बागलकोट जिले में 80 प्रतिशत से अधिक प्रसव ऑपरेशन से, प्रशासन ने मांगी विस्तृत जांच रिपोर्ट
बागलकोट जिले में निजी अस्पतालों में अत्यधिक सिजेरियन (सी-सेक्शन) प्रसव के मामलों को लेकर प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। जिला प्रभारी सचिव मोहम्मद मोहसिन ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि ऐसे निजी अस्पतालों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई की जाए, जहां जरूरत से ज्यादा ऑपरेशन के जरिए प्रसव कराए जा रहे हैं। यह निर्देश जिला पंचायत सभागार में आयोजित कर्नाटक विकास कार्यक्रम (केडीपी) की तिमाही समीक्षा बैठक के दौरान दिए गए। बैठक में अधिकारियों को बताया गया कि जिले के निजी अस्पतालों में 80 प्रतिशत से अधिक प्रसव सर्जरी के माध्यम से हो रहे हैं, जो चिंताजनक स्थिति है। मोहसिन ने कहा कि सरकारी तालुक और जिला अस्पतालों में सिजेरियन प्रसव की दर लगभग 40 से 48 प्रतिशत के बीच है, जबकि निजी अस्पतालों में यह लगभग दोगुनी पाई गई है। उन्होंने इस स्थिति की समीक्षा कर उचित कदम उठाने और नियमों का उल्लंघन करने वाले अस्पतालों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
सामान्य प्रसव के लाभों के बारे में जागरूक किया जाए
उन्होंने विशेष रूप से जमखंडी, मुधोल और महालिंगपुर तालुकों में प्रसव संबंधी शिकायतों की गहन जांच करने को कहा। अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया गया कि गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों को सामान्य प्रसव के लाभों के बारे में जागरूक किया जाए, ताकि अनावश्यक सर्जरी से बचा जा सके। बैठक में अन्य मुद्दों पर भी चर्चा हुई, जिसमें आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या, बच्चों की सुरक्षा और पोषण जैसे विषय शामिल रहे। अधिकारियों को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप आवारा कुत्तों की आबादी नियंत्रित करने के उपाय तेज करने को कहा गया।
समय पर पोषण सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश
इसके अलावा स्कूलों और आंगनवाडिय़ों के आसपास लटकते बिजली तारों को हटाने, बच्चों में अंडे के सेवन के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा आंगनवाडिय़ों को समय पर पोषण सामग्री उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए। प्रशासन का मानना है कि सख्त निगरानी और जनजागरूकता से प्रसव सेवाओं में पारदर्शिता आएगी और मातृ व शिशु स्वास्थ्य बेहतर होगा।


