नालंदा में 8762 छात्रों के डाटा में सुधार के निर्देश:ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर 28 फरवरी तक अपलोड करना होगा, इसके बाद मौका नहीं मिलेगा

नालंदा में 8762 छात्रों के डाटा में सुधार के निर्देश:ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर 28 फरवरी तक अपलोड करना होगा, इसके बाद मौका नहीं मिलेगा

सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले और 75 फीसदी से अधिक उपस्थिति दर्ज कराने वाले छात्रों के लिए एक अहम खबर है। ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर डाटा इंट्री में हुई गड़बड़ी के कारण नालंदा जिले के 8,762 समेत सूबे के करीब 59 हजार छात्र-छात्राएं सरकारी लाभकारी योजनाओं से वंचित हो सकते हैं। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम वीरकर ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) और समग्र शिक्षा के जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (डीपीओ) को 28 फरवरी तक हर हाल में त्रुटिपूर्ण डाटा में सुधार करने का सख्त निर्देश दिया है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर निर्धारित अवधि तक पोर्टल पर डाटा अपडेट नहीं किया गया, तो इसके बाद सुधार का कोई और मौका नहीं मिलेगा। इससे पहले विभाग ने 15 फरवरी तक त्रुटिपूर्ण डाटा सुधारने का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन बड़ी संख्या में पेंडेंसी रहने के कारण अब अंतिम अवसर के रूप में 28 फरवरी तक का समय दिया गया है। डाटा में सुधार न होने की स्थिति में, स्कूल में नियमित रूप से आने वाले छात्र भी साइकिल, पोशाक और छात्रवृत्ति जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के लाभ से सीधे तौर पर वंचित हो जाएंगे। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो शैक्षणिक सत्र 2025-26 में नालंदा जिले में कुल 45,618 विद्यार्थियों के डाटा में गड़बड़ी पाई गई थी। इनमें से 43,452 के डाटा में सुधार कर लिया गया है, जबकि 2,166 विद्यार्थियों का डाटा अब भी त्रुटिपूर्ण है। वहीं, पिछले सत्र 2024-25 में जिले के 57,324 विद्यार्थियों का डाटा गलत था, जिसमें से 50,728 का सुधारा गया है और 6,596 का डाटा अब भी लंबित है। 19 लाख 63 हजार 938 छात्रों के डाटा में ही सुधार

राज्य स्तर की बात करें तो स्थिति और भी चिंताजनक है। सूबे में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के तहत 18 लाख 95 हजार 270 विद्यार्थियों के डाटा में सुधार किया जाना था, जिसमें से अब तक 15 लाख 49 हजार 833 छात्रों का ही डाटा सुधारा जा सका है। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2024-25 में 21 लाख 97 हजार 873 छात्रों का डाटा त्रुटिपूर्ण था, जिनमें से अब तक 19 लाख 63 हजार 938 विद्यार्थियों के डाटा में ही सुधार हो पाया है। इस पूरे मामले को लेकर समग्र शिक्षा अभियान के डीपीओ मो. शाहनवाज ने बताया कि जिले के सभी सरकारी विद्यालयों के प्राचार्यों (हेडमास्टरों) को स्पष्ट आदेश दिया गया है कि वे पात्र लाभुकों के डाटा में मौजूद त्रुटियों का अविलंब निराकरण करें। विभाग का मुख्य लक्ष्य यही है कि स्कूल में 75 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराने वाला कोई भी पात्र विद्यार्थी सरकार की लाभकारी योजनाओं से किसी भी सूरत में वंचित न रहे। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले और 75 फीसदी से अधिक उपस्थिति दर्ज कराने वाले छात्रों के लिए एक अहम खबर है। ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर डाटा इंट्री में हुई गड़बड़ी के कारण नालंदा जिले के 8,762 समेत सूबे के करीब 59 हजार छात्र-छात्राएं सरकारी लाभकारी योजनाओं से वंचित हो सकते हैं। इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम वीरकर ने सभी जिला शिक्षा पदाधिकारियों (डीईओ) और समग्र शिक्षा के जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (डीपीओ) को 28 फरवरी तक हर हाल में त्रुटिपूर्ण डाटा में सुधार करने का सख्त निर्देश दिया है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर निर्धारित अवधि तक पोर्टल पर डाटा अपडेट नहीं किया गया, तो इसके बाद सुधार का कोई और मौका नहीं मिलेगा। इससे पहले विभाग ने 15 फरवरी तक त्रुटिपूर्ण डाटा सुधारने का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन बड़ी संख्या में पेंडेंसी रहने के कारण अब अंतिम अवसर के रूप में 28 फरवरी तक का समय दिया गया है। डाटा में सुधार न होने की स्थिति में, स्कूल में नियमित रूप से आने वाले छात्र भी साइकिल, पोशाक और छात्रवृत्ति जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं के लाभ से सीधे तौर पर वंचित हो जाएंगे। विभागीय आंकड़ों पर गौर करें तो शैक्षणिक सत्र 2025-26 में नालंदा जिले में कुल 45,618 विद्यार्थियों के डाटा में गड़बड़ी पाई गई थी। इनमें से 43,452 के डाटा में सुधार कर लिया गया है, जबकि 2,166 विद्यार्थियों का डाटा अब भी त्रुटिपूर्ण है। वहीं, पिछले सत्र 2024-25 में जिले के 57,324 विद्यार्थियों का डाटा गलत था, जिसमें से 50,728 का सुधारा गया है और 6,596 का डाटा अब भी लंबित है। 19 लाख 63 हजार 938 छात्रों के डाटा में ही सुधार

राज्य स्तर की बात करें तो स्थिति और भी चिंताजनक है। सूबे में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के तहत 18 लाख 95 हजार 270 विद्यार्थियों के डाटा में सुधार किया जाना था, जिसमें से अब तक 15 लाख 49 हजार 833 छात्रों का ही डाटा सुधारा जा सका है। इसी तरह वित्तीय वर्ष 2024-25 में 21 लाख 97 हजार 873 छात्रों का डाटा त्रुटिपूर्ण था, जिनमें से अब तक 19 लाख 63 हजार 938 विद्यार्थियों के डाटा में ही सुधार हो पाया है। इस पूरे मामले को लेकर समग्र शिक्षा अभियान के डीपीओ मो. शाहनवाज ने बताया कि जिले के सभी सरकारी विद्यालयों के प्राचार्यों (हेडमास्टरों) को स्पष्ट आदेश दिया गया है कि वे पात्र लाभुकों के डाटा में मौजूद त्रुटियों का अविलंब निराकरण करें। विभाग का मुख्य लक्ष्य यही है कि स्कूल में 75 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज कराने वाला कोई भी पात्र विद्यार्थी सरकार की लाभकारी योजनाओं से किसी भी सूरत में वंचित न रहे।  

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