बिहार पुलिस ने राज्य में बच्चा चोरी की अफवाहों को लेकर सभी जिलों के थानों को अलर्ट कर दिया है। पुलिस ने आम लोगों से सतर्क रहने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। सीआईडी के अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग) अमित कुमार जैन ने कहा कि बच्चा चोरी की कोई भी सूचना मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें और कानून को अपने हाथ में न लें। बुधवार को सरदार पटेल भवन में आयोजित एक प्रेस वार्ता में एडीजी अमित कुमार जैन ने बताया कि पिछले दो दिनों में बच्चा चोरी की पांच शिकायतें सामने आई थीं। इनमें जमुई, पूर्णिया, नालंदा और मुजफ्फरपुर जिलों से मामले शामिल थे। बिहार पुलिस मुख्यालय द्वारा कराई गई जांच में ये सभी शिकायतें अफवाह साबित हुईं। एडीजी ने चेतावनी दी कि बच्चा चोरी की अफवाहें तेजी से फैलती हैं, जिससे भीड़ जुट जाती है और कई बार यह स्थिति मॉब लिंचिंग में बदल जाती है। इसमें निर्दोष लोग भीड़ का शिकार बन जाते हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध परिस्थिति में तुरंत डायल 112 या स्थानीय थाने को सूचना दें। अमित कुमार जैन ने वर्ष 2025 के आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक 14,699 गुमशुदगी के मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 12,526 बालिकाएं और 2,173 बालक शामिल हैं। पुलिस ने जांच के बाद 7,772 बच्चों को बरामद कर लिया है, जबकि 6,927 बच्चे अभी भी गुमशुदा हैं। एडीजी ने स्वीकार किया कि बच्चों की गुमशुदगी के मामलों में वृद्धि हुई है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई जारी है। जिलों के एसपी को सख्त निर्देश, तत्काल ले संज्ञान अमित कुमार जैन ने कहा कि गुमशुदगी के मामलों में पुलिस को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि सूचना मिलते ही तत्काल जांच शुरू की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई बच्चा 24 घंटे तक लापता रहता है तो संबंधित थाने में केस दर्ज करना अनिवार्य है। यदि बच्चा चार महीने तक बरामद नहीं होता है तो मामला एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) को ट्रांसफर कर दिया जाता है। यह यूनिट राज्य के सभी जिलों में सक्रिय है और ऐसे मामलों की विशेष निगरानी करती है। गिरोहों पर कार्रवाई, कई बच्चे बरामद एडीजी ने बताया कि बच्चा चोरी और मानव तस्करी के मामलों में कई गिरोहों को गिरफ्तार किया गया है और कई बच्चों को सुरक्षित बरामद कर उनके परिजनों को सौंपा गया है। बिहार पुलिस निर्धारित एस.ओ.पी के तहत कार्रवाई करती है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के ‘वात्सल्य पोर्टल’ से सभी राज्यों के थाने जुड़े हुए हैं। यदि बिहार से गुम हुआ बच्चा किसी अन्य राज्य में बरामद होता है तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित थाने को मिल जाती है। इसके बाद पुलिस टीम भेजकर बच्चे को वापस लाकर परिवार को सौंप दिया जाता है।
पुलिस की अपील अमित कुमार जैन ने दोहराया कि बच्चा चोरी जैसी संवेदनशील घटनाओं में अफवाह फैलाना या उस पर विश्वास करना खतरनाक हो सकता है। उन्होंने कहा की कानून को हाथ में न लें। किसी भी तरह की सूचना तुरंत पुलिस को दें। जागरूक नागरिक बनें और अफवाहों से बचें। ताकि ऐसी घटना अफवाह न बने और सही तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जा सके। बिहार पुलिस ने राज्य में बच्चा चोरी की अफवाहों को लेकर सभी जिलों के थानों को अलर्ट कर दिया है। पुलिस ने आम लोगों से सतर्क रहने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। सीआईडी के अपर पुलिस महानिदेशक (कमजोर वर्ग) अमित कुमार जैन ने कहा कि बच्चा चोरी की कोई भी सूचना मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचित करें और कानून को अपने हाथ में न लें। बुधवार को सरदार पटेल भवन में आयोजित एक प्रेस वार्ता में एडीजी अमित कुमार जैन ने बताया कि पिछले दो दिनों में बच्चा चोरी की पांच शिकायतें सामने आई थीं। इनमें जमुई, पूर्णिया, नालंदा और मुजफ्फरपुर जिलों से मामले शामिल थे। बिहार पुलिस मुख्यालय द्वारा कराई गई जांच में ये सभी शिकायतें अफवाह साबित हुईं। एडीजी ने चेतावनी दी कि बच्चा चोरी की अफवाहें तेजी से फैलती हैं, जिससे भीड़ जुट जाती है और कई बार यह स्थिति मॉब लिंचिंग में बदल जाती है। इसमें निर्दोष लोग भीड़ का शिकार बन जाते हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि किसी भी संदिग्ध परिस्थिति में तुरंत डायल 112 या स्थानीय थाने को सूचना दें। अमित कुमार जैन ने वर्ष 2025 के आंकड़े भी साझा किए। उन्होंने बताया कि इस वर्ष अब तक 14,699 गुमशुदगी के मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 12,526 बालिकाएं और 2,173 बालक शामिल हैं। पुलिस ने जांच के बाद 7,772 बच्चों को बरामद कर लिया है, जबकि 6,927 बच्चे अभी भी गुमशुदा हैं। एडीजी ने स्वीकार किया कि बच्चों की गुमशुदगी के मामलों में वृद्धि हुई है, लेकिन पुलिस की कार्रवाई जारी है। जिलों के एसपी को सख्त निर्देश, तत्काल ले संज्ञान अमित कुमार जैन ने कहा कि गुमशुदगी के मामलों में पुलिस को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि सूचना मिलते ही तत्काल जांच शुरू की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई बच्चा 24 घंटे तक लापता रहता है तो संबंधित थाने में केस दर्ज करना अनिवार्य है। यदि बच्चा चार महीने तक बरामद नहीं होता है तो मामला एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) को ट्रांसफर कर दिया जाता है। यह यूनिट राज्य के सभी जिलों में सक्रिय है और ऐसे मामलों की विशेष निगरानी करती है। गिरोहों पर कार्रवाई, कई बच्चे बरामद एडीजी ने बताया कि बच्चा चोरी और मानव तस्करी के मामलों में कई गिरोहों को गिरफ्तार किया गया है और कई बच्चों को सुरक्षित बरामद कर उनके परिजनों को सौंपा गया है। बिहार पुलिस निर्धारित एस.ओ.पी के तहत कार्रवाई करती है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार के ‘वात्सल्य पोर्टल’ से सभी राज्यों के थाने जुड़े हुए हैं। यदि बिहार से गुम हुआ बच्चा किसी अन्य राज्य में बरामद होता है तो इसकी सूचना तुरंत संबंधित थाने को मिल जाती है। इसके बाद पुलिस टीम भेजकर बच्चे को वापस लाकर परिवार को सौंप दिया जाता है।
पुलिस की अपील अमित कुमार जैन ने दोहराया कि बच्चा चोरी जैसी संवेदनशील घटनाओं में अफवाह फैलाना या उस पर विश्वास करना खतरनाक हो सकता है। उन्होंने कहा की कानून को हाथ में न लें। किसी भी तरह की सूचना तुरंत पुलिस को दें। जागरूक नागरिक बनें और अफवाहों से बचें। ताकि ऐसी घटना अफवाह न बने और सही तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई की जा सके।


