाह ने 473-473 अंक (94.6 प्रतिशत) हासिल किए थे। कॉमर्स वर्ग में वैशाली की रौशनी कुमारी ने 475 अंक (95.1 प्रतिशत) लाकर पहला स्थान पाया था। अब तीनों स्ट्रीम के टॉपर्स से मिलिए साइंस टॉपर आदित्य बोले- सेल्फ स्टडी काम आई साइंस टॉपर आदित्य ने बताया, ‘मैंने घर से ही पढ़ाई की शुरुआत की। इसके बाद सिमुलतला में एडमिशन लिया। मैंने घर पर ही सेल्फ स्टडी की। मैं सबसे पहले राधा रानी का धन्यवाद करना चाहूंगा। मेरा परिवार, टीचर्स सभी ने बहुत साथ दिया। मैं आगे जाकर डॉक्टर बनना चाहता हूं। मेरे पिता सरकारी नौकरी में हैं। मां हाउस वाइफ हैं। एक बहन है वो पढ़ाई करती है। 10वीं में मैं टॉप 10 में नहीं आ पाया था। उस वक्त में बहुत निराश हुआ था। मैंने सोच लिया था इंटर में करना है और हो गया। हमें कर्म पर विश्वास करना चाहिए, उसमें कमी नहीं होनी चाहिए। फल की चिंता भगवान पर छोड़ देनी चाहिए।’ किसान की टॉपर बेटी के भूगोल में 100 में 100 नंबर आर्ट्स में टॉप करने वाली निशु के पिता किसान हैं। उन्हें 479 नंबर मिले हैं। उसने भूगोल में 100 में 100 नंबर लाकर उन्होंने अपनी प्रतिभा की पहचान दी। इसके अलावा अंग्रेजी में 90, हिंदी में 97, इतिहास में 97 और राजनीतिक विज्ञान में 95 अंक हासिल किए हैं। निशु गयाजी जिले के खिजरसराय प्रखंड के लोदीपुर गांव की रहने वाली है। वो घर की बड़ी बेटी हैं और पढ़ाई में शुरू से अच्छी रही हैं। निशु के पिता अमोद कुमार ने कहा, ‘मैट्रिक परीक्षा में निशु स्कूल की सेकेंड टॉपर रही थी। मुझे उम्मीद थी कि वह बिहार के टॉप 10 में जरूर आएगी, लेकिन बेटी ने पूरे राज्य में प्रथम स्थान हासिल कर उम्मीदों से भी बढ़कर प्रदर्शन किया। निशु की मां हाउस वाइफ है। बड़े भाई नीरज कुमार गया कॉलेज से BSC की पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि छोटी बहन सुप्रिया कुमारी अगले साल 2027 में इंटरमीडिएट की परीक्षा देगी। CA बनना चाहती है कॉमर्स टॉपर अदिति कॉमर्स की टॉपर अदिति ने भास्कर से बातचीत में कहा, ‘11 बजे से मैं टेंशन में थी कि क्या रिजल्ट होगा। रिजल्ट के समय घर पर मैं और मां ही थी। फिर मैंने पापा-भैया को इसकी जानकारी दी। मुझे बेहतर रिजल्ट की उम्मीद थी, मुझ से ज्यादा मेरी फैमिली को उम्मीद थी।’ अदिति ने कहा, ‘मैंने बहुत मेहनत की है। 10वीं के एग्जाम के बाद से मैं 11वीं की पढ़ाई में जुट गई थी। दिन में 8 घंटे पढ़ाई करती थी। किसी तरह की कोचिंग नहीं ली है। पढ़ाई में कोई कंफ्यूजन होने पर यूट्यूब या फिर AI का सहारा लेती थी।’ अदिति के पिता ने AI से गाना बनाया था कि ‘अगर उड़ना है तो पंख फैलाना होगा।’ इसे सुनकर वो काफी इन्सपायर्ड होती थी। उसका सपना है कि वो CA बने। उनके पिता की बाकरगंज में स्पेयर पार्ट्स की दुकान है। अब आगे पढ़िए टॉपर्स की सक्सेस स्टोरीज आर्ट्स के सेकेंड टॉपर लकी- दुकान पर काम कर के टॉप किया लकी अंसारी शहर के सहायक खजांची थाना क्षेत्र के वार्ड-27 के रहने वाले हैं। उनकी मां गृहिणी हैं। लकी तीन भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं। पांच सदस्यों का पूरा परिवार एक छोटे से कमरे में रहता है। बारिश होने पर छत से पानी टपकता है। लकी बताते हैं, “इंटर की पढ़ाई के दौरान एक समय ऐसा भी आया, जब घर के हालात बेहद खराब हो गए। पिता फुटपाथ पर घड़ी की दुकान चलाते हैं। रोजाना मुश्किल से 400 रुपये की आमदनी होती है। घर की स्थिति संभालने और ट्यूशन फीस जुटाने के लिए मैंने पांच महीने तक मेडिकल स्टोर पर काम किया। जो समय बचता था, उसमें पढ़ाई करता था।” वे आगे कहते हैं, “पढ़ाई के प्रति मेरी लगन देखकर बड़े भैया ने पिताजी से कहकर मुझे मेडिकल स्टोर पर काम करने से मना कर दिया। इसके बाद भैया अतिरिक्त समय तक काम करने लगेफ्रिज, रेफ्रिजरेटर और टीवी जैसी इलेक्ट्रॉनिक चीजें ठीक करते थे और मैं पढ़ाई में पूरी तरह जुट गया। लकी कहते हैं, “मैंने वो दिन भी देखे हैं, जब मानसून में टीन की छत से बारिश का पानी मेरे ऊपर टपकता था। इसके बावजूद मैंने हार नहीं मानी। पूरी मेहनत और लगन से पढ़ाई जारी रखी। जब मैं पढ़ने बैठता था, तो आसपास के बच्चों को खेलते देखकर मन भटकता था। ऐसे समय में घर के खराब हालात याद कर खुद को फिर से पढ़ाई में लगा देता था।” लकी का सपना है, “मैं सरकारी शिक्षक बनना चाहता हूं, ताकि अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकूं। इसके बाद UPSC और BPSC की तैयारी कर IAS-IPS बनना मेरा लक्ष्य है।” कॉमर्स की टॉप-4- को पिता ने अखबार बेचकर पढ़ाया कॉमर्स में राज्य में चौथा स्थान हासिल करने वाली मानवी कुमारी के पिता पंकज कुमार पिछले 25 वर्षों से पेपर हॉकर का काम कर रहे हैं। सीमित आय में परिवार का भरण-पोषण करना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। मानवी की मां संगीता देवी हाउस वाइफ हैं और उन्होंने भी हर कदम पर बेटी का साथ दिया। परिवार में एक भाई और तीन बहनें हैं। भाई शुभम कुमार (16) भी पढ़ाई कर रहे हैं।उनकी बड़ी बहन मांसी कुमारी (21) और साक्षी कुमारी (12) दोनों दिव्यांग हैं। मानवी ने किसी भी तरह की कोचिंग का सहारा नहीं लिया। उन्होंने रोजाना 6 से 7 घंटे सेल्फ स्टडी कर अपनी तैयारी पूरी की। उनका मानना है कि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए, तो संसाधनों की कमी भी सफलता की राह में बाधा नहीं बनती। मानवी ने कोचिंग में पढ़ाकर खुद पढ़ाई की मानवी ने मैट्रिक की परीक्षा संत माइकल पब्लिक स्कूल, देसरी (CBSE बोर्ड) से पास की थी, जिसमें उन्होंने जिले में छठा स्थान हासिल किया था। तभी से यह स्पष्ट हो गया था कि वह पढ़ाई में काफी मेधावी हैं। इंटर में भी उन्होंने अपने उसी प्रदर्शन को दोहराते हुए शानदार अंक हासिल किए हैं। मानवी बताती हैं कि उन्हें बचपन से ही अपनी दादी कांति देवी से प्रेरणा मिलती रही है। दादी के मार्गदर्शन और प्रोत्साहन ने उन्हें हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उनकी यही प्रेरणा आज उनकी सफलता का आधार बनी है। मानवी का सपना है कि वह आगे चलकर चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) बनें और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करें। वह कहती हैं कि यह सफलता उनकी मंजिल नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। आगे भी वह इसी तरह मेहनत कर अपने लक्ष्य को हासिल करना चाहती हैं। पिता ने सिलाई करके पढ़ाया, बेटी आर्ट्स में टॉप- 3 वहीं, बगहा की नसरीन परवीन उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय, बोरवल की छात्रा हैं। परीक्षा में उनका रोल कोड 35161 और रोल नंबर 2603002 रहा। सीमित संसाधनों के बीच पढ़ाई करते हुए उन्होंने यह बड़ी उपलब्धि हासिल की है, जो अन्य छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। विद्यालय के शिक्षकों ने बताया कि नसरीन शुरू से ही पढ़ाई में काफी मेहनती और अनुशासित रही हैं। वह नियमित रूप से पढ़ाई करती थीं और हर विषय को गंभीरता से समझने की कोशिश करती थीं। शिक्षकों का कहना है कि नसरीन की सफलता उनके समर्पण और आत्मविश्वास का परिणाम है। परिजनों के अनुसार नसरीन बचपन से ही मेधावी छात्रा रही हैं। परिवार ने हर कदम पर उनका साथ दिया और पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया। उनकी इस सफलता से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। माता-पिता और रिश्तेदारों ने इसे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताया है। नसरीन परवीन ने बताया, “मेरे पिताजी सिलाई का काम करते हैं। पढ़ाई के दौरान मैं कभी यह नहीं सोचती थी कि मुझे कितने घंटे पढ़ना है। जब भी मन करता, मैं पढ़ने बैठ जाती थी। जब भी आंखें बंद करती थी, तो हमेशा यही सोचती थी कि मुझे अपने पिता के सपनों को पूरा करना है।” नसरीन परवीन आगे भी अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए बड़ा मुकाम हासिल करना चाहती हैं। उनका सपना है कि वे उच्च शिक्षा प्राप्त कर अपने परिवार और समाज का नाम और ऊंचा करें। उनकी इस सफलता से क्षेत्र के अन्य छात्र-छात्राओं को भी प्रेरणा मिलेगी कि मेहनत और लगन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। साइंड सेकेंड टॉपर- पिता की किराने की दुकान साइंस स्ट्रीम में नवादा की सपना कुमारी ने दूसरा स्थान हासिल किया है। सपना ने कुल 500 अंकों में 479 नंबर प्राप्त कर 95.80 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। सपना आगे चलकर कार्डियोलॉजिस्ट बनना चाहती हैं। सपना ने 2024 की मैट्रिक परीक्षा में भी 483 अंक (96.6%) हासिल किए। सपना के पिता परचून की दुकान चलाते हैं। सपना महिला उच्च माध्यमिक विद्यालय, नवादाडीह की छात्रा हैं। उनके पिता किसानी कर घर चलाते हैं। सपना कुमारी ने बताया कि, पूरे साल मैंने NEET परीक्षा के लिए तैयारी की थी। मेरा मेन फोकस नीट एग्जाम क्लियर करना है। वहीं, 12वीं परीक्षा के नजदीक आते ही मैंने सिर्फ दो महीने ही यूट्यूब से पढ़ाई की थी। मुझे पता था 12वीं का एग्जाम इतना टफ नहीं है, आसानी से क्लियर कर लूंगी। मुझे आगे चलकर डॉक्टर बनना है, इसमें भी कार्डियोलॉजिस्ट। मेरी दीदी-भइया मुझे हमेशा मोटिवेट करते रहते थे। मुझे तो लगता था मैं 400 रैंक ही ला पाऊंगी, लेकिन जब मुझे पता चला मैं बिहार की सेकेंड टॉपर हूं तो बहुत खुशी हुई। सीतामढ़ी में हार्डवेयर दुकान की बेटी बनी आर्ट्स में सेकेंड टॉपर सीतामढ़ी की सिद्धि साक्षी ने इंटरमीडिएट की परीक्षा में आर्ट्स में 478 अंक हासिल कर पूरे बिहार में दूसरा स्थान प्राप्त किया है। सिद्धि के पिता प्रशांत कुमार पुपरी में एक छोटी हार्डवेयर दुकान चलाते हैं, जबकि मां रचना देवी गृहिणी हैं। सीमित संसाधनों के बीच सिद्धि ने अपनी मेहनत और लगन से बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जिला के पुपरी प्रखंड स्थित रत्ना लक्ष्मी गांव की सिद्धि साक्षी को CBSE से 10वीं की परीक्षा में 85% अंक मिले थे। सिद्धि बताती हैं कि नियमित पढ़ाई, समय का सही प्रबंधन और आत्मविश्वास उनकी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी रहे। UPSC क्रैक करना चाहती हैं सिद्धि सिद्धि साक्षी आगे उच्च शिक्षा हासिल कर संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा के जरिए देश सेवा करना चाहती हैं। वे अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता के मार्गदर्शन और सहयोग को देती हैं। सिद्धि की सफलता से इलाके में खुशी की लहर है और दूसरे विद्यार्थियों को भी बड़ा सपना देखने की प्रेरणा मिल रही है। एमी ने CBSE छोड़ बिहार बोर्ड से पढ़ाई की वैशाली की एमी सिन्हा की पढ़ाई की शुरुआत किड्स इंटरनेशनल स्कूल, कंचनपुर (बिदुपुर) से हुई, जहां उन्होंने नर्सरी से UKG तक की पढ़ाई की। इसके बाद कक्षा 1 से 3 तक आदित्य टैलेंट स्कूल, हाजीपुर और 4 से 8 तक इंडियन पब्लिक स्कूल, अजमतपुर में पढ़ाई की। उन्होंने 9वीं और 10वीं की पढ़ाई गुरुकुल विद्यापीठ, नवादा से पूरी की और CBSE बोर्ड से मैट्रिक परीक्षा में 96.2 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद उन्होंने एक अहम फैसला लेते हुए CBSE छोड़ बिहार बोर्ड से इंटरमीडिएट करने का फैसला लिया। इंटर की पढ़ाई के लिए उन्होंने संत कबीर महंत राम दयाल दास महाविद्यालय, बिदुपुर बाजार में नामांकन लिया और यहीं से पढ़ाई कर साइंस स्ट्रीम में टॉप कर इतिहास रच दिया। हर क्लास में रही टॉपर, बचपन से ही तेज रही एमी एमी बचपन से ही पढ़ाई में काफी तेज रही हैं। वह अपने हर क्लास में टॉपर रही हैं। उनकी इस निरंतर मेहनत और लगन का ही नतीजा है कि उन्होंने इंटरमीडिएट में भी राज्य स्तर पर अपनी पहचान बनाई। शिक्षकों के अनुसार, एमी न केवल पढ़ाई में अव्वल हैं, बल्कि अनुशासन और समय प्रबंधन में भी अन्य छात्रों के लिए मिसाल हैं। एमी के पिता संजय कुमार सिन्हा पेशे से व्यवसायी हैं और उन्होंने कैमिस्ट्री ऑनर्स से ग्रेजुएशन किया है। वहीं उनकी माता अन्नू प्रिया एक गृहिणी हैं और उन्होंने भी ग्रेजुएशन किया है। माता अन्नू प्रिया घर के कामकाज से समय निकालकर एमी की पढ़ाई में मार्गदर्शन करती थीं। एमी की सफलता में परिवार का अहम योगदान रहा है। एमी के एक भाई और एक बहन हैं। उनके भाई आशीष सिन्हा फिलहाल 9वीं कक्षा के छात्र हैं और आगे CBSE बोर्ड से मैट्रिक परीक्षा देने की तैयारी कर रहे हैं। डॉक्टर बनने का सपना, अभी से कर रही तैयारी एमी फिलहाल मेडिकल की तैयारी कर रही हैं। उनका और उनके परिवार का सपना है कि वह आगे चलकर एक सफल डॉक्टर बनें। छात्रा का कहना है कि उन्होंने अपनी सफलता के लिए नियमित पढ़ाई, सही रणनीति और शिक्षकों के मार्गदर्शन को सबसे ज्यादा महत्व दिया। 35 दिनों के अंदर जारी हुआ रिजल्ट शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने सोमवार को बिहार बोर्ड ऑफिस में परिणाम घोषित किया। इस दौरान बोर्ड के अध्यक्ष आनंद किशोर भी मौजूद रहे। साइंस, आर्ट्स और कॉमर्स- तीनों संकायों का परिणाम एक साथ जारी किया गया है। इस साल करीब 13 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं परीक्षा में शामिल हुए थे। परीक्षा 1 फरवरी से 15 फरवरी 2026 के बीच ली गई थी। 35 दिन के अंदर नतीजे जारी किए गए हैं। इसके साथ ही बिहार बोर्ड देश में लगातार 8वीं बार सबसे पहले रिजल्ट जारी करने वाला राज्य बन गया है। पिछले साल 2025 में 86 फीसदी से ज्यादा छात्र सफल रहे थे। तीनों स्ट्रीम में लड़कियों ने टॉप किया था। टॉपर्स को मिलेगा इनाम बिहार बोर्ड पांच टॉपर्स को इनाम देगा। इस बार इनाम की राशि दोगुनी कर दी गई है। प्रथम स्थान पर आने वाले छात्रों को 2 लाख, द्वितीय स्थान पर आने वाले छात्रों को 1.5 लाख और तीसरे स्थान लाने वाले स्टूडेंट्स को 1 लाख रुपए दिए जाएंगे। 8वीं बार देश में सबसे पहले रिजल्ट बिहार बोर्ड पिछले 7 सालों से देश में सबसे पहले इंटर और मैट्रिक का परिणाम जारी करने वाला बोर्ड बना हुआ है। इस बार बोर्ड ने 8वीं बार यह रिकॉर्ड दोहरा है।


